संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। शहर की महिलाएं दिवाली पर घर को सजाने के लिए तैयारियों में जुट गई है। कई महिलाएं पारंपरिक दीपक और रंगोली से घरों को सजा रही हैं, तो कई बाजार में उपलब्ध सजावटी वस्तुओं से निखार रही हैं। महिलाओं का कहना है कि मिट्टी के दीपक और हाथों से बनाए तोरण से ही घर की सजावट में चमक आती है।
बाजार में तोरण, बंदनवार, सजावटी मोमबत्तियां और दीपक की मांग सबसे अधिक है। महिलाओं ने कहा कि मिट्टी के दीपक में अपनेपन का एहसास होता है, जिसमें सकारात्मक ऊर्जा भी प्राप्त होती है। उनका मानना है कि वह दिवाली पर स्वदेशी सामान को बढ़ावा देंगी, जिसमें विशेष तौर पर घर को सजाने में मिट्टी के दीयों का उपयोग करेंगी।
-घर ही बनाती है सजावट का सामान
अनीता ने बताया कि वह हर दिवाली पर घर के मुख्य दरवाजे पर रंगोली बनाती हैं, जिसमें उन्होंने बताया कि वह इस रंगोली को अपनी बेटी से बनवाती है। बेटियों से घरों को सजवाना काफी शुभ माना जाता है। उन्होंने बताया कि वह बाहरी सजावटी सामान का उपयोग न करके स्वयं ही कागज व मोतियों शीशों का उपयोग करके तोरण बनाती है।
-
-गोटा और वेलवेट से तैयार किया तोरण
मीनू सैनी ने बताया कि इस दिवाली पर उन्होंने खुद से तोरण बनाया, जिसमें गोटा और मखमल वेलवेट कपड़े का इस्तेमाल किया है। हर साल अलग-अलग प्रकार के तोरण और बंदनवार दोनों बनाती हैं। उन्होंने बताया कि वह 16 साल से अपने घर को स्वयं की बनाई वस्तुओं से ही सजा रही हैं।
-
-सजावट में इको-फ्रेंडली सामग्री का करेंगी उपयोग
शीला देवी ने बताया कि वह इस दिवाली पर घर की सजावट करते समय इको-फ्रेंडली सामग्री का उपयोग कर रही हैं। वह दो तरीके की रंगोलियां बनाएंगी, जिसमें फूलों और रंगों का उपयोग करेगी। उन्होंने बताया कि वह अपने घर के आंगन में बड़े आकार की फूलों से रंगोली बनाती हैं।