मूनक। महाग्राम सचिव मूनक नेत्रपाल सिंह राणा ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि फसल अवशेष यानी पराली को जलाना पर्यावरण और कृषि दोनों के लिए घातक है। पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है, मिट्टी में मौजूद मित्र कीट नष्ट हो जाते हैं, जिससे आगामी फसल की पैदावार पर बुरा असर पड़ता है। किसानों को चाहिए कि वे पराली को आग लगाने की बजाए उसका वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करें। इसके लिए सरकार की इन-सीटू (खेत के अंदर) और एक्स-सीटू (खेत के बाहर) दोनों विधियों का उपयोग करें। उन्होंने किसानों से कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ उठाते हुए पराली प्रबंधन करें। संवाद