नगर निगम में सफाई घोटाला उजागर होने के बाद तीन अधिकारियों और कंपनी के खिलाफ स्टेट विजिलेंस ने भ्रष्टाचार सहित विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया है। नगर निगम अधिकारियों में कार्रवाई के हड़कंप मचा हुआ है।
विजिलेंस जांच में आरोप सही पाए जाने पर कार्रवाई की गई है। अधिकारियों का कहना है कि चीफ सेनेटरी इंस्पेक्टर, सेनेटरी इंस्पेक्टर और फ्रैंड एसोसिएट के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। घोटाला सामने आने के बाद स्टेट विजिलेंस ने प्रदेश सरकार से केस दर्ज करने की अनुमति मांगी थी।
ऐसे सामने आया था मामला
आरटीआई कार्यकर्ता एडवोकेट नरेंद्र सुखन की शिकायत पर कार्रवाई की गई है। वर्ष 2012 में घोटाला सामने आया था। स्वतंत्रता सेनानी उत्तरधिकार संगठन के अध्यक्ष एवं आरटीआई कार्यकर्ता एडवोकेट नरेंद्र सुखन ने आरोप लगाया था कि हर माह निगम ठेकेदार को 10 लाख रुपये की पेमेंट दे रहा है पर सफाई के लिए महज तीन लाख रुपये ही खर्च हो रहे हैं।
नगर निगम की तत्कालीन आयुक्त रेनू फुलिया के सफाई कर्मचारियों की परेड कराने के आदेशों के बाद यह सच्चाई सामने आई थी। एग्रीमेंट के अनुसार 160 कर्मचारियों की नियुक्ति की जानी थी पर परेड के दौरान सिर्फ 44 कर्मचारी ही हाजिर मिले।
तत्कालीन निगम के चीफ सेनेटरी ऑफिसर और अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में पांच रिक्शा चालकों को भी पंक्ति में खड़ा कर उनकी परेड करा दी गई थी। पूछताछ में खुलासा होने और कार्रवाई का डर दिखाने पर वे भाग गए थे। बावजूद इसके अधिकारी ठेकेदार की वकालत करते रहे।
हर माह मोटी रकम अधिकारियों की जेब में जा रही थी, इसलिए वे हर माह 10 लाख रुपये के बिल पर आंख बंद करके हस्ताक्षर कर देते थे। हालांकि नगर निगम और ठेकेदार की तरफ से 57 कर्मचारियों की सूची सौंपी गई और बाकी के फील्ड में होने की बात कही गई, पर इनमें से भी सिर्फ 44 ही परेड में शामिल हुए थे।
रिक्शा चालकों के परेड में शामिल होने के बावजूद अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की और उन्हें आसानी से जाने दिया। विजिलेंस के एसपी पतराम का कहना है कि नगर निगम के तीन अधिकारियों और सफाई कराने वाली कंपनी के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। जांच के बाद यह कदम उठाया गया है। भ्रष्टाचारियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।