माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। धान का उठान न होने से दो दिन तक मंडी बंद रखने के बाद अब फिर से दो दिन के लिए मंडी बंद रखने का फैसला लिया गया है। यानी अब शनिवार और रविवार को भी मंडी बंद रहेंगी। अब सोमवार को ही मंडी खुल सकेंगी। जिसके बाद धान खरीद संभव हो सकेगी। यह निर्णय मंडियां फुल होने के कारण लिया गया है।
हालांकि शुक्रवार को मंडी बंद रही लेकिन आगामी दो दिन फिर से बंद को देखते हुए गेट पर आई धान से भरी ट्रॉलियों की एंट्री करवा ली गई थी। करीब 150 ट्रॉली धान मंडी में आया। ऐसा सिर्फ इसलिए किया गया चूंकि अब मंडी सोमवार को खुलेगी। तब तक मंडी से बाहर ट्रॉली में रखे हुए धान की किसान को पहरेदारी करनी पड़ती। इसलिए मार्केट कमेटी के निर्देशानुसार मंडी में धान की एंट्री दर्ज कराई गई।
धान का उठान धीमी गति से होने की वजह से अनाज मंडी धान की भरी बोरियों से भर चुकी है। इससे पहले भी मंडी रविवार और सोमवार को बंद रह चुकी है। इसके बाद मंगलवार और बुधवार को दो दिन खरीद हुई। फिर वीरवार ओर शुक्रवार को बंद का ऐलान कर दिया गया। इसके तुंरत बाद फिर से शनिवार और रविवार को भी मंडी बंद करने का फैसला लिया गया है।
दूसरी ओर मार्केट कमेटी प्रधान सुरेंद्र त्यागी का दावा है कि मंडी फुल है। उठान चल रहा है। इसलिए दो दिन तक मंडी को बंद रखने का निर्णय लिया गया है। यूपी की ओर से आने वाले धान को बैन कर दिया गया है। जो कुछ ट्रॉलियां आई उन्हें पुलिस के हवाले कर दिया जाता है। शुक्रवार को मंडी बंद थी लेकिन किसान धान लेकर पहुंचे थे। इस विषय पर एसडीएम करनाल से बातचीत की गई। एसडीएम को किसानों की परेशानी बताई गई। उन्होंने किसानों की परेशानी को समझते हुए धान लेने की हामी भरी। इसके बाद गेट पर ही धान की एंट्री दर्ज करवा उसे मंडी में आने दिया गया। अब सोमवार को मंडी खुलेगी। जिसके बाद धान खरीद हो सकेगी।
अब तक 9.35 लाख मीट्रिक टन धान की आवक
उपायुक्त उत्तम सिंह ने बताया कि जिले की विभिन्न मंडियों में अब तक 9 लाख 35 हजार 690 मीट्रिक टन धान की आवक हुई है, जिसमें से खाद्य आपूर्ति विभाग द्वारा 627709 मीट्रिक टन, हैफेड द्वारा 186641 व हरियाणा वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन द्वारा 121340 मीट्रिक टन धान खरीदा गया है। मंडियों से धान उठान का कार्य सरकारी खरीद एजेंसियों को समय पर कराने के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि सरकारी खरीद एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं कि सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य पर पैदावार को खरीदा जाए, किसानों को किसी प्रकार की दिक्कत न आने दें। मंडियों में पर्याप्त मात्रा में बारदाना उपलब्ध रखें, समय पर धान का उठान कराया जाए।