गुहला-चीका उपमंडल के गांव कांगथली में मंगलवार को एक घर पर आसमान से गिरे आग के गोले से एक भैंस व दो कटड़े झुलस गए।
जानकारी के अनुसार कांगथली निवासी ज्ञान चंद जब स्कूल में ड्यूटी कर रहा था तो उसकी भतीजी नीशू ने फोन पर जानकारी दी की उनके घर के आंगन में आसमान से एक आग ता गोला आकर गिरा है।
ज्ञान चंद ने इसी सूचना तुरंत सीवन पुलिस को दी और घर की और दौड़ा। घर पहुंचने पर ज्ञान चंद की भतीजी नीशू ने उसे बताया कि वह अपने घर में काम कर रहे थे कि तभी आसमान से मोटरसाइकिल के टायर के आकर का एक आग का गोला आया और उनके आंगन में बंधी भैंस पर आकर गिरा, जिससे भैंस और दो कटड़े झुलस गए।
घटना की जानकारी मिलते ही सीवन थाना के एएसआई शमशेर सिंह मौके पर पहुंचे और मौके का मुआयना किया। एएसआई शमशेर सिंह ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि जिस प्रकार से लड़की घटना की जानकारी दे रही है उससे उल्का पिंड होने का ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि इस घटना में भैंस और कटड़े के झुलसने के अलावा कोई अन्य नुकसान नहीं हुआ है। गांव के सरपंच मुलखराज बाजीगर ने बताया कि आग का गोला उनके घर के ऊपर से गुजरा। गोले को देखकर वह भागे। उन्होंने बताया कि गिरते समय करीब दस से बारह फुट लंबी लपटें उठीं। बाद में जब देखा तो वहां धुंआ ही धुंआ फैला था।
इस संबंध में जब डीएवी कालेज चीका के भौतिकी के प्रोफैसर विजय कुमार से बात की गई तो उन्होंने बताया कि उल्का पिंड एक तरह का सॉलिड पीस होता है और इसे कोमैंट कहते हैं।
ये पिंड जब हमारे वातावरण में प्रवेश करते हैं तो वायु व अन्य गैसों के संपर्क में आने पर आग का रूप धारण कर लेते हैं। विजय ने बताया कि जब ये पृथ्वी के संपर्क में आते हैं तो अपने आप नष्ट हो जाते हैं। अगर ये किसी मनुष्य या किसी के ऊपर गिर जाए तो अकसर उसे झुलस देते हैं।
हमारे क्षेत्र में इस प्रकार की घटनाएं बहुत कम देखने को मिलती हैं। इस बारे में फिजिक्स प्राध्यापक संदीप कुमार ने कहा कि आसमान में पदार्थ घूमते रहते हैं। कई बार ये धरती के संपर्क में आने के बाद आग के गोले में बदल जाते हैं। ज्यादा बड़ा साइज का हो तो उसमें अवशेष भी बच जाते हैं।