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सीएम सिटी पुलिस : एडीसी और थानेदार को न्याय नहीं दिला पाई तो आप क्या उम्मीद करोगे?

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सीएम सिटी पुलिस : एडीसी और थानेदार को ही न्याय नहीं दिला पाई रही पुलिस
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-15 दिन पहले एडीसी पर गाड़ी चढ़ाने की गई थी कोशिश, आज तक आरोपी की पहचान नहीं
-चोरों और लुटेरों को भी नहीं पकड़ पा रही पुलिस, दावे और आश्वसनों से काम चलाने की कोशिश

अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। मुख्यमंत्री जनता में पुलिस का खौफ कम करने के लिए मित्र कक्ष तक स्थापित करा रहे हैं। लेकिन पुलिस अपना रवैया छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। थानों में आम आदमी से किस प्रकार व्यवहार होता है और कैसे धाराओं के खेल में चक्करघिन्नी बनाई जाती है? जांच के नाम पर किस प्रकार से गंभीर मामलों से जुड़ी फाइलों को दबाया जाता है, इसकी बानगी करनाल में दो ऐसे बड़े मामलों में देखने को मिल रहा है। एक मामला एडीसी से जुड़ा है तो दूसरा सदर थाना प्रभारी से। दोनों ही मामलों में पुलिस केवल जांच के दावे कर रही है लेकिन स्थिति इसके विपरीत है।
पहले मामले में खनन माफिया द्वारा एडीसी को कुचलने की कोशिश की गई तो दूसरी ओर सदर थाने में घुसकर एक इंस्पेक्टर ने हंगामा करते हुए मारपीट की। एडीसी के मामले में पुलिस ने केवल एफआईआर दर्ज करके खानापूर्ति कर दी। थाना प्रभारी के मामले में ये भी नहीं हो पाया। केवल जांच की बात कहकह मामले को समेट दिया गया। इससे भी गंभीर बात ये है कि न तो एडीसी मुंह खोल रहे हैं और न ही थाना प्रभारी। इतना ही नहीं पुलिस न तो लुटेरों को ही पकड़ पा रह है और न ही चोरों को।
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केस नंबर-1
15 दिन पहचान की कोशिश, नतीजा जीरो
3 फरवरी को एडीसी निशांत कुमार यादव मंगलौरा में इंटर स्टेट चेक पोस्ट पर ओवरलोड वाहनों की जांच कर रहे थे। इस दौरान एक कार चालक ने गाड़ी एडीसी पर चढ़ाने की कोशिश की। मौके पर मौजूद लोगों ने पीछा किया तो कार चालक कार छोड़कर फरार हो गया। नाका अधीक्षक पुष्पा देवी की शिकायत पर मधुबन थाना में अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज किया गया। 15 दिन बीतने के बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं। सूत्र बताते हैं कि राजनीतिक हस्तक्षेप के चलते आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया है। इस मामले में आरोपी के खिलाफ हत्या के प्रयास का केस दर्ज है, लेकिन अब इस धारा को बदलने की कोशिश की जा रही है।
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केस नंबर-2
छह दिन बीते, जांच का पता नहीं
