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जनता के साथ सरकारी विभाग भी नहीं भरते बिजली बिल

Thu, 10 Sep 2015 12:43 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,करनाल
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बिजली नहीं आने पर आम जनता और सरकारी विभागों के कर्मचारियों के हाथ-पांव फूलने लगते है लेकिन बिजली बिल भरने के मामले में उनकी रुचि कम ही दिखाई दे रही है। बिजली निगम की लिस्ट में जनता के साथ-साथ सरकारी महकमे भी डिफाल्टर हैं। जिले में लोगों के खिलाफ निगम के एक अरब 33 करोड़ रुपये, जबकि सरकारी महकमों में साढ़े सात करोड़ रुपये बकाया हैं।
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चौंकाने वाली बात है कि डिफाल्टर सूची में डीसी, एसपी के कार्यालय शामिल हैं। इन्होंने लंबे समय से बिजली बिल अदा नहीं किया है। इससे निगम को घाटा है और लोगों को बेहतर बिजली सप्लाई करने में कहीं-कहीं दिक्कत आ रही है। करोड़ों रुपये की रकम निकालने के लिए निगम के अफसरों को उच्चाधिकारियों के निर्देशों का इंतजार है। पूरी रिपोर्ट बनाकर मुख्यालय भेज दी है।

यह खुलासा बुधवार को बिजली निगम करनाल सर्कल के एसई डीवीएस धनखड़ ने प्रेसवार्ता करके किया। एसई धनखड़ ने पंचायती चुनाव की तिथि की घोषणा होते ही निगम ने प्रत्येक सब डिवीजन में एनओसी लेने के लिए स्पेशल काउंटर खोल दिए हैं, ताकि चुनाव प्रक्रिया में उम्मीदवार को एनओसी लेने में दिक्कत न आए।
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एसई डीवीएन धनखड़ ने बताया कि पब्लिक हेल्थ के खिलाफ चार करोड़ 84 लाख, पुलिस विभाग के खिलाफ 99 लाख 95 हजार (मधुबन कांप्लेक्स के खिलाफ 73 लाख 84 हजार), बार एसोसिएशन के खिलाफ 33 लाख, ईपीएफ कार्यालय के खिलाफ दो लाख 20 हजार, इंकम टैक्स के खिलाफ 11 लाख 10 हजार, हुडा के खिलाफ 29 लाख 67 हजार रुपये सहित एक दर्जन से अधिक विभागों के खिलाफ बकाया है।

दूसरी तरफ जिनके कनेक्शन चल रहे हैं 48 हजार घरेलू उपभोक्ताओं के खिलाफ 35 करोड़ व कनेक्शन कट चुके 55 हजार लोगों के खिलाफ 84 करोड़ रुपये बकाया है। कृषि उपभोक्ता जिनके कनेक्शन चल रहे 28 हजार उपभोक्ताओं के खिलाफ 10 करोड़ 66 लाख, कनेक्शन कट चुके 3445 उपभोक्ताओं के खिलाफ तीन करोड़ 21 लाख रुपये बकाया है।

जगमग फीडरों पर बेहतर कार्य
एसई धनखड़ ने कहा कि करनाल जिले में पांच फीडर जगमग योजना के तहत हैं। इनमें डबरी व गालीबखेड़ी गांव के फीडर पर उपभोक्ताओं के सहयोग से बेहतर काम है। यहां पर 15 से 18 घंटे बिजली सप्लाई कर दी है। डबरी, गालीबखेड़ी, जलमाना, ब्याना व स्टौंडी के फीडर से जुड़े उपभोक्ताओं के लिए योजना है कि वह डिफाल्टिंग अमाउंट को पांच किस्तों में क्लीयर कर सकते हैं।

लाइन लॉस घटाए के सब डिवीजनों को दिए टारगेट
एसई धनखड़ का कहना है कि जिले में लाइन लॉस 34.42 प्रतिशत है। प्रत्येक सब डिवीजन में लाइन लॉस को 27.39 प्रतिशत पर लेकर आने का टारगेट दिया है। मार्च 2016 तक हर हाल में टारगेट को तय करना है। लाइन लॉस का कारण बिजली चोरी व जर्जर तार हैं। बिजली चोरी पकड़ने के लिए दिन व रात को चेकिंग होगी और बिजली चोरी क्षेत्र में तारों की जगह केबल लगाई जाएगी। इससे लाइन लॉस का आंकड़ा कम हो सकता है।
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