तहसील में मंगलवार को भी लोगों के सामने कई प्रकार की समस्याएं बनी रही। किसी को टोकन नहीं मिला तो किसी की रजिस्ट्री का इंतकाल नहीं हो पाया तो किसी व्यक्ति को नंबरदार नहीं मिले। ऐसे में हर व्यक्ति की व्यवस्था अतिरिक्त पैसों के साथ होती मिली। लोगों को नंबरदार तक की सुविधा पैसों में हो रही है। किसी भी नंबरदार को 150 से 200 रुपये दो और तस्दीक करवाओ। चाहे वह किसी भी क्षेत्र का रहने वाला हो, किसी अन्य क्षेत्र के नंबरदार से उसकी तस्दीक को मान लिया जा रहा है। उधर, सीएम मनोहर लाल के आदेश के बाद सस्पेंड किए गए रविंद्र सिंह के स्थान पर तहसीलदार राज बख्स अरोड़ा ने सुबह ज्वाइन कर लिया। दोपहर तक काम करवाने वालों की भीड़ कार्यालय में जमा रही। नये तहसीलदार भी दिनकर कार्यालय की फाइलें निपटाने में जुटे रहे।
सोमवार को सीएम मनोहर लाल ने तहसील कार्यालय का निरीक्षण किया था। इस दौरान भ्रष्टाचार मिलने पर तहसीलदार रविंद्र सिंह, नायब तहसीलदार हवासिंह, आरसी राजबीर और पटवारी सलमा रानी को सस्पेंड किया था। आरओ व पटवारी मंगलवार को भी तहसील कार्यालय में काम करते हुए नजर आए। तहसीलदार के स्थान पर दूसरे अधिकारी ने सीट संभाल ली, जबकि नायब तहसीलदार भी कार्यालय में नहीं आए।
200 रुपये में दूसरे नंबरदार को किया रजिस्ट्री में खड़ा
नाम न बताने की शर्त पर तहसील कार्यालय से रजिस्ट्री करवाकर निकलने वाले ने बताया कि उसकी रजिस्ट्री हुई है। हर काम की फीस तय है। रजिस्ट्री की कीमत के हिसाब से सरकारी फीस और ऊपर का रेट तय होता है। इसमें मार्क करवाने, टोकन लेने, गवाह और नंबरदारों तक की व्यवस्था के रेट तय है। गवाह व नंबरदारों को 150 से 200 रुपये में रजिस्ट्री में खड़ा किया गया। कुछ नंबरदार तहसील कार्यालय के पास रहते हैं और पूरे शहर की तस्दीक करते हैं।
सुबह की दे दिए जाते हैं टोकन
बारू राम ने बताया कि उसे रजिस्ट्री करवानी थी। इसके लिए उसने मंगलवार को उसने अपने कागज तैयार करवाए। इसके बाद टोकन लेने के लिए तहसील कार्यालय में भेजा, वहां पर उसे बताया गया कि टोेकन लेने के लिए सुबह आकर लाइन में लगना होगा। आज के सभी टोकन दिए जा चुके हैं। वहीं बाहर कागजात तैयार करवाने वाले ने टोकन के लिए पैसों की डिमांड की, जबकि उसको टोकन नहीं मिला।
इंतकाल के लिए छह महीने से लगा रहा है चक्कर
पैरा मिल्ट्री से एसआई रिटायर्ड कर्मबीर सिंह ने बताया कि सचिवालय से पांच किलोमीटर दूर कालोनी से वे साइकिल पर चक्कर लगा रहा है। करीब छह महीने पहले उसने रजिस्ट्री करवाई थी। अभी तक इंतकाल नहीं हुआ। बार-बार चक्कर लगा चुका है, लेकिन अभी तक उसका काम नहीं हुआ। कई बार पहले तहसीलदार से मिले, पर उसका काम नहीं हुआ। आज वे दोबारा से नए तहसीलदार को मिलकर अपना करवाने की गुहार करेगा।
शौचालयों में फैली गंदगी
तहसील के शौचालयों में गंदगी की भरमार है। पानी की व्यवस्था नहीं है। लोगों को सचिवालय में इन सुविधाओं के लिए दूसरी बिल्डिंगों में जाना पड़ता है। तहसील में आए राम स्वरूप ने बताया कि शौचालय में सफाई की कोई व्यवस्था नहीं है। बाहर तक बदबू आती है। अंदर जाने का तो मन ही नहीं करता। टंकी भी टूटी पड़ी है। इस तरफ अधिकारियों का कोई ध्यान नहीं है। अधिकारी अपने शौचालयों की पूरी सफाई रखते हैं।
मेरी प्राथमिकता तहसील में आने वाले लोगों का काम करने की रहेगी। किसी भी काम के लिए लोगों को बिचौलिए की जरूरत नहीं है। सीधे कार्यालय में आकर अपना काम करवा सकते हैं। यदि कोई व्यक्ति किसी भी काम के लिए पैसे की बात करता है तो उसकी शिकायत दें। ऐसे करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। राज बख्स, तहसीलदार करनाल।