माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। सिंगल यूज प्लास्टिक पर सरकार की ओर से पाबंदी लगाए जाने के बावजूद शहर में इसका इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। ज्यादातर प्लास्टिक का सामान और पाॅलिथीन बाहर से नहीं आती। शहर में ही उत्पादन और भंडारण होता है। औद्योगिक क्षेत्र सेक्टर-3 में ही सिंगल यूज प्लास्टिक बनाने वाली तीन इकाइयां चल रही हैं। दिल्ली से भी आपूर्ति होती है। नगर निगम के अधिकारी छोटे दुकानदारों का ही चालान करते हैं। बड़े कारोबारियों पर कार्रवाई नहीं की जाती।
गुड़ मंडी बाजार सिंगल यूज प्लास्टिक का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। यहां बैठे बड़े होल सेलर दुकानदारों को सस्ती दरों पर माल उपलब्ध करा रहे हैं। यही सामान आगे फुटकर व्यापारियों तक पहुंचता है और फिर शहर की हर गली, हर मोहल्ले की दुकानों पर दिखाई देता है। थैले, पॉलिथीन, गिलास और डिस्पोजल प्लेटें सिंगल यूज प्लास्टिक का ही रूप हैं, जिनका इस्तेमाल शादी-ब्याह से लेकर रोजमर्रा के छोटे-छोटे कामों में हो रहा है।
प्रशासन की कार्रवाई का असर छोटे दुकानदारों पर ज्यादा दिख रहा है। छोटे फुटकर दुकानदारों के चालान काटकर जुर्माना लगाया जा रहा है लेकिन बड़े स्तर पर उत्पादन करने और क्रय विक्रय करने वाली इकाइयों या होलसेल व्यापारियों पर अब तक कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई। यही वजह है कि सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूरी तरह रोक नहीं लग पा रही और बाजारों में खुलेआम इसका लेन-देन हो रहा है।
निकासी ठप, शहर की सुंदरता पर दाग
सिंगल यूज प्लास्टिक का सबसे बड़ा नुकसान शहर की सफाई व्यवस्था पर पड़ रहा है। नगर निगम की निकासी व्यवस्था बार-बार जाम हो रही है। नालों में फंसी पॉलिथीन और डिस्पोजल सामग्री निकासी को ठप कर देती है। वहीं, सड़कों और गलियों में कूड़े के ढेर शहर की सुंदरता पर दाग लगा रहे हैं।