सीएम मनोहरलाल का गृह जिला और खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के मंत्री का हलका। सीएम की घोषणा और शिलान्यास के बावजूद अधिकारियों ने परियोजना को तवज्जो नहीं दी और जो काम एक साल में पूरा होना था, वह काम शनिवार को एक साल बाद शुरू हुआ। इससे, अंदाजा लगाया जा सकता है कि अधिकारी कार्यकर्ताओं और नेताओं को ही नहीं सीएम की घोषणाओं को भी गंभीरता से नहीं लेते।
बता दें कि अधिकारियों के हावी होने के आरोप कई बार खुद भाजपा नेता और विपक्षी भी सरकार पर लगाते रहे हैं। अफरशाही व लापरवाही का ताजा मामला सड़क परियोजना का है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल गत वर्ष 4 जून को इंद्री रैली में नेवल से यमुनानगर जाने वाली 32 किलोमीटर सड़क को चौड़ा करने की घोषणा की थी। साथ ही इसके लिए करीब 30 करोड़ रुपये मंजूर किए थे। घोषणा के कुछ माह बाद ही सीएम ने सड़क का शिलान्यास भी किया, बावजूद इसके अधिकारी अपनी ही मस्ती में मस्त रहे और परियोजना में देरी होती रही। अब शनिवार को सीएम की घोषणा पूरे एक साल बाद अधिकारियों को सड़क की याद आई और इसका निर्माण कार्य मंत्री कर्णदेव कांबोज ने नारियल तोड़कर किया।
सवाल यह है कि जब सीएम की घोषणा पर भी एक साल के बाद अमल होता है, तो आम नेताओं के कार्य कैसे होते होंगे? इस मामले में अहम बात यह भी है कि जिस हलके का यह मामला है यहां के विधायक खुद सरकार में मंत्री के ओहदे पर तैनात हैं, लेकिन अधिकारियों को न तो इस बात की फिक्र है और न ही आम जनता की तंगी से उन्हें कुछ लेना है।
वर्षों पुरानी है मांग
नेवल से यमुनानगर के हामिदा से जुड़ने वाली यह सड़क काफी अहम है। यह सड़क यूपी, उत्तराखंड व हिमाचल जाने के लिए अहम मार्ग है। इसके अलावा, करनाल और इंद्री क्षेत्र के 30 से अधिक गांव के लोगों को सीधा फायदा पहुंचेगा। नेवल, बड़ागांव, घीड, चोरपुरा, ब्याना, बदरपुर, कलसौरा, समसपुर, मुस्सेपुर, लबकरी, गढ़ीबीरबल, खरक और चौगांवा गांव सहित इस क्षेत्र के लोगों की यह चिरलंबित मांग रही है। इसको लेकर कई बार गांवों के लोग मंत्री और खुद सीएम से मांग कर चुके हैं। सड़क की अहमियत को समझते हुए सीएम ने मांग को रैली में पूरा किया था। सीएम ने इंद्री की अनाज मंडी में मंच से इसे बनाने की घोषणा की थी।
एक साल और करना होगा इंतजार
करनाल के नेवल से यमुनानगर जाने वाले लगभग 32 किलोमीटर लंबी सड़क को चौड़ा करने के लिए 30 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इस सड़क को साढ़े पांच मीटर से सात मीटर तक चौड़ा किया जाएगा। सड़क चौड़ा करने का यह कार्य अगले वर्ष मई तक पूरा कर लिया जाएगा। हालांकि, शनिवार से इसका निर्माण कार्य शुरू हो गया है। अभी एक साल का समय तो अधिकारी कह रहे हैं, लेकिन जिस प्रकार से अधिकारी लापरवाही बरतते आए हैं, उससे सड़क चौड़ी होने के लिए ग्रामीणों और इंतजार करना पड़ सकता है।
मंत्री खुद उलझन में
