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Karnal News: सहकारी चीनी मिल में करोड़ों का घोटाला, मुख्य रसायन अधिकारी पर आरोप

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माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। सहकारी चीनी मिल में करोड़ों रुपये का घोटाला उजागर हुआ है। विजिलेंस टीम ने मिल में 33 बिंदुओं पर वित्तीय अनियमितताओं, घटिया सामग्री की खरीद और रासायनिक पदार्थों के दुरुपयोग के गंभीर आरोपों की जांच पूरी कर ली है। मुख्य रसायन अधिकारी संदीप शर्मा की संलिप्तता सामने आई है। पुरानी मिल के सामान को बेचने से लेकर नई मिल में मशीनरी लगाने, व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए आवश्यकता से अधिक केमिकल खरीदने, घटिया क्वालिटी के चीनी बैग खरीदने और मिल लगाने वाली एजेंसी की ओर से बिना सामान लगाए भुगतान करने के आरोप लगाए गए हैं।
विजिलेंस कॉरपोरेशन के मुख्य सतर्कता अधिकारी की ओर से जांच रिपोर्ट हरियाणा राज्य सहकारी चीनी मिल्स संघ लिमिटेड (शुगर फेडरेशन) को भेजी गई। इसमें 15 दिनों में जवाब मांगा गया है। शुगर फेडरेशन ने भी चीनी मिल प्रबंधक से आदेशों के जवाबदेही के लिए पत्राचार किया है। मामले की रिपोर्ट सहकारिता विभाग, हरियाणा सरकार और विशेष सचिव, सतर्कता विभाग, चंडीगढ़ को भी भेजी गई है।
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शुगर मिल में चल रहे भ्रष्टाचार की ये शिकायत दिल्ली निवासी सचिन गोयल और रमेश मदान ने मुख्यालय को दी थी। मुख्य सचिव कार्यालय और सहकारिता विभाग के आदेशों के तहत इन शिकायतों की तथ्य-जांच कराई गई, जिसका निष्कर्ष अब सामने आया है। रिपोर्ट में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की भी सिफारिश की गई है।





मशीनरी में गड़बड़ी, अनुचित भुगतान



जांच रिपोर्ट के अनुसार करनाल चीनी मिल के नए संयंत्र की मशीनरी के 33 बिंदुओं में गंभीर खामियां पाई गईं। इसके बावजूद ठेकेदार कंपनी आईएसजीईसी हेवी इंजीनियरिंग लिमिटेड को लगभग करीब 80 प्रतिशत बिलों का करोड़ों रुपये का भुगतान कर दिया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह भुगतान तत्कालीन प्रबंध निदेशक के कार्यकाल में किया गया था। जबकि सतर्कता अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि पहले किए गए 80 प्रतिशत के भुगतान के बाद शेष 20 प्रतिशत भुगतान तब तक न किया जाए जब तक कि सभी 33 बिंदुओं की खामियों को दूर न किया जाए और दोषपूर्ण मशीनरी का मूल्य वसूला न जाए। इन बिलों पर संदीप शर्मा के हस्ताक्षर भी थे।





घटिया पीपी बैग्स की हुई खरीद


वर्ष 2021-22 और 2022-23 में चीनी की पैकिंग के लिए घटिया गुणवत्ता के पीपी बैग्स खरीदने का आरोप भी मुख्य रसायनज्ञ संदीप शर्मा पर लगाया गया है। ये बैग्स कोलकाता की एमएस अलकनंदा फ्यूल कंपनी से खरीदे गए थे। इनकी गुणवत्ता अत्यंत निम्न पाई गई। कई बैग फटे हुए और कटे थे, जिससे चीनी के स्टॉक में नुकसान हुआ और बिक्री मूल्य भी 60-70 रुपये प्रति क्विंटल तक घट गया। इसे लेकर मिल प्रबंधन की चार सदस्यीय समिति ने जांच के बाद 41.25 लाख की वसूली की सिफारिश की थी। रिपोर्ट के अनुसार यह मामला अब प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई के लिए शुगर फेड और मिल प्रबंधन के पास लंबित है।
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केमिकल की अनावश्यक खरीद


रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि सत्र 2021-22 में संदीप शर्मा ने लगभग 2.5 करोड़ के रासायनिक पदार्थ खरीदे, जिनमें से कई उपयोग में नहीं आए और बेकार चले गए। आरोप है कि यह खरीद व्यक्तिगत लाभ यानी कमीशन के उद्देश्य से की गई थी। जब 2022-23 में यह जिम्मेदारी नए रसायनज्ञ अरुणेश सक्सेना को सौंपी गई, तो मात्र 96 लाख के रसायन ही खरीदे गए, जो मिल की वास्तविक आवश्यकता के अनुरूप थे। सतर्कता अधिकारी ने इस पूरे मामले की जांच विशेषज्ञ समिति से कराने की सिफारिश की है। क्योंकि इसमें तकनीकी विश्लेषण की आवश्यकता है।
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