- तीन माह में जिला बाल कल्याण समिति के पास बाल यौन उत्पीड़न के 35 केस आए, जिसमें एक पिता ने ही बेटी संग की अभद्रता
राकेश चौहान
करनाल। जिले में नाबालिग बेटियां सुरक्षित नहीं हैं। उनके उत्पीड़न के मामले बढ़ते जा रहे हैं। तीन माह में जिला बाल कल्याण समिति के पास बाल यौन उत्पीड़न के 39 मामले सामने आए हैं। इनमें 35 बच्चियां और चार बच्चे शामिल हैं। इन बच्चों के साथ दुराचार करने वालों में परिवार के सदस्य भी शामिल हैं। जिन्होंने इन्हें डरा धमका कर दुराचार किया। ऐसे में बेटियों की सुरक्षा की चिंता बढ़ती जा रही है। बच्चों के साथ दुराचार करने वालों में कोई पड़ोसी तो कोई जानकार व रिश्तेदार है। जिन बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न हुआ है, उनकी उम्र पांच से 14 वर्ष के बीच है।
जिला बाल कल्याण समिति में एक ऐसा मामला भी सामने आया है। जिसमें एक व्यक्ति ने पिता के रिश्ते को ही शर्मसार कर दिया। आरोपी ने अपनी ही नाबालिग बेटी को गलत जगह छुआ। किसी को बताने पर उसे डराया। लेकिन बेटी ने हिम्मत दिखाई और इस बारे में अपनी मां को बता दिया। इसके बाद समिति ने उस बच्ची की काउंसलिंग की और मामले का खुलासा किया।
शिक्षा के मंदिर में सुरक्षित नहीं बचपन
माता-पिता बच्चों के भविष्य को संवारने करने के लिए उन्हें स्कूल भेजते हैं लेकिन स्कूल में भी बच्चे सुरक्षित नहीं हैं। वहां भी गुरु-शिष्य के पवित्र रिश्ते को कलंकित किया जा रहा है। जो कि बच्चियों को न केवल मानसिक रूप से परेशान करते हैं, बल्कि मौका पाते ही उनका यौन उत्पीड़न भी करते हैं। ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं। जिससे तंग आकर बच्चों ने अपनी जिंदगी खत्म करने का भी प्रयास किया।
वर्जन
इस तरह के मामलों को रोकने के लिए माता-पिता द्वारा बच्चों को जागरूक करना जरूरी है। वह बच्चों को गुड टच बेड टच के बारे में बताएं। साथ ही बच्चों से हर रोज ठीक से बात करें और उनसे पूरी दिनचर्या के बारे में जानकारी लें। यदि कोई बच्चे का उत्पीड़न कर रहा है तो समाज के डर से उसे न छिपाएं, आरोपी के खिलाफ कार्रवाई कराएं।
उमेश चानना, चेयरमैन जिला बाल कल्याण समिति, करनाल