विजिलेंस टीम द्वारा रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े गए नगर निगम के क्लर्क हरि प्रकाश को कोर्ट ने चार साल की कैद और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है, जबकि ड्राइवर राज कुमार को बरी कर दिया गया है। खास बात यह रही कि शिकायतकर्ता के अपने बयानों के मुकरने के बाद भी अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए यह फैसला सुनाया है।
मामला चार जून 2015 का है। विजिलेंस इंस्पेक्टर संजीव कुमार ने बताया कि नगर निगम के क्लर्क हरि प्रकाश ने एक व्यक्ति से बेकरी चलाने के नाम पर 10 हजार रुपये रिश्वत की मांग की थी। बेकरी संचालक ने इसकी शिकायत विजिलेंस को की। विजिलेंस की ओर से टीम गठित की गई और चार जून 2015 को आरोपी क्लर्क हरि प्रकाश को रंगे हाथों पकड़ लिया। हालांकि, इस दौरान हरिप्रकाश ने पैसे चालक राजकुमार को थमा दिए।
इस मामले में ड्राइवर राजकुमार पर भी एफआईआर दर्ज की गई थी। विजिलेंस की टीम में इंस्पेक्टर संजीव कुमार, सब इंस्पेक्टर राजकुमार व एएसआई हिम्मत शामिल रहे। मामला अदालत में चल रहा था और आरोपी जमानत पर चल रहे थे। मामला अदालत में विचाराधीन था।
अपनी गवाही के दौरान शिकायतकर्ता प्रवीन कुमार अपने बयानों से मुकर गया था। बावजूद इसके, शनिवार को एडिशनल सेशन जज करनाल विमल सपरा की अदालत ने हरिप्रकाश को दोषी करार देते हुए चार साल कैद की सजा सुनाई, साथ ही पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। इसके साथ ही अदालत ने नगर निगम के चालक राजकुमार को निर्दोष बताते हुए बरी कर दिया।