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पूर्व बैंक प्रबंधक समेत तीन लोगों पर मामला दर्ज

Wed, 11 Dec 2013 10:08 PM IST
करनाल
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करनाल के सिंडिकेट बैंक फ्रॉड मामले में पूर्व प्रबंधक और दो कर्मियों के खिलाफ धोखाधड़ी करने के आरोप में मामला दर्ज कर लिया गया है।
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पुलिस के अनुसार इस मामले में जांच की जा रही है। उधर, बैंक अधिकारियों के अनुसार फिलहाल इस मामले में शिकायत करने वाले लोगों की संख्या 70 पहुंच गई है। कुछ दिन पूर्व सिंडिकेट बैंक के उपभोक्ताओं से लाखों रुपये का फ्रॉड होने का मामला सामने आया था।

इस मामले को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। बैंक के क्लेक्शन एजेंट दीपक कथूरिया के केसों में 32 लाख से अधिक का घोटाला होने की बात सामने आ चुकी है। इस मामले में शहर के लोग जहां कड़ा विरोध जता चुके हैं, वहीं, बैंक के चंडीगढ़ स्थित क्षेत्रिय कार्यालय की टीम के तीन उच्चाधिकारी पूरे मामले को खंगालने में लगे हैं।
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सूत्रों के अनुसार, इन जांच अधिकारियों ने बुधवार को भी बैंक से कुछ रिकॉर्ड मंगवाया है। संभवत: जांच अधिकारी वीरवार को दोबारा मामले की जांच के लिए करनाल आएंगे। इस मामले शहर के उपभोक्ताओं ने मंगलवार को एसपी से शिकायत की थी। बुधवार को थाना शहर पुलिस ने इस मामले में बैंक के पूर्व प्रबंधक और दो बैंक कर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

थाना शहर प्रभारी नायब सिंह के अनुसार इस मामले में पूर्व बैंक प्रबंधक समेत तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। जल्द ही आरोपियों को काबू कर लिया जाएगा।

एफसीआई के गले की फांस बन सकती है चार लोगों की भर्ती
करनाल में भारतीय खाद्य निगम में कई माह पहले की गई चार श्रमिकों की भर्ती का मामला निगम के अधिकारियों और नौकरी पाने वाले श्रमिकों के गले की फांस बन सकता है।

इस मामले में कार्रवाई कराने के लिए नेशनल एंटी क्रप्शन पब्लिक पावर के राज्य अध्यक्ष अश्विनी दत्ता ने इसके खिलाफ निगम के महाप्रबंधक को पत्र लिखा है। दत्ता ने बताया कि उन्होंने अल्टीमेटम दिया है कि 15 दिन में मामले में कार्रवाई नहीं की गई तो शिकायत सीबीआई और केंद्रीय विजिलेंस ब्यूरो को की जाएगी। 20 सितंबर को निगम के करनाल एफएसडी (फूड स्टोरेज डिपो) में चार नए श्रमिक लगाए गए थे।

संस्था पहले ही आरोप लगा चुकी है कि चारों लोगों को पूर्व के लेबर मैनेजर नौकरी देने से इंकार कर चुके थे। इसके बावजूद चारों को उनके नाम पते बदलकर नौकरी दे दी गई। दत्ता ने बताया कि धोखाधड़ी के मामले की शिकायत करनाल के क्षेत्रिय प्रबंधक को की गई थी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। अब मामले में संस्था ने निगम के पंचकूला स्थित जोनल कार्यालय के महाप्रबंधक को भी पत्र लिखा है।

पत्र में साफ कहा गया है कि चारों लोगों की नियुक्तियां उचित नहीं है। उन लोगों ने फर्जी कागजात तैयार कर विभाग के अधिकारियों को गुमराह कर नौकरी पाई है। एरिया प्रबंधक की मिलीभगत के बिना ऐसा संभव नहीं है। ऐसे में इसकी जांच करना बेहद आवश्यक है।

संस्था के राज्य अध्यक्ष दत्ता के अनुसार 21 जून 2012 को तत्कालीन श्रम मैनेजर ने चारों लोगों के आवेदन पत्र के साथ संलग्न किए गए पहचान पत्रों को गलत करार देते हुए नियुक्ति नहीं दी थी।

अगर यह पहचान पत्र गलत थे तो नौकरी दोबारा नहीं दी जा सकती लेकिन यहां यह बताना जरूरी है कि चारों लोगों ने नौकरी पाने के लिए अपने नाम और पहचान तक बदल दी। संस्था का कहना है इस मामले में एरिया प्रबंधक को करीब दो महीने पूर्व शिकायत की थी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।

ऐसे में साफ है कि दाल में कुछ काला है। पुलिस वेरिफिकेशन में भी इन लोगों ने किसी के मकान में किराएदार बताया है, जबकि दो लोग तो फिलहाल भी अपने मकानों में रहते हैं। साथ ही कहा कि मकान बदल जाने से व्यक्ति का नाम और पिता का नाम नहीं बदल सकता।
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पूरे मामले की जांच बहुत जरूरी है। उन्होंने बताया कि देव नंदन मेहतो पुत्र चंडी मेहतो ने अपना नाम बदल कर अशोक कुमार पुत्र जगदीश के नाम से नौकरी पाई है। इस मामले में क्षेत्रिय प्रबंधक एसएस सिंगला पहले ही कह चुके हैं कि नौकरी पुलिस वेरिफि केशन के आधार पर दी गई है।
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