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डंकी रूट: 'एक दिन...एक बर्गर', डॉलर की चाह में दांव पर जीवन, बड़े घर के सपने में छोटा घर और जमीन भी हाथ से गई

Tue, 28 Oct 2025 01:56 PM IST
शाहरुख खान गगन तलवार, अमर उजाला, करनाल

सार

अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे 50 हरियाणवियों को भारत निर्वासित (डिपोर्ट) किया गया है। इनमें सबसे अधिक करनाल के 16 व कैथल के 14 युवक हैं। इनके अलावा कुरुक्षेत्र व अंबाला के पांच-पांच, यमुनानगर के चार, जींद के तीन, रोहतक व पानीपत का एक-एक युवक शामिल है।
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Donkey Route - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अमेरिका में डॉलर कमाने की चाह में युवाओं ने अपनी जिंदगी को भी दांव पर लगा दिया। डंकी मार्ग से अमेरिका पहुंचने के लिए उन्होंने अपनी जान को भी आफत में डाला। परिवार को बड़ा घर और अच्छे लाइफ स्टाइल के सपने को पूरा करने के इस शार्टकट में छोटा घर और जमीन भी अब हाथ से निकल गई है।
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अमेरिका से डिपोर्ट होकर पहुंचे भारतीय नागरिकों में 16 युवा करनाल जिले के हैं। इनमें ज्यादातर की हालत यह है कि अब वह और उनका परिवार घर में कैद हैं। जहां उन्हें लोगों के सामने शर्मिंदगी झेलनी पड़ रही है वहीं कर्ज की देनदारी का डर भी सता रहा है।

करनाल पहुंचे युवाओं में ज्यादातर ऐसे हैं जिनका एक साल तक जीवन अमेरिका की जेल में बीता। अब वहां के हालात बताते हुए परिवार की आंखों में भी आंसू हैं। बेटे को पूरे दिन में खाने के नाम पर केवल एक बर्गर ही मिलता था और वहां पहुंचने तक के सफर में ऐसा कई बार हुआ जब पीने को पानी भी दिन में एक बार ही नसीब हुआ।
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कर्ज की स्थिति देखें तो किसी ने पिता की छोटी दुकान, मकान व अपने हिस्से की जमीन तक बेच दी तो किसी ने बच्चों की जिद के आगे 40 लाख रुपये तक का कर्ज उठाया। अब उन्हें यह समझ नहीं आ रहा कि वे आगे की जिंदगी कैसे गुजारेंगे और किस माध्यम से वे अपने कर्ज के बोझ को उतार पाएंगे। ऐसे में बेटों के विदेश में सेट होने की खुशी अब गम व पीड़ा में बदल गई है।
 

11 माह खाने को पूरे दिन में एक बर्गर मिला
असंध के पोपड़ा निवासी हुसन का परिवार अभी सदमे में है। परिवार ने खुद को दो दिन से घर में ही बंद कर रखा है और किसी से बात नहीं कर रहा। चाचा सलिंद्र ने बताया कि हुसन मैक्सिको के रास्ते अमेरिका गया था। एजेंटों ने तीन महीने तक दिल्ली में ही बैठाकर रखा। अमेरिका पहुंचने के बाद 11 महीने तक जेल में बंद रहा। इस दौरान खाने में पूरे दिन में केवल एक बर्गर ही मिलता था। चाचा बलिंद्र ने बताया कि भतीजे की विदेश जाने की जिद पर एक किला जमीन, कार, बाइक आदि बेचकर 45 लाख रुपये जुटाए गए थे। अब परिवार पर लाखों रुपये का कर्ज है जिसे उतारने की चिंता सता रही है।
 

10वीं करते ही जमीन बेचकर जुटाए 50 लाख रुपये
बस्तली गांव के युवक तुषार ने बताया कि वह असर कैराना पानीपत के एजेंट के माध्यम से डंकी रूट से अमेरिका गया था। 2023 में 10वीं पास करने के बाद अपने हिस्से की एक एकड़ जमीन बेचकर करीब 50 लाख रुपये जुटाए थे। अमेरिका पहुंचने के सफर के दौरान काफी परेशानियां झेलनी पड़ीं।

जंगल के रास्ते से होते हुए बारिश में भी नदी और नाले पार कराए गए। जैसे-तैसे अमेरिका पहुंचे। दीवार को पार करते ही अमेरिकी पुलिस ने बंदी बना लिया। परिवार में दादा, मां, बड़ा भाई, भाभी सहित पांच सदस्य परेशानी में हैं।

