संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। पीपल वाले मंदिर जुंडला गेट में चल रही श्रीराम कथा के तीसरे दिन कथा व्यास हरिओम महाराज ने कहा कि जिन कानों से भगवान की कथा नहीं सुनी जाती वह कान सांप के बिल के समान हो जाते हैं। जो जीभ भगवान का नाम नहीं लेती हैं वह जोभ मेंढक की जीभ की तरह टर-टर करने वाली हो जाती हैं। भगवान से अटूट प्रेम करना ही भक्ति है, इसलिए भगवान से प्रेम अधिक बढ़ाना चाहिए।
श्री राम कथा के चौथे दिन हरिओम महाराज ने कहा कि तीन कल्प में तीन विष्णु का अवतार हुआ है और चौथे कल्प में साक्षात भगवान श्री राम माता कौशल्या के गर्भ से अवतरित हुए है। श्रीराम जन्म प्रसंग से पूर्व सती प्रसंग पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि एक बार माता सती भगवान शंकर बिना बताए ही माता सीता का रूप धारण कर भगवान राम की परीक्षा लेने चली गईं।
लेकिन भगवान श्रीराम ने उन्हें पहचान कर पूछ लिया हे माता आप अकेले कहां घूम रही हैं। यह सुन माता सती संकोच में पड़ गईं, लेकिन भगवान शंकर ने ध्यान लगाकर सती द्वारा भगवान श्रीराम की परीक्षा लेने की बात जान ली। जिसके बाद भगवान शंकर इस सोच में पड़ गए कि सती माता सीता का रूप धारण कर भगवान श्रीराम की परीक्षा लेने चली गईं।
अब ऐसी स्थिति में मैं सती से प्रेम कैसे कर सकता है। माता सती के पिता राजा दक्ष के यहां यज्ञ हो रहा था। जिसमें शामिल होने के लिए माता सती ने भगवान से अपनी इच्छा जाहिर की थी। भगवान शंकर ने माता सती से कहा कि तुम्हारे पिता ने यज्ञ में आने के लिए हम लोगों को आमंत्रित नहीं किया है। इस मौके पूर्व पार्षद युद्धवीर सैनी, बृज गोयल, राजेश गोयल, कार्तिक चौहान, विनय गौतम मौजूद रहे।