करनाल। कहते हैं हीरे की परख जौहरी को होती है। करनाल में यशस्वी नाम का हीरा तो है, लेकिन उसे जौहरी नहीं मिल रहा। शायद यही कारण है कि विलक्षण प्रतिभा के धनी ‘यशस्वी’ को राजीव गांधी मानव सेवा अवार्ड के लिए खुद आवेदन करना पड़ रहा है। होना तो यह चाहिए था कि यशस्वी की काबिलियत और हुनर को देखते हुए इसे सरकार खुद सम्मान प्रदान करती। यशस्वी महज सात साल का है।
दूसरी कक्षा में पढ़ता है, लेकिन उसकी क्षमता के सामने 11वीं-12वीं के साइंस स्टूडेंट्स भी टिक नहीं पाते। गणित, साइंस, साइबर और इंग्लिश में नेशनल, इंटरनेशनल ओलंपियाड अपने नाम कर चुका है। गांव फफड़ाना निवासी यशस्वी बल्हारा के पिता देवेंद्र बल्हारा ने सोमवार को बेटे का आवेदन राजीव गांधी मानव सेवा अवार्ड, नेशनल चाइल्ड वेलफेयर अवार्ड 2013-14 के लिए किया है। उन्होंने यह आवेदन डीसी को दिया।
देवेंद्र बल्हारा ने बताया कि यशस्वी देश में सबसे कम उम्र में नेशनल अबेक्स प्रतियोगिता जीतने का रिकार्ड भी बना चुका है। यशस्वी ने चार साल की उम्र में महाभारत व रामायण कंठस्थ कर लिए थे। अब सात साल की उम्र में बारहवीं कक्षा के बच्चों को चुनौती दे रहा है। मिलेनियम स्कूल चंडीगढ़ ने उसे 15 हजार रुपये स्कॉलरशिप दी है और
दाखिला दिया। यशस्वी बल्हारा का न केवल पढ़ाई के प्रति गहरा लगाव है, बल्कि खेल के क्षेत्र में भी कई प्रतियोगिताएं जीत चुका है। यशस्वी को नेशनल जीयोग्राफी, वर्ल्ड जीयोग्राफी, सोलर सिस्टम, ह्यूमन अटॉनमी के बारे में ज्ञान है। उसे फोटोग्राफी का शौक है।
यह हैं यशस्वी की उपलब्धियां
- देश में सबसे कम उम्र के विद्यार्थी को नेशनल अबेक्स प्रतियोगिता जीतने का गौरव हासिल। दो बार वह इसमें रिकार्ड होल्डर रह चुका है।
- चार साल की उम्र में रामायण व महाभारत का गहराई से ज्ञान।
- मात्र 3 मिनट में 50 से अधिक प्रश्न हल करने का गौरव हासिल।
- दो बार चेस में जिला चैंपियन
- रोलर स्केटिंग प्रतियोगिता में तीन बार ओवरऑल चैंपियन।
- इंडियन व वर्ल्ड जीयोग्राफी के बारे में अत्याधिक जानकारियां।
- सोलर सिस्टम का अच्छा ज्ञान।
- मानव शरीर के सभी अंगों के बारे में अंदरूनी ज्ञान।
- पूरी आर्वत सारिणी की डिटेल, कौन सा तत्व, किस पीरियड में जुबानी याद।
- अलजैबरा और जीयोमैट्री के सवालों में रुचि रखता है।