जब 31 जनवरी तक तय समय पर मिल मालिक विभाग को चावल नहीं दे सका तो विभाग के अफसरों को संदेह हुआ। उन्होंने मामले की जांच कमेटी को सौंप दी। अब एक तरफ बैंक उसी धान को अपनी प्रॉपर्टी मान रहा है और दूसरी तरफ विभाग ने दावा ठोका है। इस उलझन में सरकार को चावल उपलब्ध कराने में देरी हो रही है।
निसिंग क्षेत्र के एक राइस मिल के पास खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने करीब 63 हजार क्विंटल धान दिया है। इसके बदले राइस मिलर ने कुल धान का 67 प्रतिशत चावल उपलब्ध कराना है। 31 जनवरी तक विभाग को तय शर्त के मुताबिक चावल उपलब्ध नहीं हो पाया।
समय पर चावल नहीं देने पर जब डीएफएससी विभाग के अधिकारियों ने राइस मिल का दौरा किया तो वे चौंक गए, क्योंकि सरकारी धान पर एक बैंक ने अपना दावा जताया। मामला गंभीर होता देख उन्होंने आला अधिकारियों को सूचना दी। फिलहाल एक कमेटी मामले की जांच कर रही है। उधर, मामले के खुलासे के बाद से बैंक व विभाग दोनों अधिकारियों के पसीने छूटे हुए हैं। हालांकि, विभागीय अधिकारियों को यह भी आशंका है कि मिल में धान ही न हो। जांच के बाद ही असलियत सामने आएगी। ऐसे में जिले के करीब 15 राइस मिल हैं। इनमें से एक राइस मिल से विभाग धान उठा चुका है। अधिकारियों का कहना है कि जो भी राइस मिलर समय पर चावल उपलब्ध नहीं कराएगा उससे धान लेकर उन राइस मिलरों को दिया जाएगा जो समय पर चावल उपलब्ध करा रहे हैं।
जांच रिपोर्ट नहीं बढ़ रही आगे
सूत्रों के अनुसार राइस मिलर ने लाखों रुपये का लोन लिया है। मामला पिछले एक सप्ताह से गर्माया हुआ है, लेकिन विभाग की जांच पूरी होने में भी समय लग रहा है। कुछ कर्मचारियों का कहना है कि ऐसे मामलों का पर्दा दो से तीन दिन में उठ जाता है, लेकिन सप्ताहभर से अफसर जांच में लगे हैं, लेकिन जांच रिपोर्ट को आगे नहीं बढ़ा पा रहे हैं।
वर्जन
निसिंग के एक राइस मिल में सरकारी धान पर लोन लेने का संदेह है। अभी तक यह क्लीयर नहीं है कि लोन सरकारी धान पर लिया है या उससे अपनी निजी धान खरीद रखी थी। जांच कराई जा रही है। यदि सरकारी धान पर लोन लेने की बात सामने आती है तो एफआईआर कराई जाएगी। जांच में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
-निशांत राठी, डीएफएससी, करनाल।