नगर निगम में 12 प्रतिशत कमीशनखोरी के आरोपों के बाद ठेकेदारों ने अब अधिकारियों के खिलाफ नगर निगम में ही धरना शुरू कर दिया है। निगम के प्रांगण में सुबह 9 बजे से ही ठेकेदारों ने डेरा जमा लिया। उधर, जैसे ही अधिकारियों को ठेकेदारों के धरने का पता चला तो काफी संख्या में अधिकारी कार्यालय में ही नहीं आए। दोपहर एक बजे ईओ धीरज कुमार और एमई मोनिका शर्मा को छोड़कर ज्यादातर अधिकारियों के कार्यालय तो खुले थे, लेकिन वे सीट पर नहीं थे। इतना ही नहीं खुद आयुक्त डॉ. आदित्य दहिया का कार्यालय खुला था, लेकिन वे सीट पर नहीं थे। शाम तक ठेकेदार धरने पर डटे रहे। ठेकेदारों का कहना है कि जब तक निगम में कमीशनखोरी बंद नहीं होती और रोकी गई करीब 14 करोड़ रुपये पेमेंट नहीं की जाती उनका धरना जारी रहेगा। ठेकेदारों ने अधिकारियों को चेताया है कि अगर भ्रष्टाचार बंद नहीं किया तो वे अपनी डायरी भी बाहर निकालेंगे, जिनमें सभी को दिए गए पैंसों का ब्यौरा है।
उधर, रात को आयुक्त डॉ. दहिया के साथ उनके कार्यालय में ठेकेदारों की बैठक हुई और समाधान के प्रयास किए गए। करीब एक घंटे तक चली बैठक के बाद ठेकेदारों को सुबह दस बजे निगम कार्यालय में बुलाया गया और इस दौरान निगम के सभी अधिकारियों को भी पूरा रिकॉर्ड लेकर बुलाया गया है। ठेकेदारों को आश्वासन दिया गया है कि जिसके भी जायज कार्य के पैसे रुके होंगे, उन्हें जल्द पेमेंट कर दी जाएगी।
शुक्रवार को अमर उजाला टीम ने नगर निगम का दौरा किया। इस दौरान केवल निगम के कार्यकारी अधिकारी धीरज कुमार, टैक्स अधिकारी हरफूल व एमई मोनिका शर्मा ही कार्यालयों में बैठे थे। इनके अलावा, आयुक्त कार्यालय, मेयर कार्यालय, सीनियर डिप्टी मेयर व डिप्टी मेयर के कार्यालय भी खाली नजर आए। वहीं, इंजीनियर मुकेश शर्मा, अकाउंट अधिकारी व एसई के कार्यालयों में खाली सीटों पर पंखे चलते मिले। इनमें से कई अधिकारी तो सुबह से ही कार्यालय नहीं तो कुछ बीच में ही निकल गए। हालांकि, ऑफिस के बाहर बैठे कर्मचारियों ने बताया कि साहब फिल्ड में हैं। इस बारे में आयुक्त डॉ. दहिया ने कहा वे बाहर थे, अगर कोई अन्य अधिकारी व कर्मचारी सीट पर नहीं था वे इस बारे में पूछताछ करेंगे।
भ्रष्टाचार की कहानी, ठेकेदारों की जुबानी
निगम में धरने पर बैठे ठेकेदार यूनियन के प्रधान श्याम सुंदर नरवाल, अमन कुमार, प्रवीन और नवीन कुमार ने बताया कि वे बढ़िया काम करना चाहते हैं, लेकिन अधिकारी उन्हें घटिया कार्य करने के लिए मजबूर करते हैं। जब 12 प्रतिशत कमीशन दिया जाएगा तो फिर क्वालिटी पर तो असर पड़ेगा ही। इसलिए वे इस गलत प्रथा के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं और वे आगे से किसी को भी कमीशन नहीं देंगे। ठेकेदारों ने कहा कि अगर जल्द ही उनकी पेमेंट नहीं दी गई वे अपनी डायरियों में लिखे अधिकारियों को दिए गए पैसों के ब्यौरे का भी खुलासा करेंगे। ठेकेदारों ने निगम के अधिकारियों पर 12 प्रतिशत कमीशन के अलावा अन्य बेगार डालने के भी आरोप लगाए। निगम के ठेकेदारों का कहना है कि जब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होता वे न तो निर्माण शुरू कराएंगे और न ही धरने से उठेंगे।
अन्य विभागों के ठेकेदारों को भी साथ जोड़ रहे हैं
एकजुटता दिखा रहे ठेकेदारों का कहना है कि अकेले निगम में ही नहीं अन्य विभागों में भी इसी प्रकार अधिकारी कमीशन लेते हैं। वे इस मामले को लेकर हुडा, पब्लिक हैल्थ, सिंचाई विभाग, पीडब्ल्यूडी व पंचायती राज समेत अन्य विभागों के ठेकेदारों से भी संपर्क साध रहे हैं। जल्द ही उनको भी यूनियन में शामिल किया जाएगा। इसके बाद भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाएंगे और कमीशनखोरी को बंद कराएंगे।
ठेकेदारों को ये है परेशानी
दरअसल, नगर निगम में निर्माण कार्यों की थर्ड एजेंसी से निगरानी रखी जाती है और थर्ड एजेंसी से ओके होने के बाद ही ठेकेदार की पेमेंट की जाती है। बताया जाता है कि जो काम कंपलीट हो चुके हैं, उनके नए आयुक्त ने सैंपल चेक कराए वे फेल पाए गए। इस पर नए आयुक्त ने ठेकेदारों की पेमेंट रोक रखी है। थर्ड पार्टी निगरानी के कारण अब विकास कार्यों में गुणवत्ता मामले में कोई ढिलाई नहीं दी जा रही है। बड़ा कारण यह भी है कि ठेके कम रेट पर लिए गए हैं, इसलिए खर्च पूरे नहीं होने पर ठेकेदारों को परेशानी आ रही है।