अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज में ईएनटी और एनेस्थीसिया के डॉक्टर आमने-सामने आ गए। इसी टकराव के चलते पिछले चार दिन से ईएनटी के मरीजों के आपरेशन नहीं हो पाए। एक के बाद एक मरीजों को ऑपरेशन के लिए आगे की तिथि दी गई। मामला यहीं पर नहीं रुका, शनिवार को ईएनटी के डॉक्टर एमएस ऑफिस पहुंच गए और वहां पर एमएस डॉ. जगदीश दुरेजा के सामने रोष जाहिर किया। यहां पर करीब एक घंटे तक आपस में दोनों विभागों के डॉक्टरों में विवाद चला। ईएनटी विभाग के डॉक्टरों ने एनेस्थीसिया के डॉक्टरों पर भी आरोप जड़े। वहीं, एनेस्थीसिया विभाग के डॉक्टरों ने सभी आरोपों को नकारते हुए कहा कि जानबूझकर मरीजों के आपरेशन पोस्टपोन किए जा रहे हैं। बाद में मामला डायरेक्टर सुरेंद्र कश्यप के पास पहुंचा और दोनों पक्षों को बैठाकर उनकी बात सुनी गई। प्रबंधन का दावा है कि मामले को सुलझा लिया गया है।
मरीजों ने दी शिकायत
29 मई को सुशील, अर्जुन और सोनम को ईनएटी विभाग में मरीजों को ऑपरेशन के लिए तिथि दी गई थी, लेकिन बेहोशी का डॉक्टर नहीं मिलने की बात कहकर चार दिन तक उनके ऑपरेशन को पोस्टपोन किया जाता रहा। मामला जब एसएस डॉ. दुरेजा के पास पहुंचा तो संबंधित मरीजों के लिए बेहोशी के डॉक्टर की जरूरत ही नहीं थी। डॉ. दुरेजा ने बताया कि ये ऑपरेशन लोकल थे, बड़े आपरेशन में जरूर एनेस्थीसिया के डॉक्टर की जरूरत होती है। तीन मरीजों को आगे से आगे तिथि दी तो उन्होंने इस मामले की शिकायत दी और मामला कॉलेज प्रबंधन तक पहुंचा। बाद में ईएनटी विभाग के जूनियर डॉक्टर एमएस ऑफिस पहुंचे और रोष जाहिर किया। डॉक्टरों ने ओटी रूम के पास ही ऑफिस देने की भी मांग की।
एमएस ऑफिस है विवाद की जड़
बता दें कि इस समय एनेस्थीसिया विभाग के सीनियर प्रोफेसर डॉ. एमएस दुरेजा मेडिकल कॉलेज के सुपरिंटेंडेंट हैं। फिलहाल उनको ओटी (आपरेशन थियेरटर) रूम के पास ऑफिस अलाट किया गया है और वे वहीं बैठते हैं। इसी बात को लेकर कुछ डॉक्टरों को विवाद है। इस मामले में ईएनटी विभाग के डॉक्टर भी ओटी रूम के पास ही अपने लिए अलग से ऑफिस की मांग कर रहे हैं। हालांकि, इनके पीछे भी किसी और सीनियर डॉक्टर का नाम बताया जा रहा है, लेकिन खुलकर विरोध नहीं कर रहे हैं। बस इसी विवाद को लेकर दोनों विभागों के डॉक्टरों में तनातनी चल रही है।
मामला सुलझा लिया है : डॉ. कश्यप
इस बारे में मेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर डॉ. सुरेंद्र कश्यप का कहना है कि ये कोई बड़ी बात नहीं थी, छोटी-छोटी बातें चलती रहती हैं। दोनों पक्षों को बैठाकर समझा दिया गया है और अब किसी भी प्रकार का विवाद नहीं है। अब सुचारू रूप से ऑपरेशन चल रहे हैं। किसी भी प्रकार का कोई विवाद नहीं है।