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राम नाम का जाप चमत्कारिक अनुभूति देने वाला : विनोद शास्त्री

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- श्री महादेव वेलफेयर सोसाइटी अंसल टाउन के श्री महादेव मंदिर में श्री राम कथा का आयोजन
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। श्री महादेव वेलफेयर सोसाइटी अंसल टाउन के श्री महादेव मंदिर में चल रही श्री राम कथा में रविवार को कथा व्यास विनोद शास्त्री ने हनुमान जी की लंका दहन का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि वह मनुष्य भाग्यशाली है, जिसने राम की कथा में भाग लेकर राम नाम का जाप किया। राम नाम का जाप चमत्कारिक अनुभूति देता है। भगवान को प्राप्त करने के कई तरीके हो सकते हैं, लेकिन इनमें सबसे सरल व श्रेष्ठ भगवान के नाम का सुमिरन माना गया है। मानव जन्म बहुत मुश्किल से मिलता है, अगर मनुष्य जीवन में पुण्य कार्य किए हैं तो दोबारा भी मानव जीवन मिल सकता है। संतों की वाणी से मोक्ष की प्राप्ति होती है, बशर्ते सच्चे मन व ध्यान से इसका सिमरन किया हो।
उन्होंने कहा कि मेघनाद ने श्री हनुमान जी को रावण के सामने लाकर खड़ा कर दिया। हनुमान जी ने देखा कि राक्षसों का राजा रावण बहुत ही ऊंचे सोने के सिंहासन पर बैठा हुआ है। उसके आसपास बहुत से बलवान योद्धा और मंत्री आदि बैठे हुए हैं, लेकिन रावण के इस प्रताप और वैभव का हनुमान जी पर कोई असर नहीं पड़ा। वह वैसे ही निडर खड़े रहे। जब रावण ने पूछा कि बानर कौन हो तुम, हनुमान जी ने कहा, मैं भगवान श्रीराम चंद्र का दूत हूं। तुम चोरी से उनकी पत्नी का हरण कर लाए हो। उन्हें वापस कर दो, इसी में तुम्हारा और तुम्हारे परिवार का कल्याण है। यदि तुम यह जानना चाहते हो कि मैंने अशोक वाटिका के फल क्यों खाए, पेड़ आदि क्यों तोड़े, राक्षसों को क्यों मारा तो मेरी बात सुनो। मुझे बहुत जोर की भूख लगी थी, अत: मैंने वाटिका के फल खा लिए। बंदर-स्वभाव के कारण कुछ पेड़ टूट गए।
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रावण को बहुत ही क्रोध चढ़ आया। उसने राक्षसों को हनुमान जी को मार डालने का आदेश दिया। राक्षस उन्हें मारने दौड़े, लेकिन तब तक विभीषण ने वहां पहुंच कर रावण को समझाया कि यह तो दूत है। इसका काम अपने स्वामी का संदेश पहुंचाना है। इसका वध करना उचित नहीं होगा। इसे कोई अन्य दंड देना ही ठीक होगा।
यह सलाह रावण को पसंद आ गई। उसने कहा, ‘ठीक है, बंदरों को अपनी पूंछ से बड़ा प्यार होता है। इसकी पूंछ पर कपड़े लपेट कर, तेल डालकर आग लगा दो। जब यह बिना पूंछ का होकर अपने स्वामी के पास जाएगा, तब फिर उसे भी साथ लेकर लौटेगा।

रावण का आदेश पाकर राक्षस हनुमान जी की पूंछ पर तेल से भिगो-भिगोकर कपड़े लपेटने लगे। वह धीरे-धीरे अपनी पूंछ बढ़ाने लगे। अंत में ऐसा हुआ कि पूरी लंका में कपड़े, तेल, घी आदि कहीं बचे ही नहीं। तब राक्षसों ने तुरन्त उनकी पूंछ में आग लगा दी। जिससे उन्होंने पूरी लंका में आग लगा दी।
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मुख्य यजमान के रूप में आदर्श दीवान, उषा दीवान, सचिन दीवान, पूजा दीवान, अमित दीवान, वंदना दीवान, नितिन दीवान और नीशू दीवान ने परिवार सहित शिरकत की। मौके पर प्रधान रणबीर रमन, परिवार सिंह कौशिक, अशोक मैणी, नवीन कुमार, प्रेम कंसल, संजय सिंगला, नवीन मित्तल, शोभा मित्तल, सरोज रमन, इंदिरा वर्मा व गीता मलिक आदि मौजूद रहे।
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