माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। एलपीजी की किल्लत के बीच बेटियों की शादी के लिए अब व्यावसायिक गैस सिलिंडर मिल सकेगा, इससे बरात का खाना तो बन जाएगा लेकिन नवरात्र में भंडारे के लिए गैस मिलने पर अभी संशय है। बेटियों की शादी के लिए जिला प्रशासन ने चार सिलिंडर देने की स्वीकृति दी है, जबकि भंडारों के लिए सिलिंडर देने पर सहमति नहीं बन पाई है।
शादी समारोह में भी किसे और कितने सिलिंडर दिए जाएंगे इसकी बकायदा पहले जांच होगी, इसके बाद जिला प्रशासन की ओर से गठित कमेटी निर्णय लेगी तो सिलिंडर मिलेगा। अब तक जिला प्रशासन के पास शादी समारोह में सिलिंडर की मांग के लिए 16 आवेदन आ चुके हैं। प्रत्येक की मांग तो करीब 20 सिलिंडर की है लेकिन प्रशासन की ओर से हर शादी में केवल चार सिलिंडर देने की स्वीकृति दी गई है।
वहीं बड़े भंडारों के लिए भी पांच आवेदन आए हैं, भंडारों के लिए सेवा समितियां 30-30 सिलिंडर देने की मांग कर रही हैं, जिनके प्रस्ताव कमेटी के पास लंबित हैं। अधिकारियों का कहना है कि सरकार के आदेशानुसार ही सिलिंडर दिए जा सकते हैं। प्रशासन के इस फैसले से एक ओर शादी वाले परिवारों को राहत मिली है, तो दूसरी ओर भंडारा आयोजकों को झटका लगा है। खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक मुकेश कुमार ने लोगों और आयोजकों से अपील की है कि वे इस व्यवस्था में सहयोग करें और अनावश्यक मांग से बचें। विशेष परिस्थितियों में ही आवेदन करें, ताकि सभी को समय पर सुविधा मिल सके।
विवाह समारोह को सबसे जरूरी श्रेणी में डाला
एलपीजी संकट के चलते कॉमर्शियल सिलिंडर पर पाबंदी लगाने के बाद सरकार ने स्कूल, कॉलेज और अस्पतालों को सिलिंडर उपलब्ध करवाने के आदेश दिए थे। फिर जरूरतमंदों को 20 प्रतिशत सिलिंडर अलॉट करने का निर्णय लिया गया। प्रशासन ने दावा किया वे सभी शैक्षणिक संस्थाओं, अस्पतालों और विवाह कार्यक्रमों के लिए 200 सिलिंडर दिए जाएंगे। अब इनमें भी सबसे ज्यादा जरूरी श्रेणी में विवाह समारोह को माना गया जिस पर प्रशासन ने शादी समारोह के लिए चार सिलिंडर देने का फैसला किया है।
एडीसी को बनाया नोडल अधिकारी
सबसे अहम बात यह है कि अब किसी भी आयोजन के लिए सिलिंडर देने का फैसला सीधे नहीं होगा। इसके लिए जिला प्रशासन ने एक विशेष कमेटी गठित की है जो हर आवेदन की जांच कर निर्णय लेगी। डीसी ने इस प्रक्रिया के लिए एडीसी को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। कमेटी जरूरत, प्राथमिकता और उपलब्धता के आधार पर अंतिम फैसला करेगी। प्रशासन का कहना है कि यह कदम गैस की कालाबाजारी रोकने और जरूरतमंदों तक सिलिंडर पहुंचाने के लिए उठाया गया है। अधिकारियों के अनुसार अगर अनियंत्रित तरीके से सिलिंडर दिए गए तो आम उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।