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अब प्रशासन ने खड़े किये हाथ, क्वांरटीन सेंटर बंद, सैंपल के बाद भेज रहे घर

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कोरोना पॉजिटिव बढ़े तो जिला प्रशासन ने सुविधाओं और व्यवस्थाओं में कमी कर दी गई है। पहले जहां कल्पना चावला मेडिकल कालेज की इमरजेंसी में बनाई गई फ्लू ओपीडी में सैंपल के लिए आने वाले संदिग्ध मरीजों को कुंजपुरा स्थित सैनिक स्कूल में क्वारंटीन किया जा रहा था। लेकिन अब उन्हें सैंपल देने के बाद अपने घर भेजा जा रहा है। हालांकि, इसमें कोरोना संक्रमण फैलने का डर ज्यादा है, क्योंकि रिपोर्ट अगले दिन सुबह आती है। ऐसे में ज्यादातर लोग अपने घर जाने से बचते हैं। इसलिए काफी संख्या में लोग इमरजेंसी के बाहर ही सो जाते हैं। सुबह नेगेटिव रिपोर्ट आने पर ही वह अपने घर जाते हैं। जबकि पाजिटिव को ही मेडिकल कालेज में दाखिल किया जा रहा है। ऐसे में सवाल ये है कि क्वांरटीन सेंटर बंद क्यों किया गया। क्या प्रशासन कोरोना फैलने का मौका दे रहा है।
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सूरत से पहुंचे दंपती ने बताया कि वे घीड़ में रहते हैं, लेकिन बिना टेस्ट के घर नहीं जा सकते। जबकि मेडिकल कालेज ने सैंपल के बाद उन्हें घर जाने के लिए कह दिया। लेकिन उन्होेंन पूरी रात इमरजेंसी के सामने बने पार्क में ही गुजारी । एक अन्य व्यक्ति का कहना है कि उनका करनाल में घर नहीं है और वह गुजरात से आया है। मजबूरी में खुले आसमान के नीचे ही सोना पड़ा है। यहां तक कि पानी तक की व्यवस्था नहीं है। सुबह जैसे ही 10 बजे रिपोर्ट आती है, वे अपने घर चले जाते हैं। अगर वे पाजिटिव हए तो खतरा और बढ़ सकता है।
सैंपल और रिपोर्ट को लग रही लाइन
मेडिकल कालेज की फ्लू ओपीडी में सैंपल देने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। पहले जहां यह संख्या 200 से 250 तक थी, अब यह संख्या 400 को पार कर रही है। टेस्ट के दौैरान भीड़ के कारण सोशल डिस्टेंसिंग तक का पालन नहीं हो रहा है। टेस्टिंग के लिए उन सरकारी और गैर सरकारी कर्मचारियों की लाइन लग जाती है, जिनको ज्यूटी ज्वाइन करनी होती है। क्योंकि संस्थान उनसे पहले नेेगेटिव रिपोर्ट मांगता है, लेकिन कालेज से उन्हें नेगेटिव की रिपोर्ट नहीं दी जाती है, बल्कि इमरजेंसी के बाहर एक लिस्ट लगा दी जाती है।
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लक्षणों वालों को करते हैं दाखिल
डीसी निशांत कुमार यादव का कहना है कि अब कुंजपुरा सैनिक स्कूल की बजाए नीलोखेड़ी में कोविड केयर सेंटर बनाया गया है। जिन लोगों को लक्षण होते हैं, उनको सैंपल देने के बाद मेडिकल कालेज में दाखिल किया जाता है। जिनको कोई लक्षण नहीं है, उनको घर पर ही होम क्वांरटीन की सलाह के साथ घर भेजा जा रहा है।
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