अमर उजाला ब्यूरो
घरौंडा (करनाल)। मधुबन के प्लेस ऑफ सेफ्टी हाउस (बाल सुधार गृह)में किशोर बंदियों के बीच हंगामा मारपीट और तोड़फोड़ कर रिकॉर्ड फूंकने के मामले की परतें खुलने लगी हैं। सेफ्टी हाउस में बंदियों की आपसी गुटबाजी के चलते पहले भी हंगामा और मुकदमे दर्ज हुए हैं।
शिफ्टिंग प्रोविजन के तहत मुकदमा दर्ज बंदियों को समय रहते शिफ्ट कर दिया जाता तो इतनी बड़ी वारदात को होने से रोका जा सकता था। शरारती और मुकदमा दर्ज बंदियों को शिफ्ट करने के लिए सेफ्टी हाउस के अधीक्षक ने उच्चाधिकारियों को पिछले साल जुलाई में पत्र लिखे थे, लेकिन अधिकारियों ने इन पत्रों को गंभीरता से नहीं लिया। जिसकी वजह से सेफ्टी हाउस के बंदियों के हौसले और भी ज्यादा बुलंद होते चले गए, जिसका अंजाम बीती शनिवार की रात देखने को मिला।
पहले था ऑब्जर्वेशन, अब बना दिया किशोर सेफ्टी हाउस
सरकार ने चोरी-चकारी, मारपीट, स्नैचिंग और छोटी-मोटी घटनाओं के बंदियों को रखने के लिए पिछले साल फरवरी में ऑब्जर्वेशन होम बनाया था, जिसमें पांच कर्मचारियों को तैनात किया गया था, लेकिन दो माह बाद ही पिछले साल 30 अप्रैल को ऑब्जर्वेशन होम को प्लेस ऑफ सेफ्टी हाउस में तबदील कर दिया गया, जिसमें जघन्य मामलों में संलिप्त 21 वर्ष तक के बंदियों को रखा गया था, लेकिन कर्मचारियों की संख्या में बढ़ोतरी नहीं की गई। सेफ्टी हाउस के अधीक्षक कृष्ण मान के मुताबिक, बंदियों की सुरक्षा के लिए कम से कम 15 कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जानी थी।
इन अधिकारियों को लिखी चिट्ठी
अधीक्षक कृष्ण मान के अनुसार, शरारती बंदियों को शिफ्ट करने के लिए कमेटी के चेयरमैन जिला उपायुक्त, सेशन जज, प्रिंसिपल मजिस्ट्रेट, पुलिस अधीक्षक और महिला एवं बाल विकास विभाग के डायरेक्टर को कई पत्र लिखे गये, लेकिन किसी ने भी संज्ञान नहीं लिया।
सेफ्टी हाउस के सात बैरक हैं और इसकी क्षमता 50 बंदी रखने की है, लेकिन 105 बंदी है। इन बंदियों के बीच आपस में गुटबाजी भी है। पहले भी घटनाओं में उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवाई गई है। इनको शिफ्ट करने के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा गया है, लेकिन किसी ने गंभीरता नहीं दिखाई और बड़ी घटना हो गई।
-कृष्ण मान, अधीक्षक, सेफ्टी हाउस मधुबन।