संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। ऐतिहासिक पंचदेव तीर्थस्थान पाढा में प्राथमिक स्वास्थ्य (पीएचसी) को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) अपग्रेड हुए लगभग पांच वर्ष बीत चुके है लेकिन अभी तक अपना भवन नहीं मिल पाया है। ऐसे में अभी सरकारी स्कूल में किराए पर सीएचसी पाढा को चलाना पड़ रहा है। जिसके चलते ग्रामीणों को इलाज के लिए दूर दराज जिला नागरिक अस्पताल में धक्के खाने पड़ते हैं।
ग्रामीण कृष्ण कुमार, धूप सिंह, सोनू, कौशल्या, निर्मला, सुनहरी व रामकोरी का कहना है कि सरकार ने इसकी घोषणा तो लगभग पांच वर्ष पहले की थी और पंचायत द्वारा जमीन भी दी गई थी लेकिन आज तक इसके नए भवन का निर्माण अधर में लटका हुआ है। गांव के मुखिया ने स्कूल के अंदर बिल्डिंग देकर सीएससी को चालू करवाया है लेकिन यह नाम की ही रह गई है।
सीएचसी की बिल्डिंग न होने के कारण आज तक भी कोई बच्चा पैदा नहीं हो पाया है। ऐसे में क्षेत्र में आने वाले गांव वासियों को डिलीवरी करवाने के लिए निसिंग व बल्ला जाना पड़ता है। सीएचसी में एसएमओ के साथ छह डॉक्टरों के पद रिक्त पड़े हुए है। वहीं अन्य स्टाफ की भी कमी है। यहां पर सिर्फ एक ही डॉक्टर के कंधों पर सारी जिम्मेदारी है। वह भी अन्य कार्यों के चलते बाहर ही रहता है। जिससे मरीज को इलाज व दवा बाहर से ही लेनी पड़ती है। संवाद
नहीं मिल रहा पर्याप्त इलाज : धूप सिंह
ग्रामीण धूप सिंह का कहना है कि डॉक्टरों की कमी के कारण काफी परेशानी झेलनी पड़ती है। मरीज अपना सही तरीके से इलाज भी नहीं कर सकते। सरकार के सभी दावे खोखले हो रहे हैं। घोषणा करके पूरा कार्य नहीं कर रहे हैं।
नहीं मिल रही डिलीवरी की सुविधा : कौशल्या
ग्रामीण महिला कौशल्या का कहना है कि गांव में महिलाओं की डिलीवरी न होने के कारण दूर के अस्पतालों में ले जाना पड़ता है। गांव से शहर लगभग 25 किलोमीटर के लगभग होने से कई बार महिलाओं के लिए मुसीबत हो जाती है। जिससे कई महिलाओं व बच्चों की मृत्यु भी हो जाती है।
सीएचसी में नहीं होती जांच : तिलक राज
ग्रामीण तिलक राज का कहना है कि अस्पताल में किसी भी प्रकार की मशीनरी नहीं है। जिससे कोई अपना चेकअप नहीं करवा सकते। सीएचसी में कई गांव लगते हैं। सरकार द्वारा गांव में डॉक्टर निर्धारित किए हुए हैं। उनके न होने के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
डॉक्टर तृप्ति का कहना है कि हमारे पास अपनी बिल्डिंग ना होने के कारण कोई भी मशीनरी हम नहीं रख सकते। दवाइयां भी जो सामान्य अस्पताल में मिलती है वही दवाइयां हमारे पास होती है । कई बार दवाइयां की कमी होने के कारण दवाइयां खत्म हो जाती हैं । परंतु उसे जल्दी ही मंगवाया जाता है ताकि गांव वासियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। - डॉ. तृप्ति, सीएचसी, पाढा।