करनाल के व्यापारियों के साथ करोड़ों रुपये की ठगी करने का आरोपी अजय शर्मा मूल रूप से सिरसा का रहने वाला है और वह नौंवी कक्षा में फेल होने के बाद आग नहीं पढ़ा। लेकिन शातिर दिमाग के अजय ने दिखावटी शान ओ शौकत के बलबूते बड़े-बड़े लोगों को ठगकर फेल कर दिया। कुछ वर्षों में उसने प्रदेश के ही नहीं देश के नामीगिरामी लोगों के साथ संपर्क स्थापित कर लिया।
पुलिस और प्रशासन के बड़े अधिकारियों और नेताओं के घर आना-जाना शुरू करके धनी लोगों को ठगने लगा। खुद को राजशाही घराने का दिखाने के लिए उसने किराये पर फार्म हाउस, निजी और सरकारी सुरक्षा कर्मचारी भी लिए। इतना ही उसके पास सात से आठ लग्जरी गाड़ियों भी थी, जिनको देखकर कोई भी उसके प्रभाव में आ जाता। उसने हरियाणा से सरकारी पुलिस कर्मचारी भी अपनी सुरक्षा के लिए ले रखे थे, वहीं दिल्ली और पंजाब पुलिस से भी उसको सुरक्षा मिलती थी। इसी दिखावे के चलते उसने करनाल समेत अन्य लोगों को झांसे में फंसाया।
यह खुलासा अजय शर्मा ने पुलिस पूछताछ में किया है। प्रेसवार्ता में करनाल के एसपी पंकज नैन ने दावा किया कि अजय शर्मा ने माना है कि वह नौंवी कक्षा फेल है और उसके कई राजनीतिक घरानों से संपर्क हैं। रौब जमाने के लिए उसने निजी और सरकारी सुरक्षा कर्मचारी भी अपने घर और फार्म पर रखे हुए थे। राजशाही ठाठ दिखाकर ही वह लोगों से बड़े कामों के बदले मोटी रकम लेता था।
इसके अलावा अपने घर में उसने सोनिया गांधी से लेकर रॉबर्ट वाड्रा व अन्य नेताओं के फोटो लगाए हुए थे। दूसरा उसने संस्था सोनिया गांधी एसोसिएशन बना रखी थी, जिसका वह राष्ट्रीय अध्यक्ष था। अजय शर्मा कोई भी छोटी डील नहीं करता था, उसकी डील करोड़ों रुपये से शुरू होती थी। राजनीतिक पार्टियों से टिकट दिलवाने से लेकर पेट्रोल पंप और गैस एजेंसी तक दिलाने का ठेका लेता था। इसके बदले एक से डेढ़ करोड़ रुपये एडवांस लेता था। इसके अलावा, लालबत्ती दिलाने और किसी आयोग का सदस्य बनवाने के लिए भी लोगों को झांसा देता था। अजय शर्मा के नाम पर सबसे कम 20 लाख रुपये राशि ठगने का केस पानीपत में दर्ज है।
यूं फंसाते थे जाल में
एसपी पंकज नैन ने बताया कि अजय शर्मा और उसके दोस्त पहले पहले किसी व्यक्ति को टारगेट करते थे। फिर उसकी दिल्ली में बड़े बड़े लोगों से मीटिंग कराते थे और कई राजनीतिक घरानों तक उसे ले जाते थे। जब संबंधित व्यक्ति को विश्वास हो जाता था उससे काम के पहले से ही रुपये ले लेते थे।
जांच में यह बात भी सामने आई है कि बहुत कम ही लोगों के काम कराए हैं, वह पैसे लेकर अपना नंबर बदल देता था और संबंधित व्यक्ति से मिलना बंद कर देता था। काम न होने पर विश्वास बनाए रखने के लिए एक-दो बार कुछ राशि वापस भी कर देता था। ऐसे में लोग खुद उसके पास जाने लगे और अजय शर्मा एक के बाद एक को अपना निशाना बनाता रहा।
पॉश इलाके में घर और छतरपुर में फार्म हाउस
सिरसा के सेक्टर 20 में अजय शर्मा का मकान है। अजय शर्मा व उसके दोस्तों ने वेस्ट पंजाबी बाग, नई दिल्ली में घर ले रखा था और लोगों पर प्रभाव डालने के लिए छतरपुर में राधामोहन लेन पर एक फार्म हाउस किराये पर ले रखा था। यहां पर 24 घंटे कड़ा पहरा रहता था और चमचमाती लग्जरी कारें घर और फार्म पर खड़ी रहती थीं। इसी चकाचौंध के चक्कर में करनाल के दुनार फूड के मालिक और वीरेंद्र कुमार ठगी का शिकार हुए।
हरियाणा की सबसे बड़ी रिकवरी है : एसपी
एसपी पंकज नैन का दावा है कि यह केस हरियाणा समेत देश के लिए काफी महत्वपूर्ण है। क्योंकि आज तक हरियाणा में किसी भी केस में दो करोड़ रुपये की रिकवरी नहीं हुई है। अजय शर्मा के अन्य केसों को जानने के लिए दिल्ली, पंजाब समेत अन्य राज्यों की पुलिस को सूचना दे दी है। उधर, अजय शर्मा की गिरफ्तारी के बाद से करनाल पुलिस के पास लगातार ठगी के शिकार लोग पहुंच रहे हैं और शिकायत दर्ज करा रहे हैं।
तीन केस किए दर्ज
300 करोड़ का लोन दिलाने पर ठगी
