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Karnal News: 500 करोड़ से बनी आवर्धन नहर की दीवारों में दरार, पटरी हुई खोखली

Sun, 11 Jan 2026 02:16 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
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आवर्धन नहर के किनारे बना गढ्ढा संवाद
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सुनील शर्मा
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इंद्री। क्षेत्र से होकर बह रही आवर्धन नहर को पक्का करने के कार्य पर 500 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। निर्माण कार्य अभी अंतिम चरण में है लेकिन इसकी दीवारों में दरारें दिखने लगी हैं और पटरी भी खोखली साबित हो रही है। क्योंकि तुरंग गांव के पास नहर के किनारे मिट्टी का कटाव होने के कारण बहुत बड़ा गड्ढा बना है। इससे क्षेत्र के किसानों में भय है कि यदि ऐसे ही हालात में पानी आ गया तो पटरी टूट सकती है और गांवों में पानी आ जाएगा। इसलिए उन्होंने प्रशासन से निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच कराने और खामियों को दूर करने की मांग की है।

वर्ष 2021 में इस नहर को पक्का एवं चौड़ा करने का कार्य शुरू हुआ था। शुरुआत से ही निर्माण कार्य विवादों में रहा है। करीब 380 करोड़ की अनुमानित लागत से नहर को पक्का करने का बजट ड्राइंग में परिवर्तन के कारण बाद में 500 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। सिंचाई विभाग के ठेकेदारों की मरम्मत कार्य में लापरवाही की वजह से इतनी भारी-भरकम राशि लगाकर भी यहां के पुलों से गुजरने वाले किसानों व लोगों को हर समय भय रहता है।
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इसके अलावा नहर पर बने पुल में भी खामियां हैं, यहां निकले सरियों से हादसे हो रहे हैं। किसानों का आरोप है कि नहर पर बन रहे पुलों के पास दुर्घटनाओं के कारण तो कभी पुलों के बनने के बाद उन पर लगे सरियों के टुकड़ों की वजह से निर्माण कार्य हमेशा चर्चा में रहा। अपने पहले ट्रायल में ही यह नहर करनाल के समीप टूट गई थी। हालांकि प्रशासन ने मुस्तैदी कर क्षेत्र को बड़ा नुकसान होने से बचा लिया था। ग्रामीणों का कहना है कि जब भी नहर में पानी छोड़ा जाएगा, यह तबाही लेकर आएगा। इस नहर का निर्माण वर्ष 1970 में दक्षिण हरियाणा के खेतों तक पानी पहुंचाने के उद्देश्य से तत्कालीन मुख्यमंत्री बंसी लाल ने करवाया था। वर्ष 1970 से लेकर 2021 तक यह नहर उत्तरी व दक्षिणी हरियाणा के किसानों के लिए वरदान रही है।

1500 क्यूसेक बढ़ेगी क्षमता
आवर्धन नहर हरियाणा की एक महत्वपूर्ण सिंचाई और जलापूर्ति का साधन है। जो पश्चिमी यमुना नहर से निकलकर करनाल होते हुए दक्षिण हरियाणा के भिवानी, झज्जर में पानी पहुंचाती है, जिसकी क्षमता बढ़ाने और जीर्ण-शीर्ण स्थिति में सुधार के लिए पुनर्निर्माण और चौड़ा करने का काम चल रहा है, ताकि पानी की बर्बादी रुके और पानी की सप्लाई बढ़े। यह नहर यमुनानगर के हमीदा हेड से निकलकर करनाल के मुनक हेड तक जाती है और दिल्ली को भी पानी देती है। इसकी क्षमता 4500 से बढ़ाकर 6000 क्यूसेक करने और नहर को गहरा व चौड़ा करने का काम कुछ जगह अभी भी चल रहा है। नहर के किनारे पर एक मिनी बाईपास (सड़क) भी बनाई जा रही है, जिससे आवागमन आसान होगा।

उच्च स्तरीय कमेटी से कराई जाए जांच
निर्माण सामग्री की गुणवत्ता में कमी के कारण नहर के किनारे की दीवारों में दरारें आ गई हैं, इन दरारों में पौधे तक उग आए हैं। जब पानी आएगा तो यही दरारें क्षेत्र को डुबाने का कारण बनेंगी। ऊंचे उठाये गए पुलों के साथ लंबी ढलान वाली सड़कें बनाई जाएं ताकि पुल से गुजरने वाले किसानों और क्षेत्रवासियों को परेशानी का सामना न करना पड़े। निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय समिति से जांच कराई जानी चाहिए। - हरदीप सिंह, किसान तुसंग
पुल से निकले सरिये से फट रहे वाहनों के टायर
नहर के पुनर्निर्माण कार्य में कानूनी मामलों और अन्य कारणों से देरी हुई है, जिसकी वजह से लागत भी बढ़ी और परेशानी भी। अंदेशा है कि नहर के मरम्मत कार्य में धांधली हुई है। पुल के बीचोंबीच सरिये अभी भी निकले हुए हैं, इस कारण यहां से निकलने वाले किसानों की ट्रालियों व अन्य वाहनों के टायर भी फट जाते हैं। वहीं दोपहिया वाहन चालक भी इनमें उलझ कर चोटिल हो रहे हैं।
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- नाथी राम, किसान इंद्री
मरम्मत कार्य अभी पूरा नहीं हुआ है और यह न ही सिंचाई विभाग को सुपुर्द किया गया है। नए पुल बनाने की वजह से वन विभाग को 70 करोड़ रुपये जारी किए गए। इस परियोजना में चार से पांच बार ड्राइंग भी बदली गईं। इसलिए कार्य का बजट भी बढ़ाया गया। अभी पुल के बीच में जो गैप रखा गया है उसे विभाग की ओर से भरा जाएगा। मार्च से पहले मरम्मत कार्य पूर्ण होने की उम्मीद है।
- मनोज कुमार, कार्यकारी अभियंता, सिंचाई विभाग
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