जनप्रतिनिधियों ने शुक्रवार सुबह वार्ड-1 से ‘नई सोच नया शहर-स्वच्छ हरियाणा’ अभियान की शुरुआत की। साफ-सफाई की। इसके बाद सफाई कर्मचारी अपनी लंबित मांगों को पूरा करने की मांग करते हुए निगम कार्यालय के सामने धरने पर बैठ गए। दोदिवसीय हड़ताल की घोषणा कर दी।
कर्मचारियों ने बताया कि दिसंबर 2025 में हाईकोर्ट ने कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने के आदेश दिए थे लेकिन सरकार ने इन आदेशों को लागू नहीं किया। कर्मचारियों ने कहा कि सरकार ने ग्रुप डी की भर्ती में सीवरमैन और सफाई कर्मचारियों को नजरअंदाज किया है। अन्य लोगों को भर्ती किया गया।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब वे 15-20 साल से काम कर रहे हैं तो उन्हें प्राथमिकता क्यों नहीं दी गई। सफाई कर्मचारियों की मुख्य मांग है कि कच्चे कर्मचारियों को पक्का किया जाए और समान काम के लिए समान वेतन दिया जाए।
उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य हड़ताल करना नहीं है लेकिन मजबूरी में यह कदम उठाना पड़ा है। अगर सरकार समय रहते उनकी मांगें नहीं मानती है तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया, तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को मजबूर होंगे।
सड़क पर कूड़ा डालने पर पांच हजार का चालान
नगर निगम के ‘नई सोच नया शहर-स्वच्छ हरियाणा’ अभियान की शुक्रवार को वार्ड-1 के बसंत विहार से शुरुआत की गई। वार्ड पार्षद, वार्ड कमेटी के सदस्यों व स्वच्छ भारत मिशन टीम ने डोर टू डोर जाकर दुकानदारों को साफ-सफाई, दो डस्टबिन रखने, सिंगल यूज प्लास्टिक त्यागने और घरेलू खाद बनाने के बारे जागरूक किया। सड़क पर कूड़ा डालने पर 5,000 रुपये के चालान की जानकारी दी। मेयर रेणु बाला गुप्ता की अगुवाई में वार्ड पार्षद सुदेश रानी, सुभाष कोच, अतिरिक्त निगम आयुक्त अशोक कुमार, मुख्य सफाई निरीक्षक सुरेन्द्र चोपड़ा, वार्ड कमेटी के सदस्य गुलाब सिंह, सुमेर रंगा, जितेन्द्र पांचाल, सुखबीर पाल और गीता रानी के अतिरिक्त नगर निगम की स्वच्छ भारत मिशन टीम, स्थानीय नागरिकों व सफाई मित्रों ने झाडू लगाकर अभियान में हिस्सा लिया।
महापौर ने बताया कि स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के तहत एक से 16 मई तक नई सोच नया शहर - स्वच्छ हरियाणा अभियान शुरू किया गया है। सोच बदलेगी-शहर बदलेगा, अभियान की टैग लाइन रखी गई है। इसका मुख्य उद्देश्य कचरे के स्रोत पर ही उसका पृथक्करण, कचरा कम करना तथा वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन की आदतों को बढ़ावा देना है। नागरिकों की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से शहरी स्वच्छता के स्तर में ठोस सुधार लाना भी इसका प्रमुख लक्ष्य है।