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डीएफएससी के बाद पुलिस डिफॉल्टर राइस मिलर्स पर भी मेहरबान

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चावल घोटाला पड़ताल :
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डीएफएससी के बाद पुलिस डिफॉल्टर राइस मिलर्स पर भी मेहरबान
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल।
पिछले पांच साल में करनाल जिले में हुए 162 करोड़ रुपये के गबन के मामले की पड़ताल में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग केवल खानापूर्ति के लिए डिफॉल्टर लोगों के खिलाफ केस दर्ज कराता है। इससे भी बड़ी बात ये है कि पुलिस एफआईआर दर्ज करने के बाद डिफॉल्टर राइस मिलर्स पर मेहरबान हो जाती है। आंकड़े बताते हैं कि की बात करें तो गबन के इन मामलों में अब तक केवल राजश्री राइस मिल के संचालक तेजपाल गर्ग ही गिरफ्तार हुए हैं, जबकि अन्य फरार चल रहे हैं। या कह सकते हैं कि पुलिस द्वारा बताए जा रहे हैं। बड़ा सवाल ये है कि आखिरकार इतनी मेहरबानी क्यों है।
बता दें कि पिछले पांच साल में 25 राइस मिलर्स पर 162 करोड़ रुपये बकाया हैं। विभाग ने कई राइस मिलर्स के खिलाफ केस भी दर्ज कराए हैं। इसके बाद भी इन मिलर्स पर कोई असर नहीं पड़ा। कैग की रिपोर्ट आने के बाद हरकत में आई सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया। इस पर खुद को बचाने के लिए डीएफएससी विभाग की ओर से 12 राइस मिलर्स पर गबन और धोखाधड़ी के केस दर्ज कराएं हैं। ये केस फरवरी, 2018 में कराए गए हैं। अहम बात ये है कि करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी मामले में पुलिस ने गिरफ्तारी तो दूर पुलिस ने जांच तक शुरू नहीं की है। डीएफएससी के बाद अब पुलिस इन डिफॉल्टरों पर मेहरबान हो बैठी है।
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इन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं
बड़ा सवाल ये है कि केवल डिफाल्टर राइस मिलर्स के खिलाफ ही केस दर्ज क्यों कराए गए। इस घोटाले के लिए क्या वे अधिकारी इनके लिए जिम्मेदार नहीं हैं, जिन्होंने क्षमता से अधिक पैडी राइस मिलर्स को दी। नियमों के तहत हर 15 दिन के बाद संबंधित एजेंसी के इंस्पेक्टर को राइस मिल की फिजिकल वेरिफिकेशन करनी होती है। इसके अलावा, एजेंसी की ओर से मिल के बाहर माल की निगरानी के लिए एक चौकीदार भी तैनात किया जाता है। ऐसे में इतने बारीकी स्तर पर चेकिंग होने के बाद भी आखिरकार राइस मिलर्स ने चावल को कहां बेचा, इसकी भनक तक विभाग को नहीं लग पाई। ऐेसे में उन सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई बनती है। एक राइस मिलर्स ने बताया कि इस कार्य के लिए जितना जिम्मेदार मिलर है, उतना ही विभाग भी है, ऐसे में विभागीय अधिकारियों के खिलाफ भी केस दर्ज होना चाहिए।

सबसे ज्यादा गड़बड़ी रविंद्र मलिक और मोनिका मलिक के समय हुई
खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के आंकड़े बताते हैं कि सबसे ज्यादा गड़बड़ी डीएफएससी रविंद्र मलिक के समय में हुई है। उनके कार्यकाल में 16 राइस मिल डिफॉल्टर हुए। इसके बाद नंबर आता है मोनिका मलिक का, इनके कार्यकाल में छह मिल डिफाल्टर हुए। इसके अलावा, डीएफएससी निशांत राठी और डीएफएससी अनिल कुमार के समय भी राइस मिलर्स डिफाल्टर हुई और नियमों को ताक पर रख कर पैडी अलाट की जाती रही। इस बारे में डीएफएससी कुशल बूरा का कहना है कि डिफाल्टर के खिलाफ एफआईआर करा दी गई हैं, आगे की कार्रवाई पुलिस करेगी।

फरवरी माह में इनके खिलाफ हो चुकी एफआईआर
फरवरी, 2018 में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की ओर से आशीर्वाद फूडस, दीपक राइस मिल, सुनील कुमार अमित कुमार, एसके ट्रेडर्स, मारुति राइस मिल के संचालकों और पार्टनरों पर धोखाधड़ी के साथ ही करोड़ों रुपये के गबन का केस दर्ज कराया गया है। इसके साथ ही एआर एग्रो के खिलाफ थाना बुटाना में, एलआर इंटरनेशनल, गणपति राइस मिल, महादेव खल एवं ऑयल मिल, भगवती राइस मिल के संचालकों के खिलाफ थाना निसिंग, महालक्ष्मी राइस मिल के खिलाफ थाना तरावड़ी, श्री कृष्ण कृपा राइस मिल के खिलाफ थाना घरौंडा में अलग-अलग करोड़ों रुपये के गबन के केस दर्ज किए गए हैं। इस बारे में सदर थाना प्रभारी हरजिंद्र सिंह का कहना है कि अभी तक इस मामले में किसी राइस मिलर्स की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
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सभी मामलों की जांच की जा रही है। पुलिस की तरफ से किसी भी प्रकार की लापरवाही और देरी नहीं की जा रही है। जिन लोगों ने गलत कार्य किए हैं, उनके खिलाफ सख्त एक्शन लिए जाएंगे। जांच में जो भी दोषी होंगे, उनको बख्शा नहीं जाएगा।
-जेएस रंधावा, एसपी।
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