किसान आंदोलन में किसान राजनीति में उभर कर आए भाकियू नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी सिर्फ इसी किसान आंदोलन तक सीमित रहना नहीं चाहते, बल्कि किसान आंदोलन के अलावा भी भविष्य में अन्य आंदोलन के लिए भी रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी है। इसके लिए वह हरियाणा राज्य के प्रत्येक गांव में एक एक किसान कमेटी गठित कराने की दिशा में जुट गए हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर कभी भी सीधे इन किसान कमेटियों से संपर्क स्थापित किया जा सके और आंदोलन को तत्काल गति प्रदान की जा सके। फिलहाल उन्होंने छह फरवरी को विभिन्न नेशनल व स्टेट हाइवे पर किसानों द्वारा किए गए तीन घंटे के चक्काजाम को सफल बताते हुए कहाकि किसानों को लंबे आंदोलन के लिए तैयार रहना चाहिए। किसान आंदोलन के अगले कदम की अगली रणनीति तो संयुक्त किसान मोर्चा की आगामी दो दिनों में प्रस्तावित बैठक में तय की जाएगी।
निसंदेह भाकियू के प्रदेशाध्यक्ष बने गुरनाम सिंह चढ़ूनी लंबे समय से किसानों के मुद्दे उठाते आए हैं। लेकिन इस किसान आंदोलन ने उन्हें एक नया कद प्रदान किया है। आलम यह है कि भाकियू के झंडे के इतर भी भाकियू (चढ़ूनी) लिखा जाने लगा है। इस पूरे आंदोलन को उन्होंने काफी ऊंचाई तक पहुंचाया भी है। यही कारण है कि अब सिर्फ इसी किसान आंदोलन तक सीमित नहीं रहना चाहते हैं। गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने बताया कि छह फरवरी को संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर किया गया चक्का जाम पूरी तरह सफल रहा है। जिन स्थानों पर चक्काजाम तय किया गया था, उसके अलावा भी बड़ी संख्या में गांव गांव जाम लगाकर आंदोलन को सफलता प्रदान की है। अग्रिम रणनीति के बारे में पूछने पर बताया कि आगामी दो तीन दिनों में संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में ही आंदोलन की अगली रणनीति सर्वसम्मति से तय की जाएगी। उन्होंने अपनी रणनीति का खुलासा करते हुए बताया कि वह चाहते है कि हरियाणा के प्रत्येक गांव में एक किसान कमेटी का गठन हो। ताकि इस आंदोलन या उसके बाद भी कोई आंदोलन करना पड़े तो कमेटी के प्रधान व अन्य पदाधिकारियों से कुछ ही देर में सीधा संपर्क स्थापित हो जाए। वैसे भी अभी किसान आंदोलन के लंबा चलने की उम्मीद हैं तो यदि कमेटी गठित हो जाएगी, तो आंदोलन को मजबूती के साथ चलाने में काफी मदद मिलेगी।
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