शहर को जाम व प्रदूषण से मुक्ति दिलाने के उद्देश्य से मंगलवार से शुरू किए
गए कार फ्री डे पर प्रशासन की साइकिल अव्यवस्थाओं के कारण पटरी से उतर गई।
बिना किसी तैयारी और बिना रूट प्लान के निकली प्रशासन की साइकिल रैली को
भी व्यापारियों के विरोध का सामना करना पड़ा।
दुकानदारों ने डीसी, एसपी
समेत पूरे अमले के सामने नारेबाजी की और बाइक को बाजार के अंदर आने की मांग
की। मामला गरमाने के बाद आखिरकार बाइक को बाजारों के अंदर जाने के लिए
अनुमति दे दी गई। देर शाम तक मामला इतना उबाल खा गया कि इसकी गूंज सीएम
दरबार तक पहुंच गई। व्यापारियों ने बाजारों के चारों तरफ पुलिस खड़े करने
का विरोध जताया है। उधर, कार फ्री डे का असर स्कूलों में जरूर दिया। स्कूल
स्टाफ व ज्यादातर बच्चे साइकिल से स्कूल पहुंचे। शाम को इस मामले की
जानकारी सीएम दरबार में भी दी गई।
प्रशासन के सामने की नारेबाजी
सुबह
सात बजे से शहर के चार बाजार सब्जी मंडी से कमेटी चौक, कुंजपुरा रोड,
पुरानी तहसील रोड और सर्राफा बाजार को नो मोटर व्हीकल जोन घोषित रहा। इन
शहरों के चारों तरफ पुलिस कर्मचारी तैनात किए गए और किसी को भी बाजारों के
अंदर कार व बाइक नहीं ले जाने दिया गया। एक बाइक सवार अपनी पत्नी को लेकर
बाजार के अंदर स्थित अमृतधारा अस्पताल में जाने लगा तो पुलिस ने उसे रोक
दिया और दूसरे रास्ते से जाने को कहा। कुछ इसी प्रकार की स्थिति घरों से
वाहनों से अपनी दुकान पहुंचने के लिए दुकानदारों के सामने आई। पुलिस ने
दुकानदारों को बीच रास्ते में ही रोक दिया। सुबह जैसे ही 8.45 बजे डीसी
डॉ. जे गणेशन, एसपी पंकज नैन समेत प्रशासनिक अधिकारी साइकिल से सब्जी मंडी
चौक पहुंचे। यहीं पर दुकानदारों का गुस्सा फूट पड़ा। इसी दौरान दुकानदारों
ने प्रशासन के सामने जमकर नारेबाजी की और इसका विरोध किया। दुकानदारों ने
बताया कि वे घरों से दुकानों तक जा रहे हैं, लेकिन पुलिस उन्हें दुकानों तक
नहीं जाने दे रही है। दुकानदारों ने यह भी आरोप लगाया कि आखिर वे अपने
वाहन खड़ा कहां पर कहें, ऐसे महाबीर दल के पास बनी पार्किंग में वाहन खड़ा
करते हैं करीब आधा घंटा अपनी दुकान तक आने में लग जाएगा। करीब 15 मिनट तक
दुकानदारों ने विरोध जताया, इस दौरान भाजपा के नेता भी मौके पर पहुंचे।
इसके बाद एसपी ने बाजारों में बाइक ले जाने की अनुमति दी, तब मामला शांत
हुआ।
न सर्वे न रूट प्लान
प्रशासन ने कार फ्री डे का प्रचार तो
जरूर किया लेकिन, इसको लेकर कोई रोडमैप तैयार नहीं किया। खुद प्रशासन के
आला अधिकारियों को ये नहीं पता था कि आखिर कार फ्री डे पर करना क्या है और
वाहनों को कहां से गुजरना है। उधर, न ही दुकानदारों और बाहर से आए ग्राहकों
को पता था कि कहां पर वाहन खड़ा करने हैं और कहां पर कैसे जाना है। दूसरा
सबसे बड़ा कारण यह भी रहा कि प्रशासन मीटिंग करता रहा, लेकिन जमीन पर आकर
किसी ने काम नहीं किया। न तो यह सर्वे किया गया इन बाजारों में कितने
