सरकार द्वारा 500 और 1000 के नोट बंद करने के बाद लोगों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही है। शुक्रवार को भी नोटबंदी के दसवें दिन भी बैंकों और एटीएम के बाहर लोगों की लंबी कतारेें लगी रही और लोग पैसे बदलवाने और निकालने के लिए परेशान नजर आए। उधर, इस नोटबंदी का असर शहर की सब्जी मंडी पर भी पड़ा है। सरकार द्वारा बड़े नोटों को बंद करने के बाद मंडी के व्यापारियों और सब्जी खरीददारों पर छोटी करंसी का संकट पैदा हो गया है। छोटी करंसी न होने से मंडी में कम खरीददार पहुंच रहे हैं। यहीं हाल फल विक्रेताओं का है। मंडी में ग्राहक हो या व्यापारी सभी पर नोटबंदी भारी पड़ रही है। सब्जी मंडी मेें इन दिनों सब्जियों में भी भारी मंदी है। सब्जी और फलों के रेट कम हो जाने के बाद भी मंडी में ग्राहक नही आ रहे हैं।
वहीं, नोटबंदी के चलते सब्जी मंडी के व्यापारियों ने बाहर से आने वाले फलों एवं सब्जियों की गाड़ियों को मंगवाना कम कर दिया है। व्यापारी प्रधानमंत्री के इस कदम का समर्थन तो कर रहे है, परंतु वहीं बैंकों द्वारा व्यवस्था ठीक न करने पर सवाल उठाए रहे है। सब्जी मंडी आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान बंसी लाल सचदेवा ने बताया कि नोटबंदी के फैसले के बाद मंडी पूरी तरह से प्रभावित हो गई है। उन्होंने बताया कि मंडी में पहले लगभग 75 लाख रुपये का लेनदेन होता था। जोकि प्रधानमंत्री के फैसले के बाद आधे तक सिमटकर रह गया है। खुले पैसे न होने से उपभोक्ताओं ने भी खरीददारी कम कर दी है। वहीं बाहर से आने वाले माल पर भी खुले पैसे का संकट साफ दिखाई दे रहा है। इसके चलते मंडी के आढ़तियों ने बाहर से माल मंगवाना कम कर दिया है।
बाहर से आने वाली टमाटर और प्याज हो गया मंहगा
शहर की सब्जी मंडी में बाहर से आने वाली कई सब्जियों के रेट बढ़े है। वहीं, हरी सब्जियों के रेट में भारी मंदी है। पहले प्रतिदिन मंडी में नासिक से प्याज की 6 गाड़ियां आती थी, जो अब केवल दो गाड़ियों तक रह गई है। वहीं टमाटर की हर रोज की लागत पहले 8 गाडिय़ों की होती थी। जो अब घटकर 2 गाड़ियों तक आ गई है। नासिक में प्याज और टमाटर के व्यापारियों द्वारा एडवांस खुली पेमेंट मांगने के कारण आढ़तियों ने कम गाड़ियां मंगवानी शुरू कर दी है। इससे मंडी में प्याज और टमाटर मंहगा हो गया है।
पहले करवा देते थे खाते में जमा, अब पेमेंट देने का संकट
फल रेहड़ी और फड़ी एसोसिएशन के प्रधान वीरेंद्र जांगड़ा ने बताया कि पहले वह फल की पेमेंट व्यापारियों के खाते में जमा करवा देते थे, लेकिन अब फलों की पेमेंट एडवांस और खुली मांगने के कारण मंडी में फल मंगवाना कम कर दिया है। वहीं इन दिनों फलों के ग्राहक भी कम आ रहे हैं। जांगड़ा ने बताया कि अब मंडी में अमरूद, किन्नू और सेब का सीजन है, जिनमें किन्नू तो सिरसा और झिरका से मंगवाया जा रहा है। जबकि पहले से गोदामों में स्टोर किए गए सेब अब मंडी में बेचा जा रहा है। दूर से आने वाले फलों में व्यापारियों को अधिक दिक्कत है।
सब्जियों के रेटों में आया अंतर
सब्जी किलो में पहले के रेट अब
गाजर 40 रुपये 20
आलू 30 20
मटर 120 60
तोरी 60 30
घीया 30 15
बैंगन 30 15
फूलगोभी 20 10
प्याज प्रति पांच किलो 80 100
खीरा 20 30
शलगम 30 15
टमाटर 10 40
भिंडी 15 30
पेठा 20 10
हरी मिर्च 30 20
क्या कहते है फड़ी संचालक
नई सब्जी मंडी में फड़ी लगाने वाले सुशील, शिवचंद्र, अनिल, सुलेख, रामआसरे ने कहा कि नोटबंदी के बाद सब्जी मंडी काफी प्रभावित हुई है। वह ग्राहकों से 500 के नोट तो ले रहे हैं, परंतु आढ़तियों और अन्य जगह न लिए जाने के कारण उन्हें परेशानी हो रही है। अगर वह बड़े नोट नहीं लेते हैं तो ग्राहक खरीददारी नहीं करते। इससे उनका काम ठप्प हो जाएगा। काम को चालू रखने के लिए वह बड़े नोट ले रहे है। वह अब केवल उतनी सब्जी और फलों की खरीददारी करते है, जितनी उनकी हर रोज की लागत होती है। सब्जी मंडी में पहली से आधी मांग रह गई है। उन्हें उम्मीद है कि जल्द उनकी अच्छी बिक्री होगी।