संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक आदेश में पंजाब नेशनल बैंक के खिलाफ दायर की गई असंध निवासी उपभोक्ता हरीश की शिकायत को खारिज कर दिया है। यह फैसला शिकायतकर्ता की ओर से बार-बार अवसर दिए जाने के बावजूद साक्ष्य प्रस्तुत न करने और अदालत की कार्रवाई में शामिल न होने के कारण लिया गया है।
आयोग के फैसले के अनुसार, असंध निवासी हरीश की ओर से पंजाब नेशनल बैंक (असंध शाखा) के खिलाफ धारा 35, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत दायर किया गया था। शिकायत का मुख्य उद्देश्य बैंक की सेवाओं में कथित कमी को लेकर न्याय पाना था। मामले की सुनवाई आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह, सदस्य नीरू अग्रवाल और सर्वजीत कौर की पीठ ने की।
अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता को अपने साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए कई अवसर दिए गए थे जिनमें से दो अंतिम अवसर भी शामिल थे। वहीं फैसले के दिन शाम साढ़े तीन बजे तक आयोग ने शिकायतकर्ता का इंतजार किया लेकिन न तो वह स्वयं उपस्थित हुआ और न ही उसकी ओर से कोई प्रतिनिधि आया। बैंक की ओर से उनके वकील प्रदीप सिंह राणा अदालत में मौजूद रहे और कार्रवाई में हिस्सा लिया।
आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा कि शिकायतकर्ता ने साक्ष्य जुटाने में कोई रुचि नहीं दिखाई। आयोग ने टिप्पणी की कि ऐसा प्रतीत होता है कि या तो शिकायतकर्ता अब इस मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहता या उसकी समस्याओं का समाधान बैंक की ओर से पहले ही किया जा चुका है।
अदालत ने यह भी कहा कि बार-बार स्थगन देना न केवल आयोग के बहुमूल्य समय की बर्बादी है, बल्कि यह विपक्षी पार्टी के लिए भी मानसिक और कानूनी परेशानी का कारण बनता है। तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए जिला उपभोक्ता आयोग ने इस शिकायत को खारिज कर दिया और फाइल को रिकॉर्ड रूम में भेजने का आदेश दिया। यह फैसला उन सभी शिकायतकर्ताओं के लिए एक सबक है जो कानूनी प्रक्रियाओं को गंभीरता से नहीं लेते और अदालती समय का सदुपयोग नहीं करते।