सड़क निर्माण का शुभारंभ कराने आए मंत्री खुद ही अपने बयानों से उलझन में नजर आए। शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री कर्णदेव कांबोज ने कहा कि गत वर्ष 4 जून को इंद्री में आयोजित विकास रैली में सीएम ने इस सड़क को चौड़ा करने की घोषणा की थी, जिसके पश्चात कुछ दिन बाद ही इस सड़क के निर्माण कार्य का शिलान्यास भी सीएम मनोहर लाल ने किया था। वर्तमान सरकार विकास के पहिए को तीव्रता से आगे बढ़ा रही है। मंत्री ने कहा कि पिछली सरकार में सड़क निर्माण की गति तीन किलोमीटर प्रतिदिन के हिसाब से हुआ करती थी और गुणवत्ता के हिसाब से भी उस सरकार में काम सही नहीं होता था, लेकिन वर्तमान सरकार की सड़क निर्माण की गति 20 किलोमीटर प्रतिदिन है। अब सवाल यह है कि जब सरकार की सड़क बनाने की गति 20 किलोमीटर रोजाना है तो फिर इस सड़क के निर्माण में एक साल क्यों लगेगा, क्योंकि इसकी दूरी 32 किलोमीटर है।
90 करोड़ की लागत से इंद्री में बनेगा बाईपास
खाद्य एंव आपूर्ति मंत्री ने जानकारी दी कि इंद्री में मटक माजरी पुलिया से लेकर मुख्य सड़क मार्ग तक लगभग चार किलोमीटर का एक नया बाईपास बनाया जाएगा। इसके निर्माण कार्य पर 90 करोड़ की धनराशि खर्च होगी। यह राशि सरकार की ओर से स्वीकृत हो चुकी है। बुनियादी प्रक्रिया पूरी होने उपरांत शीघ्र ही बाइपास के निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। इस मौके पर मंत्री ने नारियल तोड़कर शुभारंभ किया। मंत्री ने कहा कि जहां भी क्षेत्र में जरूरत पड़ेगी, रिंग रोड या बाईपास बनाने का कार्य शीघ्रता से पूरा करवाया जाएगा। मंत्री ने कहा कि अधिकारियों पर अनावश्यक दबाव होता था, लेकिन वर्तमान सरकार में अधिकारी बिना किसी दबाव के काम करते हैं, इसलिए भ्रष्टाचार की कोई गुंजाईस नही है।
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वर्जन
सड़क को चौड़ा करने के लिए केंद्र से अनुमति लेनी पड़ती है। वन विभाग से इसकी अनुमति ली गई और सीआरएफ से मंजूरी लेनी पड़ती है, इसलिए इस प्रक्रिया में ज्यादा समय लग गया है। एक साल में यह सड़क बनकर तैयार हो जाएगी।
-वीरेंद्र जाखड़, एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी।
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कई और भी योजनाएं सिसक रही हैं
अकेले एक ही नहीं सीएम की घोषणाओं से जुड़ी अन्य परियोजनाएं भी सिसक रही हैं। अधिकारी लगातार दावे कर रहे हैं, लेकिन हकीकत यही है कि परियोजनाएं एक कदम नहीं बढ़ रही हैं। इनमें मुख्य रूप से कुटेल में स्थापित होने वाली कल्पना चावला मेडिकल यूनिवर्सिटी है। एक साल पहले सीएम ने इसकी घोषणा की थी, लेकिन आज तक इसका शिलान्यास तक नहीं हो पाया और एक साल से मुख्य सड़क को लेकर ग्रामीणों के साथ विवाद चल रहा है। आज भी यह फाइल कागजों में ही दौड़ रही है। दूसरा, करीब पांच साल से चल रहे मेडिकल कॉलेज का निर्माण भी धीमी गति से चल रहा है। बार-बार मंत्री व मुख्यमंत्री यहां का मुआयना कर चुके हैं, पर काम गति नहीं पकड़ पा रहा है। इसके अलावा, हाल में ही की गई गांव अंजनथली में बागवानी यूनिवर्सिटी का मामला है। इस विवि की जमीन कुछ ग्रामीणों ने फसल बो दी और प्रशासन सोता रहा।
बता दें कि सीएम की घोषणाओं को अमलीजामा नहीं पहनाए जाने को लेकर पिछले दिनों में प्रशासनिक स्तर पर डीसी, एडीसी, एसडीएम, डीआरओ व तहसीलदार तक के तबादले हुए थे। नए डीसी के आने के बाद छह माह से अटकी पड़ी स्मार्ट सड़क के निर्माण ने जरूर गति पकड़ी है।