भ्रष्टाचार के मामले में पहले शिकायत देना और बाद में समझौता करके अपने बयानों से पलटने वालों की अब खैर नहीं है। अपने बयानों से मुकरने पर अदालत ने कड़ा संज्ञान लेते हुए मुदई को दो साल कैद की सजा सुनाई है। साथ ही उस पर दस हजार रुपये जुर्माना भी किया है। मामले के अनुसार, 12 मार्च, 2011 को विनोद कुमार निवासी औंगद ने तत्कालीन विजिलेंस इंस्पेक्टर सत्यनारायण शर्मा को शिकायत दी कि लकड़ी की वर्कशाप लगाने के लिए खादी ग्रामोद्योग मंडल करनाल में लोन के लिए अप्लाई किया था। इसकी एवज में ग्रामोद्योग का फील्ड आफिसर उससे रिश्वत की मांग कर रहा है।
विजिलेंस इंस्पेक्टर ने जिला उपायुक्त के संज्ञान में मामला लाकर ड्यूटी मजिस्ट्रेट तैयार कराया। जिला बाल कल्याण अधिकारी अमरनाथ नरवाल व उसी के कार्यालय के चपरासी कर्ण कांबोज को छाया गवाह के तौर पर टीम में लिया गया। टीम ने मौके पर जाकर रेड की तो फील्ड आफिसर हरिचंद को 2000 रुपये की रिश्वत के साथ रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। यह मामला अदालत में चला। ए डी जे विमल सपरा की अदालत ने सुनवाई करते हुए 2 फरवरी, 2013 को फिल्ड आफिसर हरिचंद को दोषी करार देते हुए भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत दो साल कैद व दस हजार रुपये जुर्माना किया था। बता दें कि इस दौरान शिकायतकर्ता विनोद कुमार अदालत में अपने बयानों से मुकर गया, बावजूद इसके अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई थी।
विजिलेंस ने किया था केस
मुदई विनोद कुमार द्वारा अपने बयानों से मुकरने को लेकर विजिलेंस करनाल ने अदालत में केस दायर किया था। इस पर एडीजे विमल सपरा ने केस को 193 आईपीसी की कार्रवाई की ट्रायल के लिए सिविल जज मोहम्मद सागिर की अदालत में भेज दिया। विजिलेंस इंस्पेक्टर संजीव कुमार ने बताया कि जज मोहम्मद सागिर ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद शिकायतकर्ता विनोद कुमार को अपने बयानों से मुकरने का दोषी पाया। इस पर 6 अप्रैल को अदालत ने विनोद कुमार को दो साल कैद सजा सुनाई, साथ ही दस हजार रुपये जुर्माना किया है।
कोई रिश्वत मांगें तो करें शिकायत : संजीव कुमार
विजिलेंस इंस्पेक्टर संजीव कुमार ने बताया कि यह बहुत ही स्वागत योग्य फैसला है। कई बार मुदई अपने बयानों से मुकर जाते हैं, जिससे दोषी बच जाते हैं। उन्होंने जनता का आह्वान किया कि अगर कोई भी सरकारी कर्मचारी व अधिकारी रिश्वत की मांग करता है तो उसकी शिकायत विजिलेंस के नंबर 9050029992 पर करें, ताकि भ्रष्टाचार पर रोक लगाई जा सके।