माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान (सीएसएसआरआई) करनाल ने लवणीय, क्षारीय भूमि के साथ साथ खारे पानी वाले क्षेत्रों में बेहतर पैदावार के लिए गेहूं, सरसों और चने की नई किस्मों का बीज वितरण शुरू कर दिया है। किसान संस्थान में आकर इन किस्मों का बीज ले सकते हैं, कोई भी किसान अपनी जरूरत के हिसाब से कितना भी बीज ले सकता है।
सीएसएसआरआई के फसल सुधार विभाग के अध्यक्ष डॉ. सतीश कुमार सनवाल ने बताया कि हरियाणा, पंजाब सहित कई देश के कई राज्यों में बड़ी मात्रा में ऐसी भूमि है, जो लवणता और क्षारीयता से प्रभावित है, कई राज्यों में पानी खारा है, जहां सामान्य किस्मों की फसल पैदा नहीं होती है, यदि कहीं होती भी हैं तो पैदावार काफी कम होती है। सीएसएसआरआई के वैज्ञानिकों ने लंबे समय से गेहूं, सरसों, चना सहित कई फसलों की किस्में विकसित की हैं, जो लवणसहनशील है, क्षारीय मिट्टी व खारे पानी के क्षेत्र में भी बेहतर पैदावार देती हैं। इनमें से कुछ किस्मों के बीज संस्थान तैयार किए हैं, जिनका वितरण किसानों को शुरू कर दिया गया है।
ये हैं किस्में
- गेहूं में केआरएल-210, केआरएल-213 व केआरएल-283, सरसों में सीएस-58, सीएस-60, सीएस-61 व सीएस-64 शामिल है। इसके साथ साथ चने की एक किस्म है चना-1, जिसकी बीज उपलब्ध हैं। सरसों के बीज का मूल्य 163 रुपये प्रति किलो, गेहूं के बीज का मूल्य 55 रुपये किलो और चना-1 का मूल्य 130 रुपये किलो रखा गया है। डॉ,सतीश कुमार सनवाल ने बताया कि गेहूं की बिजाई का समय 25 अक्तूबर से शुरू हो जाएगा। सरसों की बिजाई का समय शुरू हो चुका है। चने की बुवाई भी अक्तूबर के अंत में की जाती है।
आईआईडब्ल्यूबीआर में गेहूं बीज वितरण आज से
करनाल। भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (आईआईडब्ल्यूबीआर) में भी आज से किसानों को गेहूं की नई किस्मों का बीज वितरित किया जाएगा। इसके लिए तैयारी कर ली गई हैं। संस्थान के बीज वितरण के प्रभारी डॉ. अमित शर्मा ने बताया कि पहले दिन उत्तर प्रदेश, दिल्ली, मध्यप्रदेश और राजस्थान राज्य के पंजीकृत किसानों को बीज दिया जाएगा।