माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। राइस मिलों में धान गायब होने के पीछे मंडी अधिकारी, राइस मिलर और आढ़तियों की तिकड़ी का हाथ माना जा रहा है। खरीद एजेंसियों से सांठगांठ कर इस तिकड़ी ने करोड़ों रुपये का खेल कर दिया। सिर्फ चार राइस मिलों की जांच में ही 5.94 करोड़ रुपये की हेराफेरी सामने आई है। फर्जी गेटपास जारी करके बिना धान आए ही अभिलेखों में धान खरीद भी लिया और राइस मिलों में पहुंचा भी दिया गया।
ये हेराफेरी होती रही लेकिन मंडी अधिकारी और खरीद एजेंसियों के निरीक्षक देखते रहे, इसलिए जांच रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से ये उल्लेख भी किया गया कि बिना इनकी संलिप्तता के हेराफेरी संभव नहीं थी। खरीद एजेंसियों के निरीक्षकों ने बिना धान की ढेरी देखे ही, सिर्फ आढ़तियों के कहने पर ही पोर्टल पर धान खरीद कर ली, इसी गेटपास को आढ़तियों ने राइस मिलरों को 200 से 250 रुपये प्रति क्विंटल लेकर बेच दिया। इस पूरी प्रक्रिया में धान मंडी में आया ही नहीं और न ही राइस मिल में पहुंचा लेकिन पोर्टल पर खरीद होकर मंडी से उठान होकर राइस मिल तक पहुंचा दिया। अब इस धान के बदले राइस मिलों को 67 प्रतिशत चावल की आपूर्ति एफसीआई को करनी है। कीमत तो एमएसपी से मिल गई, सारे खर्चे भी बिना किए मिल गए अब चावल को यूपी व अन्य राज्यों से सस्ता चावल खरीदकर कर लेंगे। कुल मिलाकर मोटा मुनाफा कमाने का खेल खेला जा रहा है।
एडीसी सोनू भट्ट के नेतृत्व में जब टीम ने जांच की तो सांभली में बीआरसी ओवसीज राइस मिल में 59049 बोरी धान (2538.720 मीट्रिक टन) व 1742 मीट्रिक टन चावल (2600 मीट्रिक टन धान के बराबर) मिला लेकिन रिकार्ड में मिल को 159833 बोरी धान दिया गया था। 855 मीट्रिक टन धान आखिर कहां गया। मंडी सचिव व डीएफएससी के उपनिरीक्षक ने पकड़े जाने पर बचाव करने के लिए एक एक अनुमति जारी करके दे दिया। दो अन्य राइस मिलों को भी पत्र दिए और तीनों का धान एक ही सग्गा सब-यार्ड में रखवा दिया। खास बात ये रही कि सब यार्ड में जांच के दौरान धान कम मिला। जांच रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से लिखा गया कि इसमें मिलर्स और अफसरों की मिलीभगत से इंकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में मंडी सचिव तरावड़ी संजीव सचदेवा व खाद्य आपूर्ति उपनिरीक्षक रामफल के खिलाफ रिपोर्ट लिखाई गई है।
करनाल सहित चार अनाज मंडियों का खेल खुला
- खेल सिर्फ तरावड़ी अनाज मंडी में ही नहीं बल्कि घरौंडा, करनाल, जुंडला और निसिंग अनाज मंडी में भी खेला गया है, जो सिर्फ एक राइस मिल के सत्यापन के बाद ही सामने आ गया है। अभी तो कई राइस मिलों का सत्यापन किया जाना है। जिला खाद्य आपूर्ति एवं नियंत्रक अनिल कुमार की शिकायत पर थाना सदर में दर्ज कराई गई एफआईआर में मैसर्स बटान फूड्स सलारू के संचालक सतीश कुमार के साथ साथ अनाज मंडी घरौंडा के निरीक्षक यशवीर सिंह, अनाज मंडी जुंडला के निरीक्षक संदीप शर्मा, अनाज मंडी करनाल के निरीक्षक समीर वशिष्ठ तथा अनाज मंडी निसिंग के निरीक्षक लोकेश को भी नामजद किया गया है। इस मिल में स्थलीय सत्यापन 25 अक्तूबर तो किया गया, इसे आवंटित धान को दो स्थानों पर रख लिया, वह भी बिना किसी अनुमति के। मार्केट कमेटी जुडला की रिपोर्ट के अनुसार दूसरे स्थान यानी भाटिया प्लेटी पर लगी पीआर धान के बैग का न होना बताया गया लेकिन जांच में भाटिया प्लेटी जुंडला में राधे राधे राईस मिल जुंडला के 30889 बैग, शक्ति राईस मिल 33045, भोले नाथ राइस मिल 49622 बैग मिले। जबकि बटान फूडस को ई-खरीद पोर्टल अनुसार दिनांक 25 अक्तूबर तक 67013 बैग यानी 25129.87 क्विंटल धान आवंटित किया गया था लेकिन यहां सिर्फ 33254 बैग (12500.18 क्विंटल) धान मिला। कुल 33759 बैग यानी 12659.62 क्विटल धान कम मिला।
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99 गेटपास से दे दिया करोड़ों का धान
मंडी घरौंडा में 6 गेटपास से 1905.75 क्विंटल धान, जहां यशवीर सिंह निरीक्षक हैं, जुडला मंडी में 78 गेटपास से 21668.2 क्विंटल धान (निरीक्षक संदीप सिंह), करनाल अनाज मंडी में 12 गेटपास से 3621.375 क्विंटल धान (मंडी निरीक्षक समीर वशिष्ठ), निसिंग अनाज मंडी में 3 गेटपास से 1229.25 क्विंटल धान यानी कुल 99 गेट पासों से 28424.62 धान बतान फूड सलारू रोड करनाल को व भाटिया प्लेटी जुंडला को दिया गया। एक अनुबंध तैयार किया गया, जिसमें दर्शाया गया कि 11 अक्तूबर से 10 नवंबर तक प्लेटी जुंडला का स्थान बटान फूड को रेंट पर धान का स्टॉक करने के लिए दिया गया है। जिस पर अजय भाटिया नाम के व्यक्ति के हस्ताक्षर भी दिख रहे हैं। जबकि डुंडला मंडी की रिपोर्ट में प्लेटी रेंट पर लेने से इनकार किया गया है। कुल मिलाकर यहां 3 करोड़ 54 लाख 46 हजार 936 रुपये का सरकारी धन का गबन कर लिया गया। जांच रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से राइस मिल संचालक व निरीक्षक यशवीर सिंह, संदीप शर्मा, समीर वशिष्ट एवं लोकेश के साथ साथ संबंधित ट्रांसपोर्टर व आढ़तियों की संलिप्तता का भी शक जाहिर किया गया है।