करनाल। ओलंपियन और भारतीय हॉकी टीम के खिलाड़ी नेहा गोयल ने मंगलवार को राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान करनाल के छात्र-छात्राओं के साथ अपनी सफलता की कहानी को साझा कर उन्हें प्रेरित किया। नेहा यहां इंपॉसिबल टू आई एम पॉसिबल सफलता की कहानी के तहत बातचीत करने पहुंची थी।
उन्होंने संस्थान के शताब्दी वर्ष पर आयोजित होने वाली राष्ट्रीय डेयरी मेले में वॉलंटियर के लिए तैयार कराई गई टी-शर्ट का भी विमोचन किया। साथ ही कहा कि वह अपना लक्ष्य निर्धारित करें और उसके लिए खुद को ईमानदारी से समर्पित करें, तभी लक्ष्य को प्राप्त कर पाएंगे। पढ़ाई लिखाई सिर्फ किसी एक विषय या कॉपी किताबों व डिग्री तक सीमित नहीं होनी चाहिए, कभी बच्चों के मन में कुछ अलग तरीके से विचार भी आ जाते हैं, कभी निराशा में मन में घर कर जाती है, ऐसे में उन्हें उन लोगों की सफलता की कहानियां प्रेरणा देती हैैं। ऐसी ही एक हॉकी खिलाड़ी नेहा गोयल को एनडीआरआई डीम्ड यूनिवर्सिटी ने जेंडर एडवांसमेंट फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंस्टीट्यूशंस और आईडीपी-एनएएचईपी (नहेप) परियोजना के तहत आमंत्रित कर विद्यार्थियों से सीधा संवाद कराया।
एनडीआरआई के निदेशक एवं कुलपति, डॉ. धीर सिंह ने कहा कि नेहा गोयल कड़ी मेहनत, जुनून और आत्मविश्वास की मिसाल हैं।
विद्यार्थियों के सवाल, ओलंपियन के जवाब
सवाल- खेल में रुचि कैसे हुई और मोटीवेशन कहां से मिला ?
जवाब- एक समय था, जब उसके पास अच्छे कपड़े, जूते नहीं थे। सहेली ने सलाह दी कि अच्छे जूते और कपड़े चाहिए तो किसी खेल टीम में शामिल होना होगा, वहां बहुत अच्छे कपड़े, जूते मिलते हैं। बाच समझ में आई तो ध्यान देना शुरू किया। खेलने गई तो वहां ड्रेस मिली। लेकिन जब खेल खेला और सराहना मिली तो उसने हौसला बढ़ाया। मन में एक सपना संजोया कि चाहे जो भी हो लेकिन वह भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व जरूर करेगी।
सवाल- आपने हॉकी को ही क्यों चुना और इस पर ध्यान केंद्रित कैसे करती है?
जवाब- पहली बात तो ये है कि मेरी लंबाई पांच फुट है, इसलिए किसी और खेल में जाने का सोचा ही नहीं। दूसरी बात ये है कि चाहे कोई छात्र या छात्रा हो, वह लगातार पढ़ाई करे तो भले ही कुछ देर के लिए ही सही लेकिन उसे बोझिलता महसूस होने लगती है। इसलिए यदि वह किसी दूसरे खेल या किसी अन्य गतिविधि में ध्यान लगा दे तो रिफ्रेश महसूस करता है, उसके बाद वह अपनी पढ़ाई पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेंगे। ऐसा ही उसने भी किया।