- पराशर तीर्थ पर स्नान दान करने से मिलता है मोक्ष : महंत भल्ले गिरी
संवाद न्यूज एजेंसी
निसिंग। बहलोलपुर गांव स्थित प्राचीन महर्षि परासर तीर्थ पर फाल्गुन माह की आवंला एकादशी पर मेला व भंडारे का आयोज किया गया। इसमें भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर पराशर तीर्थ में स्नान व दान कर डुबकी लगाई। इससे पूर्व श्रीमद्भागवत कथा के समापन पर महंत भल्ले गिरी व गोशाला संचालक गोपाल गोस्वामी के नेतृत्व में समाजसेवी राजकुमार गोयल सहित अन्य ने हवन में आहुतियां डालीं।
महंत भल्ले गिरी महाराज ने बताया कि कुरुक्षेत्र भूमि की 48 कोस की परिधि में आने वाले महर्षि पराशर तीर्थ पर स्नान व दान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी कारण तीर्थ में लोगों की गहरी आस्था है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र व आसपास के श्रद्धालु हर वर्ष फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को यहां पहुंचकर स्नान व दान करते हैं। महंत ने बताया कि इस तीर्थ पर स्नान व दान करने वाले श्रद्धालुओं के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। एकादशी को तीर्थ पर विशाल मेले का आयोजन भी किया जाता है। इस तीर्थ का नाम महर्षि वशिष्ठ के पौत्र एवं महर्षि शक्ति के पुत्र परासर के कारण पड़ा। महाभारत के आदिपर्व की कथा के अनुसार परासर बचपन से ही वेदाभ्यास करते थे। मौके पर पूर्व प्रधान अमन दीप शर्मा, कैलाश गोयल, सुशील सिंगला, अजय गोयल, अंकुश सिंगला, अशोक जिंदल, वेदप्रकाश राजेश भारद्वाज सहित अन्य महिला व पुरुष श्रद्धालुओं ने स्नान किया।
तीर्थ पर स्थित हैं तीन मंदिर
पहला मंदिर अष्टकोण के आधार पर बनाया गया है। दूसरे मंदिर में राधा-कृष्ण व हनुमान जी के दीवारों पर चित्र बने हैं। तीसरे मुख्य मंदिर में शिवलिंग स्थापित हैं, जिसमें दीवारों पर गणेश, शिव सहित विष्णु, दुर्गा, शिव पार्वती व लक्ष्मी के चित्र हैं।