थाने में दर्ज मामले के अनुसार 12 फरवरी की रात को सदर थाना प्रभारी मनोज कुमार घर जाने के लिए गाड़ी में बैठे थे। आरोप है कि इसी दौरान मधुबन थाना प्रभारी राजीव कुमार थाने पहुंचे और मनचाहे आईओ को गैंगरेप के प्रयास की फाइल नहीं देने पर आपत्ति जताई। इतना ही नहीं इस दौरान इंस्पेक्टर ने सदर थाना प्रभारी का गला पकड़कर मारपीट की गई। बाद में थाने के अन्य कर्मचारियों ने मामले को शांत किया। सदर थाना प्रभारी की शिकायत पर रपट तो दर्ज कर ली गई, लेकिन आज तक कुछ नहीं किया गया। एसपी जेएस रंधावा ने जांच डीएसपी को सौंपने की बात कही, लेकिन आज तक डीएसपी ने जांच को लेकर एक शब्द नहीं कहा है। जांच कहां है, किसके पास है, किसी के पास जवाब नहीं है? इस मामले में एक सप्ताह बीत चुका है, लेकिन जांच के नाम पर कुछ नहीं हुआ। इंस्पेक्टर की करतूत सीएम दरबार तक भी गूंजी, लेकिन अभी कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हुआ। घटना को लेकर पुलिस का कोई भी अधिकारी अपना मुंह नहीं खोल रहा है। हां, समझौते को लेकर जरूर प्रयास किए गए हैं।
इन्हें भी न्याय की आस
केस नंबर 3
लुटेरों को नहीं कर पाई गिरफ्तार
सेक्टर 7 स्थित ट्रांस्पोर्टर के घर 1 फरवरी को बदमाशों ने पिस्तौल के बल पर परिवार को बंधक बना लिया था। बच्ची की कनपटी पर पिस्तौल लगातर महिलाओं के जेवर उतरवा लिए थे। बदमाश कुल 35 से 40 तोला सोना लूटकर फरार हो गए थे। पुलिस ने केस दर्ज कर चार टीमें गठित कर छापेमारी की, लेकिन हाथ कुछ नहीं लगा। बदमाशों के स्कैच भी जारी किए गए हैं, लेकिन 17 दिन बाद भी उनका पता नहीं लगा पाई है। चेन स्नेचिंग की वारदाते भले ही बढ़ गई हैं।
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केस नंबर-4
बाजार में दो वारदात हुई, सुलझी एक भी नहीं
इसी प्रकार पिछले एक सप्ताह में शहर के मुख्य बाजार में ठगी के दो मामले सामने आ चुके हैं। एक ठग ने दुकानदार से 550 डालर ले उड़ा तो दूसरे मामले में कालेज प्रोफेसर राजेंद्र सिंह को चकमा देकर युवक एक लाख रुपये के जेवर ले उड़ा। दोनों वारदातों में पुलिस देरी से पहुंची। केवल केस दर्ज कर सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद पुलिस दूसरी वारदात के इंतजार में बैठ गई है।
हादसे में बुजुर्ग की टांगें टूटीं, नहीं की कार्रवाई
तरावड़ी। वार्ड नंबर-13 ईदगाह बस्ती के रहने वाले मनोहर लाल (50) की सड़क हादसे में दोनों टांगें टूट गईं, लेकिन उसे कोई मदद नहीं मिल पा रही है। मनोहर लाल मजदूरी कर पैदल ही घर लौट रहा था तो बाइक सवार ने टक्कर मार दी थी। हादसे में मनोहर की दोनों टांगें टूट गई थीं। इसकी शिकायत पुलिस को भी की गई है, लेकिन अब तक पुलिस ने इस मामले में मोटरसाइकिल चालक के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। मनोहर की पत्नी अमीरो देवी ने बताया कि पति की हालत गंभीर है। बाइक चालक के खिलाफ तरावड़ी थाने में शिकायत दी गई है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इधर थाना प्रभारी जनकराज ने बताया कि बाइक चालक को बुलाया गया है। मामले की जांच करने के बाद कार्रवाई की जाएगी।
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वर्जन
एडीसी पर कार चढ़ाने की कोशिश करने व थानेदार से मारपीट के मामले मेरे संज्ञान में हैं। दोनों मामलों में जांच चल रह है। जांच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी। प्रदेश के मुख्यमंत्री जीरो टोलरेंस का उद्देश्य लेकर काम कर रहे हैं। ऐसे में कोई भी अगर उसके साथ गलत हुआ है तो उसे न्याय मिलना चाहिए। गड़बड़ी और लापरवाही किसी भी स्तर पर नहीं जाती है। -अमरेंद्र सिंह, ओएसडी टू सीएम।
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