करनाल। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से शिव चित्रगुप्त मंदिर सदर बाजार में आयोजित सत्संग में साध्वी अनुपमा भारती ने कहा कि चरैवेति नियम प्रकृति का बहुत ही व्यापक नियम हैं। चाहे वो सागर की तलाश में पहाड़ों से निकली एक उफनती नदी के लिए हो, या सूरज की परिक्रमा करती हुई पृथ्वी के लिए हो, या फिर धीरे चलने वाले कछुए और अति आत्मविश्वास से भरे खरगोश की कहानी हो। भगवत कृपा का हैंडल हमें गतिमान स्थिति में भ्रमित होने से बचाता है। ध्यान देने वाली बात यह है कि अगर साइकिल की गति काफी कम हो जाए या वह रुक जाए तो साइकिल गिर जाती है। साइकिल के ना गिरने के लिए उसका गतिमान रहना बहुत जरूरी है, इसलिए हमें भी अपने जीवन में ध्रुव की तरह प्रहलाद की तरह मीरा की तरह आगे बढ़ते रहना है,गतिमान रहना है।
सवा लाख से एक लड़ाऊ तबै गोविंद सिंह नाम कहाऊ...
निसिंग। गुरु गोविंद सिंह ने मुगल अत्याचार के विरुद्ध बलिदान दिया। उन्होंने अन्याय से लड़ने के लिए एक साधारण मनुष्य को खालसा बना एक ऐसी शक्ति बनाया, जिसका संकल्प धर्म की रक्षा और निर्बलों की सहायता करना था। यह जोड़ा साहिब हमें उनकी उस महान प्रतिज्ञा को याद दिलाता है कि सवा लाख से एक लड़ाऊ तबै गोविंद सिंह नाम कहाऊ। ये बात रविवार को भाजपा नेता अमरजीत लाडी ने कही। वह रविवार को निसिंग के वार्ड नंबर दो में सिख समाज के लोगों को संबोधित कर रहे थे। लाडी ने कहा कि गुरु गोविंद सिंह ने अपने चारों पुत्रों का बलिदान दिया जिससे देश के अन्य पुत्र-पुत्रियां सुरक्षित रह सकें। पैक्स चेयरमैन जसविंद्र सिंह, महेंद्र सिंह बदोरता, लखविंद्र सिंह, साहब सिंह, मुख्त्यार आदि मौजूद रहे। संवाद