आखिर पुराने शहर की सुध लेने डीसी निखिल गजराज पहुंचे तो लोगों को उम्मीदें जगी। बाजार के हालात ऐसे हैं कि यहां से चौपहिया वाहन तो दूर, मोटरसाइकिल, साइकिल या पैदल निकलना भी दुश्वार हो गया है।
आलम ये हैं कि नगर के पुराने बाशिंदे अपने पुश्तैनी घरों को छोड़ बाहरी इलाकों में आशियाने बना रहे हैं। शहर के बाजारों में दुकानदार प्रतिदिन 100 से 500 रुपये के हिसाब से सड़क पर फड़ी, ठेले लगवाने की उगाही कर रहे हैं। नगर परिषद के अधिकारी सब कुछ देखकर आंखें मूंदे बैठे हैं।
पुलिस और नगर परिषद एक दूसरे पर आरोप लगाकर बचते रहे हैं, लेकिन अब डीसी निखिल गजराज ने पुराने शहर की न केवल सुध ली, बल्कि इन हालातों में निपटने के लिए बाकायदा प्लान भी तैयार किया है।
इसके तहत संबंधित सभी अफसरों को रविवार को नगर परिषद दफ्तर बुलाया गया है, वहां अतिक्रमण हटाने की पूरी रणनीति बनाई जाएगी। उल्लेखनीय है कि अमर उजाला की ओर से दो बार डीसी के समक्ष पूरे हालातों को ब्योरा रखा जा चुका है।
ये हैं जाम अतिक्रमण के मेन प्वाइंट
-पुराने शहर से सब्जी मंडी हट चुकी है, लेकिन सड़क पर कब्जे जारी
-पुराने और नए शहर की सभी दुकानों के बाहर अतिक्रमण
-फड़ी-रेहड़ी वालों से रोजाना होती है 100 से 500 रुपये की वसूली
-पुराने शहर के सभी बाजार, सलारपुर रोड, कच्चा घेर, मोहननगर, रेलवे रोड, रोटरी चौक, मां भद्रकाली चौक पुराने बस अड्डा, कैसल माल, गोल बैंक, होटल मेजबान के सामने।