पहले हलवाई पिता की दुकान फिर बिका मकान
संगोही निवासी रजत ने बताया कि 26 मई 2024 को 45 लाख रुपये खर्च करके अमेरिका गए थे। इसके लिए पिता की हलवाई की दुकान को बेचना पड़ा। दो दिसंबर को उन्होंने बॉर्डर पार किया था। तब तक का समय उनका जंगलों में ही बीता। गांव के एजेंट के माध्यम से ही वह अमेरिका गए थे। रजत के भाई विशाल ने बताया कि बाॅर्डर पार करने के बाद उन्होंने बाॅन्ड की अपील के लिए भी रुपये खर्च किए। तब उन्होंने अपना मकान बेचा लेकिन परिवार के सपने अधूरे रह गए।
 

11 महीने जंगल और आठ माह जेल में बीते
गांव बिलौना के गुरजंट ने बताया कि वह छह साल पहले जलमाना के एजेंट के माध्यम से एक किला जमीन बेचकर अमेरिका गए थे। इसके लिए 45 लाख रुपये खर्च किए थे। वहां पहुंचने में 11 महीने का समय लगा। इसके अलावा पकड़े जाने के बाद आठ माह जेल में रहे। इस दौरान कठोर यातनाएं दी गईं। दिन में पीने को पानी का ही सहारा था। पिता की मौत के बाद घर के आर्थिक हालात सुधारने की जिम्मेदारी भी उनके ऊपर थी।
 

अमेरिका की जेलों में प्रताड़ना झेल मायूस होकर लौटे
अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे 50 हरियाणवियों को भारत निर्वासित (डिपोर्ट) किया गया है। इनमें सबसे अधिक करनाल के 16 व कैथल के 14 युवक हैं। इनके अलावा कुरुक्षेत्र व अंबाला के पांच-पांच, यमुनानगर के चार, जींद के तीन, रोहतक व पानीपत का एक-एक युवक शामिल है। 
 

सभी की उम्र 18 से 42 साल के बीच है। ये सभी डंकी रूट से अमेरिका गए थे। वहां छह महीने से लेकर डेढ़ साल तक विभिन्न जेलों में रहे और अब बेड़ियों में वतन लौटे हैं। शनिवार देर शाम अमेरिका के एक विशेष विमान में ये सभी दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट उतरे। सूचना पाकर दिल्ली एयरपोर्ट पहुंची हरियाणा की स्थानीय पुलिस को उनके-उनके जिले के निवासी लोगों को सौंपा गया। 
 

हरियाणा लाए जाने के बाद पुलिस ने सत्यापन के बाद कैथल के गांव तारागढ़ निवासी नरेश कुमार (42) को छोड़कर बाकी सभी को उनके परिजनों के हवाले कर दिया। कोर्ट से भगोड़ा घोषित नरेश पर शराब तस्करी व चेक बाउंस का मामला दर्ज है। उसे गिरफ्तार किया गया है।

अधिकतर युवा एक से डेढ़ साल से अमेरिका में 
कैथल के डीएसपी ललित ने बताया कि अधिकतर युवा एक से डेढ़ साल से अमेरिका में रह रहे थे। इन सभी को वीजा नियमों के उल्लंघन और अवैध प्रवास के कारण जेल में बंद किया हुआ था। कैथल से डंकी रूट से गए करीब एक हजार युवा अब भी अमेरिका में हैं।

मुख्यमंत्री उड़नदस्ते की टीम की निगरानी में रविवार सुबह 11 बजे सभी को उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। इनके अपराधिक रिकॉर्ड की जांच की जाएगी। पुलिस पता लगाएगी कि ये लोग किस रूट से होते हुए पहुंचे थे। 

40 से 70 लाख तक खर्च करके गए, किसी ने भी ट्रैवल एजेंट के खिलाफ नहीं दी शिकायत
करनाल के डीएसपी संदीप कुमार ने प्रेसवार्ता कर बताया, सभी युवा युवा 40 से 70 लाख रुपये खर्च करके डंकी रूट से अमेरिका गए थे। वहां उनको अस्थायी जेलों में रखा गया था। किसी ने अभी ट्रैवल एजेंट के खिलाफ शिकायत नहीं दी है।
 

पानीपत के साहिल ने बताया कि 50 लाख रुपये खर्च करके वह 2024 में डंकी रूट से अमेरिका पहुंचा था। करीब नौ माह तक वह कैंप में रहा। रोहतक के गांव किलोई खास के सन्नी ने बताया कि वह मई 2024 में गया था। अब उसके परिवार की आर्थिक हालत ठीक नहीं है।
 
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पहले भी 604 लोग हो चुके डिपोर्ट, तीन को आ सकता है अगला बैच
इसी साल जनवरी से लेकर जुलाई तक हरियाणा के 604 युवाओं को अमेरिका से डिपोर्ट किया जा चुका है। सूत्रों के अनुसार तीन नवंबर को एक और जत्थे के आने की संभावना है। उसमें आने वाले हरियाणा के लोगों के दस्तावेजों का सत्यापन पुलिस कर रही है। अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद अवैध प्रवासियों को लेकर सख्ती बरती जा रही है। वीजा के नियमों को भी सख्त किया गया है।
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