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सीएम साहब! अब आप ही हटाओ अतिक्रमण

Sat, 14 Jan 2017 11:23 PM IST
अमर उजाला/ब्यूरो/करनाल
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जाम लगाते लोग - फोटो : amar ujala
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 सीएम सिटी को स्मार्ट सिटी बनाने की प्लानिंग में जुटा नगर निगम और स्थानीय प्रशासन शहर से अतिक्रमण हटाने में नाकाम साबित हो रहा है। अतिक्रमण हटाने से पहले ही निगम के अधिकारी दुकानदारों की हाथापाई से घबराए हुए हैं। निगम अधिकारियों के ढुलमुल रवैये को देखते हुए और शहर की सबसे गंभीर समस्या को देखते हुए एक शहरवासी ने अब यह मामला सीएम दरबार में लगाया है। 
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सीएम विंडो पर दी शिकायत में संजय शर्मा ने अतिक्रमण को लेकर निगम के अधिकारियों व व्यापारियों नेताओं तक पर गंभीर आरोप जड़े हैं। सवाल यह है कि करनाल के बाजारों की सड़क कब कब्जा मुक्त होंगी? क्या अब सीएम करनाल में अतिक्रमण हटाने आएंगे? शहर वासियों का कहना है कि स्थानीय प्रशासन अतिक्रमण हटाने में नाकाम साबित हो रहा है, इसलिए सीएम को खुद इस मामले में दखलंदाजी करनी चाहिए। सीएम सिटी में अतिक्रमण का यह खेल कई सालों से चल रहा है, जो स्थानीय प्रशासन की अनदेखी के कारण लगातार बढ़ रहा है। अतिक्रमणकारी दुकानदारों का मनोबल इतना बढ़ गया है कि अब वे अतिक्रमण हटाने जा रही नगर निगम की टीम को भी लोग दौड़-दौड़ा कर पीट रहे हैं। कुछ दिन पहले ही पुरानी सब्जी मंडी में अतिक्रमण हटाने गई नगर निगम की टीम को दो बार हाथापाई का सामना करना पड़ा। खुद निगम आयुक्त ये बात कह रहे हैं कि वे अतिक्रमण हटाना चाहते हैं, लेकिन दुकानदार हाथापाई पर उतर आते हैं? 


एक किलोमीटर के सफर में लग जाता है आधा घंटा
लगातार बढ़ रहे अतिक्रमण से शहर भयंकर जाम से जूझ रहा है। एक से दो किलोमीटर की दूरी पूरी करने में भी आधे घंटे से लेकर एक घंटा तक लग जाते हैं। इससे लोगों का आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। मुख्य बाजार, नेहरू प्लेस बाजार, दुप्पटा मार्केट, आदर्श मार्केट, सर्राफा बाजार, कर्ण गेट, चौड़ा बाजार, घंटा घर चौक, रामनगर जैसे शहर के सभी मुख्य बाजारों में दुकानदारों ने रेहड़ीवालों के साथ मिलकर बरामदे, फुटपाथ और आधी सड़कों तक कब्जा जमा रखा हैैैै। इससे बाजार में गाड़ी से चलना दूर शाम को पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। इस समस्या से निजात दिलाने के लिए शहर के लोग कई बार स्थानीय प्रशासन से अतिक्रमण हटाने की मांग कर चुके हैं, लेकिन अधिकारी अभी तक सोते रहे। अब जब निगम अधिकारी कार्रवाई शुरुआत की तो दुकानदारों ने ही हाथापाई कर उन्हें भगा दिया। प्रशासनिक स्तर पर इस नाकामी के बाद अब लोग अतिक्रमण से निजात पाने के लिए सीधे मुख्यमंत्री से गुहार लगा रहे हैं। सीएम विंडो पर शिकायत दर्ज कराने वाले संजय शर्मा ने कहा कि, अतिक्रमण जैसे मुद्दे पर भी यहां के दुकानदार राजनीति कर रहे हैं। 
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हादसा हुआ तो न एंबुलेंस पहुंचेगी और न ही पुलिस 
शहर की मुख्य बाजारों और सड़कों पर जिस तरह से दुकानदारों और रेहड़ी वालों ने कब्जा कर रखा है उससे शहर में छोटा मोटा हादसा भी बड़े हादसे में तब्दील हो सकता हैै। कोई हादसा होने पर शहर के अंदर दुर्घटनास्थल पर एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और पुलिस को पहुंचने में घंटों लग जाएंगे। शहर में जाम और अतिक्रमण की स्थिति को समझने के लिए अमर उजाला की टीम ने सुबह और शाम दो बार शहर के प्रमुख बाजारों और सड़कों का जायजा लिया। इस दौरान यह पता चला कि जिन सड़कों पर सुबह के समय एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने में पांच मिनट का समय लगता है, उन्हीं सड़कों पर शाम के समय रेहड़ी और दुकानदारों के अतिक्रमण के बाद लगने वाले जाम के कारण आधे से एक घंटा का समय लग जाता है।   


