चकबंदी मामले में दो पक्षों के बीच तनाव की स्थिति पैदा हो गई है। वीरवार को दोनों गुट आमने-सामने हो गए। मामला बढ़ता देख प्रशासन और पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और चार घंटे की मशक्कत के बाद दोनों पक्षों से बातचीत कर धान की फसल नहीं काटने के आदेश जारी किए।
प्रशासन ने मामले की पटाक्षेप करने के लिए दोनों पक्षों से पांच-पांच सदस्यों की कमेटी गठित करने की अपील की है। वीरवार को विवादित चकबंदी वाली जमीन पर एक बार फिर दोनों पक्ष आमने-सामने हो गए।
एक पक्ष पिछले चार दिन से जमीन पर अनशन कर रहा है, वहीं, दूसरे पक्ष ने भी अपनी जमीन में खड़ी धान की फसल काटने की ठान ली। वीरवार को जैसे ही दूसरा पक्ष खेतों में पहुंचा तो अनशन करने वाले किसानों का गुस्सा फुट पड़ा और देखते ही देखते स्थिति तनावपूर्ण हो गई। प्रशासन को जैसे ही मामले की सूचना मिली तो मौके पर तहसीलदार हरिओम अत्री, मधुबन के थाना प्रभारी अनिल कुंडू भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और मामले को शांत करने का प्रयास किया, लेकिन मामला निपटने के बजाय तूल पकड़ गया।
लगभग चार घंटे तक दोनों पक्षों में नोंकझोंक होती रही। आखिर में प्रशासन ने दोनों पक्षों से कमेटी गठित करके मामले का पटाक्षेप करने की अपील की और साथ ही स्थिति तनावपूर्ण होते देख कुछ समय के लिए फसल नहीं काटने की बात कही। जमीन की चकबंदी मामले में चार गांवों की महिलाओं की ओर से शुरू किया गया अनशन चौथे दिन में प्रवेश कर गया है।
अनशन कर रही महिलाओं व ग्रामीणों ने प्रशासन को चेताया कि जब तक मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हो जाती, वे अपनी जमीन से भूमाफियाओं को धान काटने नही देंगे। अगर भूमाफिया धान काटने की कोशिश करता है तो अपने बच्चों के साथ मशीन के आगे कूदकर जान दे देंगे। अनशनकारियों का कहना है कि वे अपनी जमीन पाने के लिए कुछ भी कर सकते है।
जब तक जमीन की जांच नहीं होती तब तक बच्चों को स्कूल नहीं भेजा जाएगा। इसके साथ ही 11 अक्तूबर को संत गोपालदास उनके बीच पहुंच रहे हैं। कालरम निवासी ग्रामीण प्रदीप कुमार, डॉ. रोशनलाल, अनिल कुमार ने बताया कि दूसरा पक्ष धक्के से धान काटने का प्रयास कर रहा है, जिसको किसी भी कीमत पर काटने नहीं दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर 11 अक्तूबर को संत गोपालदास उनके बीच पहुंचेंगे और जिससे यह अनशन बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है। प्रशासन भी ग्रामीणों का कोई साथ नहीं दे रहा है। मुख्यमंत्री रैली में आए थे तो प्रशासन ने उनको उनसे मिलने तक नहीं दिया। इसके साथ ही ग्रामीणों ने प्रशासन पर कई आरोप लगाए है।
वहीं, दूसरे पक्ष जिले सिंह, बलजीत सिंह ने बताया कि खेतों में उनके कुछ लोगों के साथ मारपीट की गई है। वीरवार सुबह मारपीट के मामले के बाद वे खेतों में पहुंच गए तो मामला तनावपूर्ण हो गया और वहीं किसानों ने धान की फसल कटवाने की गुहार प्रशासन से लगाई। प्रशासन ने किसानों को दो दिन का समय दिया है। मौके पर वेदपाल अराईपुरा, चंद्रपाल, कर्मसिंह रावल लालुपूरा, कृष्णलाल, रोहताश, कर्मबीर, महीपाल भरतपूर, अकल सिंह, कुलबीर, रामनिवास अमृतपुर कलां मौजूद रहे।