संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने इलाज पर खर्च का क्लेम खारिज करने के एक मामले में स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी को मुआवजा देने का आदेश दिया है। कंपनी को इलाज में आए खर्च 25,320 रुपये को नौ प्रतिशत ब्याज के साथ देना होगा। मानसिक उत्पीड़न के लिए 15 हजार रुपये और मुकदमे में आए खर्च के रूप में 5,500 रुपये देने के आदेश जारी किए हैं। कंपनी को मुआवजा 45 दिन के अंदर जारी करना होगा।
असंध निवासी शिकायतकर्ता श्रेय गर्ग के पिता ने स्टार हेल्थ इंश्योरेंस से एक फैमिली हेल्थ ऑप्टिमा पॉलिसी ले रखी थी, जो वर्ष 2016 से लगातार जारी थी। मई 2023 में श्रेय को डेविएटेड नेजल सेप्टम (नाक की हड्डी से जुड़ी समस्या) के कारण कैथल के एक अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। उनके ऑपरेशन पर करीब 30 हजार रुपये खर्च हुए। बीमा कंपनी ने यह तर्क देकर क्लेम खारिज कर दिया कि अस्पताल में भर्ती होने की सूचना 24 घंटे के भीतर नहीं दी गई थी।
कंपनी के अनुसार, मरीज 11 मई को भर्ती हुआ जबकि सूचना 16 मई को दी गई, जो पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन है। आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह और सदस्यों ने मामले की सुनवाई करते हुए बीमा कंपनी के तर्कों को अनुचित करार दिया। अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता के अनुसार, भर्ती के समय कंपनी के एजेंट को सूचना दे दी गई थी। अगर एजेंट ने आगे सूचना नहीं दी तो इसके लिए उपभोक्ता को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
क्लेम से बचने की कोशिश
अदालत ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि बीमा कंपनियां अक्सर प्रीमियम लेने में तो रुचि दिखाती हैं, लेकिन क्लेम देते समय तकनीकी कमियां निकालकर जिम्मेदारी से बचने की कोशिश करती हैं। आयोग ने क्लेम खारिज होने की तारीख (7 अगस्त 2023) से भुगतान होने की तिथि तक नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ इलाज का खर्च देने के आदेश दिए।