गांव काछवा में 19 सितंबर को जानलेवा हमले में घायल सतबीर ने इलाज के दौरान अस्पताल में दम तोड़ दिया। गुस्साए काछवा के ग्रामीणों ने सुबह करीब दस बजे सदर थाने का घेराव कर पुलिस के खिलाफ रोष प्रकट कर आरोपियों की जल्द से जल्द गिरफ्तारी करने की मांग की। पुलिस ने डेढ़ घंटे का आश्वासन दिया तो ग्रामीण सदर थाने के बाहर ही धरना देकर बैठ गए। इन लोगाें का कहना था कि जब तक आरोपी गिरफ्तार नहीं होते तब तक वे शव का पोस्टमार्टम नहीं करायेंगे और ना ही थाने से बाहर जाएंगे। पुलिस ने दोनों मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया तो करीब तीन घंटे बाद परिजनों का गुस्सा शांत हुआ और मृतक सतबीर का पोस्टमार्टम कराया।
पुलिस को दी शिकायत में सोहन लाल ने बताया कि दो साल पहले आरोपी मोनू उर्फ विकास के साथ उसके भाई रिषीपाल की कहासुनी हुई थी। आरोपी विकास ने उसके भाई के साथ मारपीट भी की थी। उस दौरान पंचायत में आरोपी विकास से माफी मंगवाई तो उनका समझौता हो गया था। पंचायत में माफी मांगने पर आरोपी विकास उनसे बदला लेना चाहता था। 19 सितंबर को वह और उसका चाचा सतबीर 36 वर्षीय बाइक पर सवार होकर घर से निकले तो सरकारी स्कूल के समीप आरोपी विकास, उसके साथ सागर और अन्य चार युवक हाथ में गंडासी, लोहे की रॉड लेकर खड़े थे। आरोपी विकास और मोनू ने उनकी बाइक रुकवा ली। वह डरकर अपने ताऊ के घर में जाकर छिप गया तो आरोपी मोनू और उसके अन्य साथियों ने चाचा सतबीर को गंडासी, लोहे की रॉड मारकर गंभीर रूप से घायल कर दिया। लहूलुहान अवस्था में उसके चाचा को आरोपियों ने घसीटा भी और उसकी बाइक को भी तोड़ दिया। फिर वे लोग उसे मारने के लिये नन्हू राम ताऊ के घर पहुंचे। वहां दरवाजा बंद किया हुआ था तो वह वहां रखी कुर्सियां तोड़कर धमकी देते देकर फरार हो गये। उसके बाद अपने चाचा को अस्पताल में लेकर गया। वहां उसका इलाज चल रहा था।
मजदूरी करता था सतबीर
सतबीर मजदूरी कर अपने परिवार का पालन पोषण-करता था। उसके दो लड़कियां और दो लड़के हैं। थाने के बाहर धरना देने में उसकी पत्नी और बच्चे भी शामिल भी शामिल थे। उनका रो रो कर बुरा हाल था।
गांव काछवा में सतबीर पर 19 सितंबर को जानलेवा हमला कर दिया गया था। इस सतबीर की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। इस मामले में दो मुख्य आरोपी विकास व सागर को गिरफ्तार कर लिया है। मृतक का पोस्टमार्टम भी करा दिया है।
बलजीत सिंह, सदर थाना प्रभारी।