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Karnal News: गर्भ में बच्चे की मौत, परिजनों ने किया हंगामा

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- समय पर प्रसव न कराने का आरोप, जांच के लिए कमेटी गठित
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- हंगामे की सूचना पर मौके पर पहुंची डायल-112 की टीम

संवाद न्यूज एजेंसी

करनाल। जिला नागरिक अस्पताल में एक गर्भवती के गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत हो गई। बच्चे की मौत के बाद परिजनों ने लेबर रूम के बाहर हंगामा किया। सूचना पर पहुंची डायल 112 की टीम ने परिजनों से बात कर उचित कार्रवाई का आश्वासन देकर उन्हें शांत कराया। मामला शुक्रवार देर रात का है। परिजनों का आरोप है कि समय पर डिलीवरी नहीं कराई गई।
इसको लेकर पीएमओ ने चार सीनियर डॉक्टरों की कमेटी गठित कर दी है।
जानकारी के अनुसार, बांसा गांव निवासी 30 वर्षीय गर्भवती परीक्षा अपने पति मनोज व अन्य परिजनों के साथ नागरिक अस्पताल में 29 अगस्त शाम 4.29 बजे पहुंची। इसके बाद डॉक्टर व नर्सिंग स्टाफ ने उसका चेकअप किया तो उस समय बच्चेदानी का मुंह खुला न होने के कारण उसे इंतजार करने के लिए कहा गया।
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एक दिन बीतने के बाद अगली सुबह करीब 11 बजे डॉक्टरों ने फिर से गर्भवती का चेकअप किया लेकिन उस समय तक भी बच्चेदानी का मुंह वैसा ही था ऐसे में डॉक्टरों ने परिजनों को सिजेरियन से बच्चा पैदा करवाने की सलाह दी लेकिन परिजनों ने इसकी अनुमति नहीं दी। ऐसे में डॉक्टरों ने उन्हें इंतजार करने को कहा। दोपहर करीब तीन बजे एक बार फिर डॉक्टरों ने उसका चेकअप किया। उस समय तक बच्चे की दिल की धड़कन और गर्भवती महिला की हालत बिलकुल ठीक थी।

दोपहर तीन बजे के बाद नाइट शिफ्ट में पहुंची महिला डॉक्टर ने लेबर रूम में आने के बाद स्टाफ के साथ गर्भवती की जांच की लेकिन उसमें बच्चे की धड़कन नहीं मिली। जिसके बाद डॉक्टर ने उन्हें अल्ट्रासाउंड कराने की बात कही। इसके बाद परिजन गर्भवती को अल्ट्रासाउंड कराने के लिए बाहर ले गए। अल्ट्रासाउंड कराने के बाद परिजन रात करीब 10 बजे अस्पताल पहुंचे। जहां पर परिजनों ने डॉक्टरों को रिपोर्ट दिखाई। जिसमें उन्होंने बताया कि बच्चे की मौत हो चुकी है। इसके बाद परिजनों ने हंगामा शुरू किया।

डॉक्टरों के अनुसार, महिला आठ वर्ष बाद गर्भवती हुई थी। यह पहला बच्चा था। इससे एक बार गर्भावस्था के दौरान महिला का गर्भपात भी हो चुका था। ऐसे में महिला हाई रिस्क पर थी। अगर गर्भवती के परिजन उन्हें सिजेरियन करने की अनुमति देते तो आज बच्चा जिंदा होता। क्योंकि प्राथमिक जांच में सामने आया है कि गर्भनाल बच्चे के गले में चार बार लिपटी थी। जिससे समय से सिजेरियन न होने के कारण वह कसती चली गई और बच्चे की गर्भ में मौत हो गई।
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मामले की गंभीरता को देखते हुए चार सीनियर डॉक्टरों कमेटी गठित की गई है। कमेटी में डॉ. रजनीश गर्ग, डॉ. सतविंद्र सिंह, डॉ. अंजु व डॉ. अनु शामिल हैं। जो जांच के बाद उन्हें रिपोर्ट सौंपेंगी। रिपोर्ट में अगर किसी स्टाफ की कोई लापरवाही पाई जाती है तो उस पर विभागीय कार्रवाई के लिए लिखा जाएगा।
डॉ. बलवान सिंह, पीएमओ, नागरिक अस्पताल, करनाल
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