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कम खर्च में आशियाने का सपना होगा साकार

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 जिले के उन हजारों लोगों के लिए अच्छी खबर है जो सुविधाओं से लैस वैध कॉलोनी में कम खर्च में अपने सपनों का छोटा सा आशियाना बनाने की तैयारी में है। 
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दीन दयाल जन आवास योजना पर देर से ही सही सीएम सिटी में हलचल शुरू हो गई। एक दर्जन से अधिक रियल स्टेट कंपनियों ने टाउन प्लानिंग विभाग के पास पांच से 15 एकड़ में वैध कॉलोनी बसाने के लिए आवेदन किया है। टाउन प्लानिंग विभाग इन आवेदनों पर काम शुरू कर चुका है। लाइसेंस मिलने के बाद यह डीलर जिले के उन जोन में कॉलोनी बसा सकेंगे जो योजना के लिए फिलहाल टाउन प्लानिंग विभाग ने नक्शे में चिह्नित किए हैं। यदि सभी आवेदकों को लाइसेंस मिल जाता है तो 2021 तक शहर में करीब आठ हजार प्लॉट काटकर विकसित किए जाएंगे। सभी प्लाट का मूल्य बाजार रेट से करीब 20 से 30 फीसदी कम होगा। करनाल सीएम सिटी होने के कारण यहां पर औद्योगिक व अन्य कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। इस कारण करनाल के अलावा आसपास के जिलों में रहने वाले लोग भी नौकरी और कारोबार के लिए शहर का रुख कर रहे हैं। कई बिल्डर ऐसे लोगों को रिझाकर अवैध कालोनियों में प्लॉट बेच रहे हैं। जबकि यहां पर पांच से छह साल तक उन्हें न तो बिजली मिल पाती है और न पानी और सीवर की सुविधा। जिससे ग्राहक खुद को ठगा हुआ सा महसूस करता है। ऐसे में सरकार की यह योजना न केवल ऐसे लोगों को राहत देगा, बल्कि उन्हें हुडा सेक्टरों की तरह अपनी कॉलोनियों में भी सभी सुविधाएं मिलेंगी। टाउन प्लानिंग अधिकारियों का कहना है कि इस आवास योजना में लोगों को प्लाट 20 से 30 फीसदी कम रेट में मिलेगा। लाइसेंस पाने वाली सभी कंपनियां इस साल से ही कालोनी में प्लाट काटना शुरू कर देंगी। 2021 तक प्लॉट काटने के अलावा सभी सुविधाओं का विकास कर प्लॉट ग्राहकों को हैंडओवर करना होगा। अगर प्लॉट देने में बिल्डर से देरी होगी तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।

ऐसी होगी कॉलोनी 
दीन दयाल आवास योजना के तहत शहर में पांच से 15 एकड़ में जो कॉलोनी बनाई जाएगी। उसमें सड़क नौ मीटर तक की होंगी। सबसे बड़ा प्लॉट 150 गज का होगा। एक व्यक्ति दो प्लॉट से ज्यादा नहीं ले सकता। इसके साथ यह प्लॉट एक साथ मिलाकर उन पर निर्माण नहीं किया जा सकेगा। कॉलोनी का 61 प्रतिशत हिस्सा आवासीय चार प्रतिशत हिस्सा कमर्शियल के लिए इस्तेमाल करना होगा। बिल्डर को कॉलोनी के अंदर ही लोगों के लिए सामुदायिक केंद्र, स्कूल, कम्युनिटी हॉल आदि बनाना होगा। 
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यहां पर बनेंगी कॉलोनियां
इस योजना के तहत करनाल में सेक्टर-35 में जेबीबी के पास, सेक्टर-36 में अंसल के पास, सेक्टर-32 में नूरमहाल के पास, अल्फा सिटी और सीएचडी के पास कॉलोनियां बसाई जाएंगी। कालोनी बसाने के लिए टाउन प्लानिंग विभाग के पास वार्टिका कॉलोनाइजर, स्काईहाई, अंसल, अल्फा, एमटी रियल स्टेट, रियल वर्थ, सिटी टैप टाउनशिप, रोज बिल्डींग, मां वैष्णो, एजीजी वैल्यू होम, वैल्यू वेल इंफ्रा, फेंट वूलस जैसी कंपनियों ने आवेदन किया है। लाइसेंस मिलने के दिन से ही कंपनी को चार साल के अंदर कॉलोनी डेवलप करनी होगी।  

यह है योजना और शर्तें
योजना का उद्देश्य कम व मध्यम क्षमता वाले शहरों में (उच्च सघनता वाली प्लाट युक्त कालोनियों) का विकास करना है, जिनके अंदर एक उदार नीति के तहत छोटे प्लाट उपलब्ध कराए जाएंगे। नई शर्तों के अनुसार कालोनी 5 से 15 एकड़ तक का क्षेत्रफल होगा। प्लॉट का अधिकतम एरिया 150 वर्गमीटर होगा। फ्लोर एरिया रेश्यो दो रहेगा। ग्राउंड कवरेज 65 प्रतिशत होगी। लाइसेंसशुदा कालोनी का 10 प्रतिशत क्षेत्र सामुदायिक सुविधाओं के लिए मुफ्त में सरकार को देना होगा। मध्यम क्षमता वाले शहरों के लिए एक लाख रुपये, कम क्षमता वाले शहरों के लिए 10,000 रु. प्रति एकड़ की दर से लाइसेंस शुल्क लगेगा। सीएलयू (भूमि उपयोग में परिवर्तन) व ईडीसी (बाह्यं विकास शुल्क) माफ होगी। आइडीडब्ल्यू (आंतरिक विकास कार्य) के लिए 25 प्रतिशत की बैंक गारंटी जमा कराई जाएगी। इसके तहत मध्यम क्षमता वाले क्षेत्र के लिए 10 लाख, कम क्षमता वाले क्षेत्र के लिए 7.5 लाख रुपये प्रति एकड़ लाइसेंस शुल्क रहेगा। कम क्षमता वाले क्षेत्र वाले सभी अन्य कस्बों के लिए पांच लाख रुपये प्रति एकड़ की दर से ईडीसी का भुगतान करना होगा। आवेदक द्वारा ईडीसी के लिए 25 प्रतिशत की बैंक गारंटी जमा कराई जाएगी। ऐसी सभी परियोजनाओं को लाइसेंस प्रदान करने की तिथि से चार वर्ष के अंदर अनिवार्य रूप से पूरा करना होगा।
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दीन दयाल आवास योजना के तहत कॉलोनी विकसित करने के लिए विभाग में दर्जनों कंपनियों ने आवेदन किया है। इस योजना के तहत मिलने वाले प्लॉट काफी कम रेट के होंगे। जांच के बाद सभी कंपनियों को जल्द लाइसेंस देकर डेवलपमेंट शुरू कर दिया जाएगा
- धीरेंद्र कुमार, टाउन प्लानिंग अधिकारी, करनाल
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