डॉक्टर राजीव गुप्ता के हत्यारों को पकड़ना पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ था। वारदात के तुरंत बाद एसपी सुरेंद्र सिंह भौरिया ने एएसपी मुकेश की अध्यक्षता में डीएसपी, सीआईए सहित आठ टीमों को गठन तो कर दिया था, लेकिन हत्यारों का कोई सुराग नहीं मिलने के कारण पुलिस की जांच किसी भी दिशा में नहीं चल पा रही थी। पुलिस ने पहले तो परिवार के लोगों से जानकारी ली कि डॉक्टर गुप्ता को किसी ने फिरौती के लिए कभी फोन किया हुुआ, किसी के साथ झगड़ा हुआ हो।
इस बारे में भी परिवार के सदस्यों से कोई जानकारी नहीं मिली पाई। इसके बाद पुलिस की एक टीम ने अस्पताल के कर्मचारियों से पूछताछ की। किसी मरीज ने डॉक्टर के साथ झगड़ा किया हो, किसी मरीज के परिजन ने किया हो। यहां भी पुलिस को पहली बार में कोई जानकारी नहीं मिली। इसके बाद पुलिस ने दोबारा डॉक्टर राजीव गुप्ता के ड्राइवर साहिल से गहनता से जानकारी ली गई। तीनों आरोपी कैसे दिखते थे।
इस पूछताछ में ड्राइवर ने बताया कि एक आरोपी सेहत में हट्टा कट्टा था और बाकी के दो आरोपी दुबले पतले थे। इसके साथ ही ड्राइवर ने यह भी बताया कि जो आरोपी सेहत में अच्छा था। इसके बाद पुलिस ने बाइक पर सवार तीन युवकों की फुटेज निकाली तो एक के बाद एक तार जुड़ते चले गए। पुलिस ने उस कर्मचारी की कुंडली खंगाली तो पता चला कि डायलिसिस तकनीशियन पवन दहिया पाढ़ा जो आरके पुरम में रहता है। उसे डॉक्टर गुप्ता ने दिसंबर, 2018 में अस्पताल से निकाला था। इसके साथ ही पुलिस की एक टीम शहर के चौक चौराहे में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाल रही थी।
इन फुटेज में भी बाइक पर सवार तीन युवकों को सेक्टर-16 वारदात से पहले देखा गया। बस उस फुटेज को पुलिस ने ड्राइवर सहित अस्पताल के स्टाफ को दिखाया तो उन्होंने आरोपी पवन दहिया की पहचान कर ली। फिर क्या ड्राइवर के बताए हुलिए से रात के दस घंटों में पुलिस की आठ टीमों ने मिलकर सुबह पांच बजे तीनों आरोपी पवन दहिया गांव पाढ़ा करनाल जो फिलहाल करनाल आरके पुरम में रहता था उसके बारे में पता चला। इसके बाद उन्होंने रविवार सुबह पांच बजे आरोपी रमन उर्फ सेठी निवासी बड़ी मंगलपुर, शिवकुमार उर्फ सिबू निवासी रामनगर हाल ही निवासी बड़ी मंगलपुर को गिरफ्तार कर लिया।
डॉक्टर के घर की बढ़ाई सुरक्षा
डॉक्टर राजीव गुप्ता के घर की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। आईटीआई चौक स्थित अमृतधारा अस्पताल में ही डॉक्टर का घर है। वहां पुलिस तैनात कर दी गई है। वहीं स्थायी सुरक्षा के लिए भी एसपी ने कहा कि उसकी एक प्रोसेस होती है उसके तहत दी जाएगी।
लाइसेंस की रिवाल्वर साथ रखता था आरोपी पवन, रद्द होगा लाइसेंस
मुख्य आरोपी पवन ने 2009 में रिवाल्वर का लाइसेंस बनवाया था। वह अस्पताल में भी रिवाल्वर लेकर आता था। क्योंकि दस साल तक वह डॉक्टर राजीव गुप्ता के अस्पताल में काम करता था। इस वारदात के बाद आरोपी पवन की रिवाल्वर का लाइसेंस रद्द किया जाएगा।
देसी पिस्तौल के साथ की डॉक्टर की हत्या
आरोपी पवन के पास लाइसेंस की रिवाल्वर थी, लेकिन उसने देसी पिस्तौल के साथ डॉक्टर की हत्या की है। यह पिस्तौल आरोपी यूपी से लाया था। इसके बाद उसने अपने दो दोस्तों को तैयार किया और फिर इस वारदात को अंजाम दिया। क्योंकि आरोपी को पता था कि डॉक्टर गुप्ता किसी टाइम पुराने अस्पताल से नए अस्पताल जाते हैं।
घर से कार लेकर यूपी भाग रहे थे तीनों आरोपी
पुलिस ने बताया कि डॉक्टर की हत्या करने के बाद तीनों आरोपी पहले पवन के घर गए। वहां से पवन ने अपनी स्वीफ्ट कार ली और फिर वे उसमें सवार होकर यूपी भागने के लिए जा रहे थे। इस दौरान सुबह पांच बजे ही पुलिस ने तीनों आरोपियों को यूपी हरियाणा सीमा पर गिरफ्तार कर लिया।
आरोपी शिवकुमार की थी बाइक
जिस बाइक पर सवार होकर तीनों आरोपियों वारदात को अंजाम दिया। यह बाइक आरोपी शिवकुमार की थी। इस बाइक की नंबर प्लेट आरोपियों ने उतार दी थी ताकि कोई नंबर नोट ना कर ले। मुख्य आरोपी पवन ने ही डॉक्टर राजीव गुप्ता को गोली मारी थी।