केस नंबर 1- दुनार फूड के एमडी सुरेंद्र गुप्ता की शिकायत पर मधुबन थाना पुलिस ने अजय शर्मा, रितेश तिवारी, हैप्पी, राकेश, विनोद व पंकज के खिलाफ विभिन्न 420, 506 व अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। सभी छह पर आरोप है कि उन्होंने तीन साल पहले विदेशी कंपनियों से 160 करोड़ रुपये का लोन दिलाने पर साढ़े करोड़ रुपये ठगे। इस केस में पुलिस ने दो करोड़ रुपये बरामद कर लिए हैं और इस केस में अदालत ने आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेजने के आदेश दिए हैं।
पेट्रोल पंप और गैस एजेंसी दिलाने पर ठगे डेढ़ करोड़
करनाल के सेक्टर-9 निवासी वीरेद्र ने पुलिस को शिकायत दी थी कि अजय शर्मा ने उससे पेट्रोल पंप और गैस एजेंसी दिलाने के नाम पर डेढ़ करोड़ की ठगी की है। थाना सिविल लाइन पुलिस ने आरोपी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया है। पीड़ित वीरेंद्र का कहना है कि बार बार मांगने पर भी रुपये नहीं लौटाए गए। सिविल लाइन पुलिस ने इस मामले में अजय शर्मा को सीजेएम की अदालत से नौ दिन के रिमांड पर लिया है।
मेंबर बनाने के लिए ठगे 50 लाख
तीसरा केस पुणे निवासी राजेंद्र सिंह यादव की शिकायत पर दर्ज किया गया है। करनाल पुलिस ने जीरो एफआईआर दर्ज करके मामला दिल्ली पुलिस के लिए हैंडओवर कर दिया है। राजेंद्र सिंह ने बताया कि वे पुणे में सिद्धांत ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन के चेयरमैन हैं। ग्रुप के इंजीनिरिंग कॉलेज और स्कूल हैं। ढाई साल पहले अजय शर्मा ने उसे झांसा दिया कि नेशनल लेवल पर सिक्योरिटी कमीशन का मेंबर बना देगा, इसके लिए उसे 50 लाख रुपये दिए गए। वह न तो मेंबर बने और ही उसने पैसे लौटाए। पुलिस ने इस मामले में ठगी का केस दर्ज किया है।
पानीपत में नौकरी के लिए 20 लाख ठगे
एसपी पंकज नैन ने बताया कि वर्ष 2013 में पानीपत में अजय शर्मा के खिलाफ एक व्यक्ति की शिकायत पर नौकरी के नाम पर 20 लाख रुपये ठगने का केस दर्ज है। इस मामले में पानीपत पुलिस को सूचना दे दी है। यह मामला अदालत में ट्रायल स्तर पर है। पानीपत पुलिस को भी अजय की तलाश है।
अजय की पेशी से पहले एक्सपोर्टर के भांजे पर दागीं गोलियां
आरोपी अजय शर्मा की अदालत में पेशी से पहले दुनार फूड के एमडी सुरेंद्र गुप्ता के भांजे संदीप पर वीरवार अल सुबह तीन बजे गोलियां दागीं गईं, गनीमत रही कि गोलियां उसको नहीं लगी। बाद में आरोपी यूपी की तरफ फरार हो गए। पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या के प्रयास का केस दर्ज किया है। सुरेंद्र गुप्ता का भांजा व उसका चालक टोयोटा गाड़ी से अल सुबह करीब तीन बजे जा रहे थे। जब वे बलड़ी बाईपास पर पहुंचे तो बोलेरो गाड़ी में सवार कुछ युवकों पर पहले उनकी गाड़ी पर पथराव किया और बाद में गोलियां दाग दीं। हालांकि, गनीमत रही कि गोलियां किसी को भी नहीं लगी, गाड़ी जरूर क्षतिग्रस्त हो गई। एसपी पंकज नैन का कहना है कि अभी इस मामले में हमलावरों के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता। प्राथमिक जांच में यह लगता है कि हमलावर गोतस्कर हों और पुलिस के शक में उन्होंने गाड़ी पर फायरिंग की हो। फिर भी इस केस की कई पहलुओं से जांच की जा रही है। जल्द ही हमलावरों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
सरकारी सुरक्षा देने पर पुलिस अफसर व नेता हो सकते बेनकाब
करोड़ों रुपये की ठगी के आरोपी अजय शर्मा उर्फ अजय पंडित को कांग्रेस राज में आखिर किसके आदेश पर सरकारी सुरक्षा मिली, यह जांच का विषय है। दूसरा अगर मामले की गंभीरता से जांच हुई तो कुछ सफेदपोश नेताओं के चेहरे भी बेनकाब हो सकते हैं। एसआईटी अब उन दस्तावेजों को खंगाल रही है, जिनके आधार पर अजय शर्मा को सुरक्षा के लिए हरियाणा पुलिस कर्मचारी मिले हुए थे। खुद एसपी पंकज नैन मानते हैं कि अजय शर्मा प्रशासनिक और पुलिस के कुछ आला अधिकारियों के संपर्क में था। यह जांच का अहम हिस्सा होगा कि किसके कहने पर अजय शर्मा को सुरक्षा दी गई थी।
अजय शर्मा ने पुलिस पूछताछ में माना है कि उसके पास कांग्रेस राज में सुरक्षा कर्मचारी थे। इतना नहीं जब वह दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में जाता था तो भी उसे अलग से सुरक्षा मिलती थी। अब करनाल पुलिस ठगी के मामले की जांच के साथ साथ इस बात की जांच कर रही है कि आखिर अजय को सुरक्षा कैसे और कहां से किसके कहने पर मिली?
