संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन बैंकिंग धोखाधड़ी के मामलों में विस्तृत सबूतों और गहन जांच की आवश्यकता होती है, उनका निपटारा उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत संक्षिप्त कार्रवाई में नहीं किया जा सकता। आयोग ने साहिब पेस्टिसाइड्स की ओर से पंजाब नेशनल बैंक और बीएसएनएल कंपनी के खिलाफ दायर शिकायत को खारिज करते हुए शिकायतकर्ता को सिविल अदालत जाने की स्वतंत्रता दी है।
शिकायतकर्ता साहिब पेस्टिसाइड्स के प्रोपराइटर सुभाष खुराना ने आरोप लगाया था कि अगस्त 2020 में उनके मोबाइल नंबर का एक डुप्लीकेट सिम गुरुग्राम से धोखाधड़ी के जरिए जारी कराया गया था। इस सिम का उपयोग कर हैकर्स ने उनके बैंक खाते से लगभग 11.50 लाख रुपये की अवैध ट्रांजेक्शन की। शिकायतकर्ता का तर्क था कि यह बैंक की सुरक्षा प्रणाली में खामी और बीएसएनएल कंपनी की ओर से बिना उचित सत्यापन के सिम जारी करने के कारण हुआ है। इसी मामले में पंजाब नेशनल बैंक ने तर्क दिया कि उनकी ऑनलाइन प्रणाली पूरी तरह सुरक्षित है और लेनदेन पासवर्ड और ओटीपी का उपयोग किए जाने के बाद ही संभव है।
वहीं, बीएसएनएल ने अदालत के समक्ष दावा किया कि डुप्लीकेट सिम सभी आवश्यक दस्तावेजों के सत्यापन और डीकेवाईसी प्रक्रिया के बाद ही जारी किया गया था। इस मामले में सुनवाई करते हुए आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह और सदस्यों ने पाया कि मामला साइबर अपराध और बैंकिंग धोखाधड़ी से जुड़ा है, इसमें पहले से ही प्राथमिकी दर्ज है। सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए आयोग ने शिकायतकर्ता को सिविल कोर्ट में अपील करने की छूट दी और कहा कि उपभोक्ता फोरम में बिताया गया समय उनकी समय-सीमा में बाधा नहीं बनेगा।