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बराना गांव के पूर्व सरपंच को मारने के लिए कैनरा बैंक में की थी डकैती, छह साल बाद चार बदमाश काबू

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अमर उजाला ब्यूरो
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करनाल। घरौंडा के बरसत गांव में 30 अक्तूबर, 2012 को केनरा बैंक में हुई डकैती के मामले को सीआईए-1 टीम ने ट्रेस कर लिया है। इस मामले के चार बदमाशों को छह साल बाद पुलिस ने अलग-अलग जगहों से पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पूछताछ में खुलासा हुआ की छह आरोपियों ने मिलकर योजना के तहत केनरा बैंक में 9 लाख, 18 हजार 899 रुपये की डकैती की थी। इन रुपयों से बराना पानीपत निवासी अंकुर गांव के पूर्व सरपंच शिवकुमार को मारना चाहता था। पूर्व सरपंच को मारने का इन आरोपियों ने प्रयास भी किया था। अंकुर फिलहाल लूट और डकैती के अन्य मामले में पहले से ही अंबाला जेल में बंद है। पुलिस ने चारों आरोपियों को कोर्ट में पेश कर चार दिन के पुलिस रिमांड पर लिया है। पुलिस ने चारों आरोपियों से बैंक में डकैती के ढाई लाख रुपये बरामद कर लिए हैं और इसके साथ ही दो देसी पिस्तौल, एक कारतूस और तीन चाकू बरामद कर लिए हैं, जिनसे उन्होंने बैंक में डकैती की थी। पुलिस जल्द ही आरोपी अंकुर को अंबाला जेल से और अनिल को जींद पुलिस से प्रोडक्शन वारंट पर लेकर आएगी। यह जानकारी एसपी सुरेंद्र सिंह भौरिया ने एसपी कार्यालय में प्रेसवर्ता के दौरान दी।

इन-इन जगहों से पकड़ा चारों आरोपियों को
एसपी सुरेंद्र सिंह भौरिया ने बताया कि सीआईए-1 इंचार्ज विरेंद्र सिंह ने एएसआई रामफल और एएसआई अशोक कुमार की अध्यक्षता में दो टीमों का गठन किया और उन्हें सूचना के आधार पर रवाना किया। 17 जुलाई को एएसआई रामफल की टीम ने बदमाश नरेंद्र सिंह वासी पलहेड़ी थाना सदर पानीपत को पानीपत में उसके मेडिकल स्टोर से गिरफ्तार किया, दूसरे बदमाश रविंद्र वासी बबैल थाना सदर पानीपत को उसके गांव बबैल में उसके खेत पर बने ट्यूबवेल से गिरफ्तार किया। इसी प्रकार, एएसआई अशोक कुमार की टीम ने तीसरे बदमाश लोकेश वासी वार्ड नंबर-17 सफीदों जिला जींद को उसके घर सफीदों से व चौथे बदमाश कपिल वासी गांव बाम्बरेहड़ी थाना असंध जिला करनाल को उसके गांव बाम्बरेहड़ी से गिरफ्तार किया गया।
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छह साल पहले नीलोखेड़ी पॉलिटेक्निक में पढ़ते समय बनाई थी योजना
सीआईए-1 इंचार्ज विरेंद्र सिंह ने बताया कि पूछताछ के दौरान चारों आरोपियों ने बताया बैंक में डकैती उन्होंने बराना निवासी अंकुर के कहने पर थी। 2012 में नरेंद्र सिंह, अंकुर व अनिल वे तीनों नीलोखेड़ी पॉलिटेक्निक में पढ़ते थे, उन्होंने नीलोखेड़ी में किराए पर कमरा लिया हुआ था। अंकुर ने उन्हें बताया कि उनके गांव बराना का पूर्व सरपंच शिवकुुमार ने उनके परिवार को परेशान किया हुआ है, उसकी हत्या करनी है, लेकिन उनके पास हथियार नहीं थे। इस लिए उन्होंने बैंक में डकैती करने की योजना बनाई, ताकि उन रुपयों से वह हथियार खरीद कर सरपंच की हत्या कर सके। बड़सत बैंक में डकैती करने की योजना भी अंकुर ने ही बनाई थी, क्योंकि बड़सत गांव अंकुर के गांव बराना के नजदीक है। डकैती के रुपये से अंकुर यूपी से देसी पिस्तौल, चाकू खरीदकर लाया था।
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ऐसे की थी बैंक में डकैती
29 अक्तूबर, 2012 को अंकुर ने अपने साथी कपिल, रविंद्र और लोकेश को बुला लिया था और कमरे बैठकर बैंक में डकैती करने की योजना बनाई। अगले दिन 30 अक्तूबर, 2012 सभी आरोपी बड़सत केनरा बैंक में पहुंचे। लोकेश ने मैनेजर को रोके रखा व शोर मचाने का प्रयास करने पर चाकू से घायल भी किया, अंकुर ने कैशियर से कैश लूटा, नरेंद्र व अनिल ने बैंक के अन्य कर्मचारियों और वहां पर मौजूद पब्लिक को रोके रखा और बैंक के बाहर रविंद्र व कपिल बाइक लेकर तैनात रहे और वारदात को अंजाम देकर वे हवा में फायर करते हुए दोनों बाइकों पर सवार होकर वहां से भाग निकले। इसके बाद नीलोखेड़ी में कमरे पर जाकर बदमाशों ने डकैती के 9 लाख 18 हजार 899 रुपये आपस में डेढ़-डेढ़ लाख रुपये बांटे। डकैती के करीब 25 दिन बाद ही पूर्व सरपंच पर दाग दी थी गोलीएसपी ने बताया कि बैंक में डकैती करने के करीब 25 दिन बाद अंकुर, नरेंद्र, रविंद्र व अनिल ने बराना गांव के पूर्व सरपंच शिवकुमार पर गोली दाग दी। गनीमत रही कि सरपंच की जान बच गई। इस संबंध में पानीपत पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया।
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