बता दें कि पुलिस सुरक्षा अलग-अलग कारणों से मिलती है। जान का खतरा होने या फिर वीआईपी होने के कारण सुरक्षा दी जाती है। इसके लिए बाकायदा संबंधित व्यक्ति द्वारा संबंधित जिले के एसपी को सुरक्षा के लिए प्रार्थना पत्र भी देना होता है। ऐसे में जांच का सबसे बड़ा हिस्सा यह है कि आखिर किसके दम पर और कौन से जिले से उसे सुरक्षा मिली?
पूछताछ में अजय शर्मा ने कबूल किया है कि उसके हरियाणा पुलिस के कई आला अधिकारियों से भी संबंध रहे हैं, जिसके चलते वह यह भी दिखाता था कि कोई उसे गिरफ्तार नहीं कर सकता। मामले की जांच कर रही एसआईटी के इंचार्ज डीएसपी जितेंद्र गहलोत का कहना है कि इस मामले में दस्तावेज जुटाए जा रहे हैं। क्योंकि सुरक्षा सरकारी आदेश के बाद ही मिलती हैं, वह दस्तावेज एकत्रित किए जा रहे हैं।
इसके अलावा, अजय शर्मा की कॉल डिटेल से भी पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों के साथ-साथ कुछ नेता बेनकाब हो सकते हैं। एसपी पंकज नैन का कहना है जिसने भी ठगी में अजय शर्मा की मदद की होगी, उसकी जांच की जाएगी। फिलहाल दस्तावेजों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
यूं आया पकड़ में
चार माह पहले दुनार फूड के मालिक सुरेंद्र गुप्ता ने ठगी की शिकायत एसपी पंकज नैन को दी। इसकी जांच सीआईए इंस्पेक्टर दीपक कुमार को सौंपी गई। जांच के दौरान आरोपी से पूछताछ के लिए उसे करनाल बुलाया गया था। वह जांच में शामिल होने के लिए दो बार करनाल पूरे हाईप्रोफाइल स्टाइल में आया था। पुलिस का कहना है कि अजय को इस बात का ओवरकांफिडेंस था कि उसे कोई गिरफ्तार नहीं कर सकता, इसलिए वह बिना किसी डर के पुलिस पूछताछ में शामिल हो गया। पूछताछ में ठगी का मामला सामने आने के बाद आरोपी को पुलिस ने 16 जनवरी को गिरफ्तार कर लिया और बाद में गुपचुप तरीके से अदालत में पेश करके उसे पांच दिन के रिमांड पर लिया था।
बड़े लोगों के पैसे इन्वेस्ट करता था
पुलिस पूछताछ में अजय शर्मा ने माना है कि वह बड़े अधिकारियों व नेताओं के रुपये इन्वेस्ट करता था। इसके अलावा, विवादित प्रॉपर्टी खरीदता था और वह रियल एस्टेट का भी काम करता था। इसी के साथ-साथ वह बड़े लोगों को झांसे में लेकर उनके काम कराने के नाम पर ठगी करता था। अजय शर्मा ने पूछताछ में देश की सियासत के अहम लोगों के नाम भी लिए हैं।
सीएम को भी की थी शिकायत
अजय शर्मा की गिरफ्तारी की खबर के बाद पुणे से करनाल पहुंचे राजेंद्र यादव ने बताया कि उसने पिछली सरकार में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा को भी शिकायत दी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। वह सीएम से लेकर पुलिस के बड़े अधिकारियों के पास ठगी की शिकायत लेकर पहुंचा, लेकिन किसी ने भी अजय शर्मा के खिलाफ केस दर्ज करने की हिम्मत नहीं की। ऐसे में करनाल पुलिस द्वारा अजय की गिरफ्तारी के बाद वह यहां पहुंचा है और यहां पर केस दर्ज कराया है। हालांकि, उसका लेन-देन दिल्ली में हुआ था।