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किसान आंदोलनः सर्राफा बाजार को धीरे से लगा जोर का झटका

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किसान आंदोलन से दिल्ली की ओर जाने वाले रास्ते ठहरे तो सिर्फ इंडस्ट्री ही नहीं, सराफा बाजार को भी जोर का झटका धीरे से लगा है। सराफा बाजार अभी लॉकडाउन से उबरी भी नहीं था कि दिल्ली से सोने-चांदी का आवागमन रुक गया। वहीं दुल्हनों को उनके मनपसंद आभूषण नहीं मिल पा रहे हैं। दिल्ली ही वह शहर है, जहां से सोने व चांदी के नई डिजाइनों के आभूषण हरियाणा सहित देश के कई राज्यों के सराफा बाजार में जाते हैं। दूसरी ओर बाहर से ग्राहकों के कम आने के कारण बाजार को हर रोज करीब सात से दस करोड़ रुपये का नुकासान हो रहा है। सराफा व्यापारी चिंतित हैं, क्योंकि दिसंबर का महीना ही शादियों का सीजन है। इस महीने में शादियों में आभूषणों की होने वाली बिक्री टल गई तो सराफा बाजार भारी नुकसान में चला जाएगा।
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किसान आंदोलन के कारण सराफा बाजार की मुश्किलें काफी हद तक बढ़ चुकी हैं। इन दिनों शादियों का सीजन चल रहा है। आभूषणों की नई डिजाइन दिल्ली से ही आती है, क्योंकि दिल्ली इसका बड़ा बाजार है। हालांकि अभी जो स्टॉक है, उससे काम चल रहा है। -विकास बंसल, ओपीएस ज्वैलर्स, करनाल।
दिल्ली से ही हरियाणा से लेकर जम्मू तक सोने चांदी का जो भी मॉल है, वह दिल्ली से ही जाता है। सभी सराफा बाजारों में एजेंट के माध्यम से आभूषण ले जाते हैं। कूरियर सर्विस से भी मंगाए जाते हैं। लेकिन इन दिनों यह सभी सेवाएं ठप है। -दीपक सिंघल, सराफ लाडवा।
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जिले मे 200 से अधिक सराफा व्यापारी हैं, किसान आंदोलन के कारण दिल्ली से कूरियर सेवा बंद होने से आभूषण नहीं आ पा रहे हैं, कई दिनों का मॉल बुक है, लेकिन कूरियर सेवा के लोग आ नहीं पा रहे हैं। शादियों के आर्डर तक पूरे नहीं हो पा रहे हैं। -अंसुल बंसल, पूर्व प्रधान, सराफा एसोसिएशन, करनाल।
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