अतिक्रमण की विकट समस्या
कहां से कहा तक    दूरी    सुबह  का समय    शाम का समय
कर्णगेट से सर्राफा बाजार    300 मीटर    2 मिनट    20 मिनट
कमेटी चौक से बस स्टैंड    500 मीटर    3 मिनट    30 मिनट
कर्ण गेट से सिविल अस्पताल चौक    1.5 किमी    10 मिनट    45 मिनट
एमजी चौक से सिविल अस्पताल    500  मीटर    5 मिनट    20 मिनट
हांसी चौक से शिवकॉलोनी    800 मीटर    10 मिनट    30 मिनट
एमजी चौक से अंबेडकर चौक    300 मीटर    5 मिनट    30 मिनट

निगमायुक्त से सीधी बात
शहर से अतिक्रमण क्यों नहीं हट रहा?
डॉ. दहिया- हमने रणनीति बना ली है जल्द कार्रवाई करेंगे।
रणनीति काफी दिनों से बन रही है, लेकिन कार्रवाई कब होगी?
डॉ. दहिया- चार दिन पहले हमारी टीम पुरानी सब्जी मंडी में अतिक्रमण हटाने गई थी, वहां पर दुकानदारों ने दो बार निगम की टीम के साथ हाथापाई की। इससे कार्रवाई रोक दी गई।
शहर कब अतिक्रमण मुक्त हो पाएगा?
डॉ. दहिया- हमने स्पेशल टीम का गठन कर लिया है, यह टीम पुलिस सुरक्षा में अतिक्रमण हटाने का कार्य करेगी।
अतिक्रमण हटाने का कार्य कब से शुरू होगा?
डॉ. दहिया- पुलिस सुरक्षा की मांग की गई है। जैसे ही सुरक्षा मिलेगी अतिक्रमण हटाने का काम शुरू हो जाएगा। 

शहर अतिक्रमण मुक्त होना चाहिए। कुछ व्यापारी हैं जो नियमों का उल्लंघन करते हैं। हमारी कमेटी ऐसे लोगों के साथ नहीं है। अगर प्रशासन कार्रवाई करता है तो हम अधिकारियों को साथ देंगे। राजनीति के चलते कब्जे हो रहे हैं, बाजारों में खुलापन चाहते हैं। 
- कृष्ण लाल तनेजा, करनाल इकाई प्रधान, हरियाणा व्यापार मंडल।
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निगम के अधिकारियों पर अब विश्वास नहीं रहा है। कितनी बार शिकायतें करें। निगम के बस की बात नहीं है। इस मामले में सीएम ही दखल देंगे तो बात बनेगी। अतिक्रमण कराने और करने में दोनों में स्वार्थ छिपा है। दुकानदार दुकानों के बाहर बैठने वालों से मोटी मंथली लेते हैं। सवाल यह है कि सारी बातें पता होने पर भी निगम के अधिकारी चुप क्यों हैं? बाजारों में पैर रखने की जगह नहीं है, न पुलिस आ पाती है और न ही एंबुलेंस। क्या यही है स्मार्ट सिटी?। जिस दिन सीएम करनाल आएंगे, इस मामले को लेकर वे खुद सीएम मिलेंगे और यह समस्या रखेंगे। 
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- शिकायतकर्ता, संजय शर्मा
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