दुकानदार हैं और वे किस वाहन से कहां से आते हैं। विवाद होने का बड़ा कारण
यह भी रहा कि प्रशासन के किसी भी अधिकारी बाजार एसोसिएशन के प्रधानों के
अलावा किसी दुकानदार को अपने साथ नहीं लिया। इस कारण दुकानदारों ने इसका
विरोध कर दिया। रही सही कसर पुलिस कर्मचारियों ने पूरी कर दी, उन्होंने ये
तो जरूर बताया कि यहां से नहीं जाना, लेकिन जाएं कहां से ये किसी ने नहीं
बताया।
जाम रहा शहर, बाजार खुले खुले
मंगलवार कार फ्री डे था,
लेकिन औरों दिनों की तरह शहर में जाम की स्थिति रही, लेकिन औरों दिनों की
तरह की शहर में जाम की स्थिति रही। बस स्टैंड, कुंजपुरा रोड व अंबेडकर चौक
पर जाम की स्थिति बनी रही। बस स्टैंड के आसपास वाहनों के खड़ा करने के कारण
जमा लगा रहा। उधर, शहर के सभी बाजार जाम से मुक्त खुले खुले दिखे। दिनभर
बाजारों में और दिनों के अलावा कम भीड़ दिखी और जाम नहीं लगा। हालांकि,
ग्राहकों ने प्रशसान की इस पहल का स्वागत किया, लेकिन उनको बाजार तक आने
में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। बाजारों में आने व जाने वाले सभी
रास्तों पर भारी पुलिस बल तैनात रहा।
पार्किंग हुई ओवरलोडिड
कार
फ्री डे को लेकर शहर की पार्किंग भी ओवरलोडिड रही। नि:शुल्क और शुल्क वाली
सभी पार्किंग फुल रही। रामलीला ग्राउंड, लघु सचिवालय के बाहर, बस स्टैंड,
सब्जी मंडी व महाबीर दल अस्पताल के पास सभी पार्किंग भरी रही। किसी भी
पार्किंग में वाहन खड़ा करने की जगह नहीं बची। हालांकि, शाम सात बजे के बाद
बाजारों में फिर से हलचल दिखी। लोगों को पार्किंग से अपने वाहन निकालने भी
काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। लघु सचिवालय के बाहर पुलिस तैनात रही,
यहां पर किसी को भी वाहन के साथ अंदर नहीं जाने दिया गया।
साइकिल रैली में आईजी पहुंचे कार लेकर
कार
फ्री डे को लेकर डीसी व एसपी अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ घर से
साइकिल पर निकले और बाजारों से होते हुए लघु सचिवालय पहुंचे। उधर, सब्जी
मंडी चौक पर आईजी हनीफ कुरैशी कार से पहुंचे। हालांकि, प्रशासन द्वारा इसे
कार फ्री जोन घोषित कर रखा था। जैसे ही आईजी रैली की तरफ बढ़े तो आईजी का
चालक गाड़ी लेकर और आगे लगा, इस पर आईजी ने उसे टोका तो वह पीछे हट गया।
हालांकि, इस पर सभी को अश्चर्य जरूर हुआ कि कार फ्री डे पर आईजी कार से आए।
कार और बाइक को लेकर भी कंफ्यूजन
एक
सप्ताह से शहर के लोगों को इस बात के लिए तो जागरूक किया गया कि 17 नवंबर
को कार फ्री डे है, लेकिन बाजारों को लेकर कोई स्थिति स्पष्ट नहीं थी। कार
और बाइक को लेकर भी कंफ्यूजन की स्थिति रही। सोमवार देर रात तक न तो पुलिस
प्रवक्ता को रूट का पता था और ही जिला प्रशासन के प्रवक्ता को। शहर के
बुद्धिजीवियों का कहना है कि अगर पंफ्लेट के माध्यम से बाजारों के रूट
प्लान बताए जाते तो इतनी समस्या नहीं आती।